"कुदरत से खिलवाड़ न कर"
कोरोना बिमारी बढ़ गई
काम नहीं बेरोजगारी बढ़ गई
हर चीज का रेट बढ़ गया
मुश्किल से जो कम हुआ था
फिर से यारो पेट बढ़ गया.. !!
बैठे-बैठे टैंशन बढ़ गई..
देखो क्या ये आफत पड गई..
लोगों में अब दुरी बढ़ गई
पहले-पहल तो मजबूरी थी
अब ये बहुत जरूरी बन गई..!!
दुकानों पर ताले जड़ गए
राशन के भी लाले पड़ गए..
जिन चीजों की कद्र नही थी
उनकें भी अब मोल बढ़ गए..!!
बाहर जाना बंद हो गया
बाहर खाना बंद हो गया..
पहले तो महफ़िल जमती थी
अब सबका आना बंद हो गया..!!
बंदे से अब बंदा डरता
दो गज से बात है करता..
दहशत का माहौल हो गया
बन बैठे थे, खुदा जो खुद में
सबका डब्बा गोल हो गया..!!
"इसां है
कुछ अच्छा कर
"कुदरत से खिलवाड़ न कर"
हद है तेरी हद में रह
अपनी हदें तु पार न कर..!!
एक हद तक तो सह लेगी सब
कुदरत तुझको सब दे देगी
अपनी हदों को भूल गए गर.
फिर कुदरत भी बदला लेगी..!!
प्रदीप मेहरा लेखक, फ्रीलांस आर्टिस्ट है वह कईं बार पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित अपनी पेन्टिंग प्रदर्शनी गवर्मेंट म्यूजियम एवं आर्ट गैलरी सेक्टर-10 चंडीगढ़ में लगा चुके है। इसके इलावा हरियाणा और हिमाचल में भी कईं पेंटिंग्स प्रदर्शनी लगा चुके हैं। उन्हें कविताएं और रचनाएँ लिखने का भी शौक है।