मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मिले पेटीएम के उपाध्यक्ष अभय शर्मा और प्रियांशु मिश्रा, कोरोना योद्धाओं के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु मास्क, ग्लब्स, सैनीटाइजर एवं हैण्डवास दिये

कहा, पेटीएम अपनी सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत, श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर हेतु पेटीएम द्वारा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है

देहरादून, (उत्तराखंड)15,09,20 पेटीएम जल्द ही उत्तराखंड में अपना कार्य़ालय़ खोलेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मिले पेटीएम के उपाध्यक्ष अभय शर्मा और प्रियांशु मिश्रा ने य़ह की इच्छा जाहिर की। इस अवसर पर उन्होंने कोरोना योद्धाओं के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु मास्क, ग्लब्स, सैनीटाइजर एवं हैण्डवास दिये। अभय शर्मा ने कहा कि पेटीएम अपनी सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर हेतु पेटीएम द्वारा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कोविड के दौरान पेटीएम द्वारा लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

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राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सभी अभियंताओं को इंजीनियर-डेकी शुभकामनाएं।

देहरादून, ऋषिकेश, 15 सितम्बर (उत्तराखंड) । मुख्य़मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इंजीनियर्स डे के मौके पर कहा कि सर मोक्षगुंगडम विश्वेश्वरैया ने एक इंजीनियर के रूप में बहुत से अद्भुत काम किये। महान इंजीनियर और आधुनिक भारत के विश्वकर्मा,भारत रत्न डॉ० एम विश्वेश्वरैया जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सभी अभियंताओं को इंजीनियर-डेकी शुभकामनाएं।

इधर, परमार्थ निकेतन के परमाध्य़क्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा, ’आज सभी ’’इंजीनियरों को भगीरथ बनने की जरूरत है’’। धरती पर भगीरथ पहले इंजीनियर थे जिन्होने भागीरथी गंगा को धरती पर लाया था। इसे भगीरथ का प्रयोग कहें या तपस्या जो भी हो वह इतनी विलक्षण थी की आज भी गंगा हमारे पास है और वह भारत की भाग्य विधाता भी है। अब हमें प्रयास करना है कि गंगा माँ धरती पर हमेशा बनी रहे। ऐसा न हो कि सरस्वती एक नदी थी की तरह गंगा भी एक नदी थी का ऐतिहासिक रूप प्राप्त कर लें। ऐसा न सुनना पड़े और आने वाली पीढ़ियों को ऐसा न पढ़ना पड़े कि गंगा अतीत की गोद में समा गयी अतः हम सभी को अपनी सामर्थ्य, शिक्षा एवं योग्यता के अनुसार नदियों, पर्यावरण एवं जल के संरक्षण के लिये कार्य करना होगा। जब देश की नदियों के पुनरूद्धार होगा तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।

उन्होंने कहा, सर मोक्षगुंगडम विश्वेश्वरैया ने सिन्धु नदी से पानी की सप्लाई सुक्कुर गाँव तक करवाई, साथ ही एक नई सिंचाई प्रणाली ब्लाक सिस्टमको शुरू किया. इन्होने बाँध में इस्पात के दरवाजे लगवाए, ताकि बाँध के पानी के प्रवाह को आसानी से रोका जा सके। साथ ही मैसूर में कृष्णराज सागर बांध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उस समय भारत में वह सबसे बड़ा जलाशय था। ऐसे अनेक यादगार कार्य विश्वेश्वरैया जी ने किये।

उन्होंने कहा, एम विश्वेश्वरैया जी को आधुनिक भारत के विश्वकर्मा के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 15 सितंबर, 1861 में मैसूर में हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 1968 में उनकी जन्म तिथि को अभियंता दिवसघोषित किया था। डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को सिंचाई डिजाइन के मास्टर के रूप में उन्होने अपनी उत्कृष्ट पहचान बनायी थी। उनकी सबसे उल्लेखनीय परियोजनाओं में से एक कृष्णा राजा सागर झील और बांध है, जो कर्नाटक में स्थित है। वर्ष 1955 में उनकी अभूतपूर्व तथा जनहितकारी उपलब्धियों के लिये उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।

उन्होंने कहा, एम विश्वेश्वरैया जी को आधुनिक भारत के विश्वकर्मा के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 15 सितंबर, 1861 में मैसूर में हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 1968 में उनकी जन्म तिथि को अभियंता दिवसघोषित किया था। डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को सिंचाई डिजाइन के मास्टर के रूप में उन्होने अपनी उत्कृष्ट पहचान बनायी थी। उनकी सबसे उल्लेखनीय परियोजनाओं में से एक कृष्णा राजा सागर झील और बांध है, जो कर्नाटक में स्थित है। वर्ष 1955 में उनकी अभूतपूर्व तथा जनहितकारी उपलब्धियों के लिये उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।

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उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2020: उत्साह, अभी तक 27 हजार से अधिक तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शन

देवस्थानम बोर्ड द्वारा आज 15 सितंबर शायं तक 426 ई -पास जारी, दो माह बाद कुल 45686 ई- पास जारी हुए

देहरादून: 15 सितंबर। उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम् प्रबंधन बोर्ड द्वारा प्रदेश के लोगों के लिए चार धाम यात्रा का 1 जुलाई से शुभारंभ हुआ जबकि 25 जुलाई से कुछ प्रावधानों के साथ चार धाम यात्रा सभी के लिए शुरू हुई।

