Chandigarh,20.02.19-14th विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल की 23 वीं शाम जाने-माने विजुअल आर्टिस्ट भीम मल्होत्रा जी के अनुभवों के नाम रही।जिन से रूबरू का दौर स्वयं जाने-माने विजुअल आर्टिस्ट विनय वडेरा जी ने आगे बढ़ाया । 1964 में "जलेबीओं के शहर" गोहाना में जन्मे भीम मल्होत्रा जी का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ ।

गोहाना की गलियों ,दीवारों और दुकानों के शटर कभी शौकिया तो कभी खर्चे के लिए पेंट करने से लेकर चंडीगढ़ आर्ट स्कूल तक पहुंचने का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा ।बकौल भीम मल्होत्रा जी, स्कूल के आर्ट टीचर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उनके परिवार को उन्हें इस क्षेत्र में आगे की पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ आने के लिए मनाया।सामान्य परिवार से थे तो चंडीगढ़ आकर एक पल भी बर्बाद करना एक गुनाह के जैसे लगता था। जिस समय बच्चे कॉलेज बंक करके मौज मस्ती करते , भीम जी हॉस्टल में रहकर रंगों के साथ खेला करते थे ,कैनवस के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करते थे ।


शायद यही नतीजा था कि सेकंड ईयर में जब उनकी आयु लगभग 20 वर्ष रही होगी ,उनकी बनाई एक पेंटिंग अमेरिका में 500 यूएस डॉलर में बिकी जिस पर उन्होंने कहा कि यह नतीजा सिर्फ मेहनत और एकाग्रता का था जो गांव की गलियों से चंडीगढ़ की बड़ी इमारतों के बीच के सफर में उन्होंने सीखा।आर्ट कॉलेज में क्या करवाया जाता वह सिर्फ उस पर निर्भर नहीं रहते थे, वह खुद चीजें खोजने और ऑब्जरवेशन करने निकलते थे जब भी समय मिलता।


कॉलेज से निकल कर उन्होंने कुछ समय उसी आर्ट कॉलेज में नौकरी की ,कुछ समय एक प्राइवेट एडवर्टाइज़मेंट एजेंसी में बिताया । उसी दौरान उन्हें दिल्ली आर्ट कॉलेज से भी नौकरी का लेटर मिलाकुछ साल वहां बिताए और फिर वापस चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर से नौकरी का ऑफर आया और समय उन्हें फिर से सपनों के शहर चंडीगढ़ ले आया।

इतनी नौकरियां बदले जाने पर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि कहीं पर पहुंचने के लिए कहीं से निकलना बहुत ज़रूरी है, इसलिए जिंदगी में कुदरती तौर पर जो भी अच्छा ऑप्शन सामने आए उसे अपनाने में कतई भी संकोच नहीं करना चाहिए।कभी भी अपनी नौकरी से मोहब्बत मत करो ,आप नौकरी को अपनाओ या ना अपनाओ पर आपकी नौकरी एक दिन जरूर आपको ठुकरा देगी ,इसलिए सही मौका मिलने पर वहां से निकलना बेहद जरूरी है ।उनका कला के प्रति प्रेम ही था कि विदेश में लंदन समेत उनकी पेंटिंग्स की अनेकों प्रदर्शनीयां भारत के विभिन्न शहरों में लगी।

यहां तक कि लंदन में हुई एक भव्य प्रदर्शनी में उनकी थीम बेस्ड पेंटिंग्स "शेड्स ऑफ इंडियन लैंडस्केप" में उन्होंने पंजाब के खेत, जैसलमेर की गलियों समेत भारत के अनेकों रंग दिखाएं ,जो कि अगली सुबह लंदन की सभी बड़ी अखबारों की सुर्खियां बने। आज आलम यह है कि चंडीगढ़ प्रशासन भी उनकी सेवायें निरंतर ले रहा है, प्रशासन का कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट हो या कदम उसमें भीम मल्होत्रा जी की भूमिका अहम रहती है।