चार धाम तीर्थयात्रा हेतु उत्तराखंड से बाहर के तीर्थ यात्री 72 घंटे पूर्व की इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से प्रमाणित लैब से कोरोना जांच की नैगेटिव रिपोर्ट अथवा क्वारंटीन अवधि का प्रमाण एवं स्वास्थ्य मानको का पालन कर देवस्थानम बोर्ड से ई- पास बनाकर चारधाम यात्रा कर सकेंगे। आज शाम तक उत्तराखंड देवस्थानम् प्रबंधन बोर्ड की वेबसाइट www.badrinath-kedarnath.gov. in से 426लोगों ने चार धामों हेतु ई -पास बुक कराये हैं। जिसमें श्री बदरीनाथ धाम के लिए 160 श्री केदारनाथ धाम के लिए 219श्री गंगोत्री धाम हेतु 23 श्री यमुनोत्री धाम हेतु 24 लोगों ने ई पास बुक कराये है।

आयुक्त गढ़वाल/उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम् प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने यह जानकारी दी है कि देवस्थानम बोर्ड द्वारा श्री यमुनोत्री धाम एवं गंगोत्री धाम में न्यासियों/ हकूकधारियों के सहयोग हेतु देवस्थानम बोर्ड के अधिकारियों/कर्मचारियों की तैनाती की है। उन्होंने कहा कि देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अधिनियम के तहत हक हकूकधारियों के सभी हित सुरक्षित हैं। कहा कि देवस्थानम द्वारा अब प्रदेश से बाहर लोगों को कुछ शर्तों के साथ चार धाम यात्रा की अनुमति है। चार धामों में तीर्थयात्रियों को मंदिरों में दर्शन हो रहे है जिसमें किसी तरह का कोई अवरोध नहीं है।

चारधाम यात्रा के अच्छे परिणाम आ रहे हैं। कोरोना महामारी से बचाव एवं रोकथाम हेतु थर्मल स्क्रीनिंग, सेनेटाइजेशन के पश्चात ही मंदिरों में तीर्थ यात्रियों को प्रवेश दिया जा रहा है।मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है शोसियल डिसटेंसिंग का ध्यान रखा जा रहा है। यात्रा मार्ग पर देवस्थानम बोर्ड के यात्री विश्राम गृहों को तीर्थ यात्रियों की सुविधा हेतु खोला जा चुका है। तीर्थयात्रियों से अपेक्षा की जा रही है कि अति आवश्यक होने पर ही धामों में रूके। यह कोशिश रहे कि दर्शन के पश्चात तीर्थ यात्री निकटवर्ती स्टेशनों तक वापस आ जाये। मौसम तथा सड़कों की स्थिति की जानकारी रखें। सड़को की स्थति अब सामान्य है। बरसात के बावजूद यात्रा मार्ग खुले हुए हैं। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि चारों धामों में धीरे-धीरे तीर्थ यात्रियों की आमद हो ताकि पर्यटन एवं तीर्थाटन को गति मिल सके। अब उत्तराखंड से बाहर के लोग भी चारधाम यात्रा हेतु ई पास बनाकर एवं स्वास्थ्य संबंधी मानक पूरे कर यात्रा कर सकते हैं।

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी.सिंह ने बताया कि देवस्थानम बोर्ड द्वारा 1 जुलाई से 15 सितंबर शाम तक 45686 ई -पास जारी किये जा चुके हैं। ई पास तीर्थ यात्रियों को उनके द्वारा सुझाई गयी तिथियों हेतु जारी किये गये है। ई पास लेकर तीर्थयात्री दर्शन को पहुंच रहे हैं।

देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा.हरीश गौड़ ने बताया कि अभी तक 27 हजार से अधिक तीर्थ यात्री चार धाम दर्शन हेतु पहुंच गये है। यात्रा सतत रूप से चल रही है।पोर्टल प्रभारी संजय चमोली के अनुसार ई- पास के लिए श्रद्धालुओं द्वारा लगातार संपर्क किया जा रहा है तथा यात्रियों जी को उचित मार्गदर्शन किया जा रहा है।

(देवस्थानम् प्रबंधन बोर्ड के लिए मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी )

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उत्तराखंड में पेटीएम का कार्य़ालय़ जल्दः अभय शर्मा

- मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मिले पेटीएम के उपाध्यक्ष अभय शर्मा और प्रियांशु मिश्रा, कोरोना योद्धाओं के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु मास्क, ग्लब्स, सैनीटाइजर एवं हैण्डवास दिये

- कहा, पेटीएम अपनी सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत, श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर हेतु पेटीएम द्वारा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है

देहरादून, (उत्तराखंड) 15.09.20- पेटीएम जल्द ही उत्तराखंड में अपना कार्य़ालय़ खोलेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मिले पेटीएम के उपाध्यक्ष अभय शर्मा और प्रियांशु मिश्रा ने य़ह की इच्छा जाहिर की। इस अवसर पर उन्होंने कोरोना योद्धाओं के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु मास्क, ग्लब्स, सैनीटाइजर एवं हैण्डवास दिये। अभय शर्मा ने कहा कि पेटीएम अपनी सेवाओं को और अधिक बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत है। श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर हेतु पेटीएम द्वारा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कोविड के दौरान पेटीएम द्वारा लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

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15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के रूप में भी मनाया जाता हैः

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा, दुनियाभर में 15 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। लोकतंत्र का तात्पर्य समावेश, समान व्यवहार और समान भागीदारी। वास्तव में यह शांति, सतत् विकास और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिये एक उत्कृष्ट पहल है। विविधता में एकता ही भारतीय लोकतंत्र की विशेषता है। आजादी के पश्चात भारत ने बहुत विकास किया लेकिन किसी भी परिपक्व लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सामाजिक समरसता के धरातल पर कितना विकास हुआ। साथ ही गरीबी, निरक्षरता, सांप्रदायिकता, लैंगिक भेदभाव और जातिवाद को और किस प्रकार कम किया जा सकता है। भारत में व्याप्त भेदभावों को कम करने के लिये हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा।