Chandigarh,31.03.20-सरकार के दिशा निर्देश अनुसार कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सभी अपने घरों में है । इस वैश्विक महामारी के कारण जिस तरह तनाव की स्थिति बनी हुई है उसे कम करने के लिए योगा फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेशनल योगा रेफेरी कुलदीप मेहरा ने बताया कि हमारे लिए सबसे अच्छा है कि हम योग का सहारा लें। क्योंकि योगासन और प्राणायाम के माध्यम से हम तनाव से तो मुक्ति पा ही सकते हैं और अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ा सकते हैं। अच्छी बात यह होगी कि हम आसनों और प्राणायामों को करने में अपना अच्छा खासा समय भी बिता सकते है। वैसे तो कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में सभी आ रहें है लेकिन सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को है जो मधुमेह, रक्तचाप, तनाव, हृदय रोग, थाईराइड एवं अस्थमा जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं। इसलिए हमने घर पर रहकर ही कुछ सरल योगासनों एवं प्राणायामों के माध्यम से इन बीमारियों के खतरे को कम कर सकतें है। हम इन बीमारियों से बचें रहेंगे तभी तो अपने आप को तन्दरूस्त एवं फिट महसूस करेंगे। योग करने से शरीर पूर्णतया स्वस्थ एवं स्वच्छ तो रहता ही है इससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता भी बढ़ती है और हमारा श्वसन तंत्र भी मजबूत होता है। कोरोना वायरस से बचाओ के लिए हमें सरकार द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों का पालन करना है और घरों में रहकर सामाजिक दूरी भी बनायें रखनी है।
नेशनल योगा रेफेरी कुलदीप मेहरा ने कहा कि इन बीमारियों से बचने के लिए अपने चारों और योग के माध्यम से सुरक्षा कवच तैयार करना होगा। इसके लिए आप यह योगासन एवं प्राणायामों कर सकते हैं :-
पश्चिमोत्तासन- सबसे पहले आप जमीन पर बैठ जाएं। अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं। पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें। धीरे धीरे सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं। फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके। अपने हाथों से उँगलियों को पकड़ने और नाक को घुटने से मिलाने की कोशिश करें।
लाभ:- उच्च रक्तचाप के दौरान आपकी धमनियां सिकुड़ने लगती हैं जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। पश्चिमोत्तासन आपके धमनियों को लचीला बनाता है और बल्ड प्रेशर को कम करता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से शरीर की चर्बी और मोटापा तथा मधुमेह का रोग भी ठीक किया जा सकता है। यह आसन उन महिलाओं के लिए भी रामबाण का कार्य करता है जिन स्त्रियों में योनिविकार, मासिक धर्म सम्बन्धी समस्या तथा प्रदर आदि रोगों की समस्या हैं। इस आसन से पीठदर्द, पेट के रोग, यकृत रोग, तिल्ली, आंतों के रोग तथा गुर्दे के रोगों को तो ख़त्म करता ही है साथ ही क्रोध, सिरदर्द, साइनस और अनिद्रा के उपचार में भी लाभ मिलता है।
शवासन- शव का अर्थ होता है मृत अर्थात अपने शरीर को शव के समान बना लेने के कारण ही इस आसन को शवासन कहा जाता है। यह आसन एक शिथिल करने वाला आसन है।
लाभ:- इस आसन को रोज 20 मिनट तक करने से दिमाग शांत हो जाता है, तनाव खत्म हो जाता है। इससे आपका बल्ड प्रेशर सामान्‍य हो जाता है। यह आसन शरीर, मन, और आत्मा को स्फूर्ति और ताजगी प्रदान करता है। यह आसन करने से आपके अंदर की प्राण ऊर्जा पुनः स्थापित कर पाते हैं।
मंडूकासन- मंडूक का अर्थ है मेंढक अर्थात इस आसन को करते समय मेंढक के आकार जैसी स्थिति प्रतीत होती है इसीलिए इसे मंडूकासन कहते हैं। वज्रासन में बैठ जाएं फिर दोनों हाथों की मुठ्ठी बंद कर लें। मुठ्ठी बंद करते समय अंगूठे को अंगुलियों से अंदर दबाइए। फिर दोनों मुठ्ठियों को नाभि के दोनों ओर लगाकर श्वास बाहर निकालते हुए सामने झुकते हुए ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। थोड़ी देर इसी स्थिति में रहने के उपरांत धीरे धीरे वापिस वज्रासन में आ जाए।
लाभ:- यह आसन पेट के लिए अत्यंत ही लाभयादयक इस आसन से अग्न्याशय सक्रिय होता है जिसके कारण पैंक्रियाज से इंसुलिन रिलीज करने में मदद मिलती जिससे डायबिटीज के रोगियों को लाभ मिलता है। यह हृदय के रोगियों के लिए भी अत्यंत लाभदायक माना गया है।
वज्रासन- वज्र का अर्थ कठोर, मजबूत, प्रबल ऐसा होता है। इस आसन को करने के लिए घुटनों को मोड़कर पंजों के बल सीधा बैठें। नितंब दोनों एड़ियों के बीच में आ जाएं और दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिलने चाहिए, एड़ियों में थोड़ी दूरी होनी चाहिए। शरीर का सारा भार पैरों पर रखें। दोनों हाथों को जांघों पर रखें। आपकी कमर से ऊपर का हिस्सा बिल्कुल सीधा होना चाहिए। थोड़ी देर इस अवस्था में बैठकर लंबी सांस लें।
लाभः- समस्त योगासनों में वज्रासन ही एक ऐसा आसन है जिसे भोजन या नाश्ता करने के उपरांत तुरंत भी किया जा सकता है। इससे पाचन शक्ति तेज होती है यह कब्ज दूर करता है। इससे रीढ, कमर, जाँघ, घुटने और पैरों में शक्ति बढती है। इस आसान में धीरे-धीरे लम्बी गहरी साँसे लेने से फेफड़े मजबूत होते हैं। शरीर में रक्त प्रवाह दुरुस्त करता है। स्त्रियों के मासिक धर्म की अनियमित्ता जैसे रोग दूर होते हैं।
उष्ट्रासन- उष्ट्रासन शब्द का अर्थ 'उष्‍ट्र' यानि ऊंट होता है। इस आसन में शरीर ऊंट की तरह लगता है। उष्ट्रासन को अंग्रेजी में “Camel Pose” भी कहा जाता है। सबसे पहले आप वज्रासन में बैठे। ध्यान रहे जांघों तथा पैरों को एक साथ रखें, पंजे पीछे की ओर हों तथा जमीन पर जमे हों। घुटनों तथा पैरों के बीच अपने अनुसार दूरी रखें। अब आप अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं। सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें और अब दाईं हथेली को दाईं एड़ी पर तथा बाईं हथेली को बाईं एड़ी पर रखें। ध्यान रहे कि पीछे झुकते समय गर्दन को झटका न लगे। अंतिम मुद्रा में जांघें फर्श से समकोण बनाती हुई होंगी और सिर पीछे की ओर झुका होगा। फिर धीरे धीरे उसी अवस्था में वापिस आ जाएं।
लाभः- यह आसन उन लोगों के लिए रामबाण है जो थाईराइड से ग्रसित है। यह गर्दन में उपस्थित मांसपेशियों को फैलाता है जहां थायरॉयड और पैराथायरायड ग्रंथियां स्थित होती हैं। उष्ट्रासन योग इन ग्रंथियों को उत्तेजित करता है और उनके कामकाज में सुधार करता है। यह योग आसन अंतःस्रावी ग्रंथियों पर भी सकारात्मक रूप से कार्य करता है और अंडाशय, पीनियल ग्रंथियों आदि से संबंधित बीमारियों को कम करता है। उष्ट्रासन पैंक्रियास को उत्तेजित करता है और इन्सुलिन के स्राव में मदद करता है। इसलिए यह डायबिटीज को कण्ट्रोल कर सकता है। यह फेफडों से सम्बंधित परेशानियों से आप को बचाता है। यह क्रोध को कम करते हुए आपको शांत करने में मदद करता है। दृष्टि विकार वाले व्‍यक्तियों के लिए यह उपयोगी है। गर्दन के दर्द को भी कम करने में मदद करता है। पाचन संबंधी समस्‍याओं को ठीक करता है। यह आसन महिलाओं में मासिक धर्म जैसी परेशानियों को दूर करने में लाभदायक है।
उष्ट्रासन से स्लिप डिस्क में लाभ मिलता है: इस आसन को एक्सपर्ट के सामने करने पर यह स्लिप डिस्क एवं साइटिका को दूर करने में भी मददगार साबित होता है।
प्राणायाम:- प्राणायाम दो शब्दों के योग से बना है (प्राण+आयाम) पहला शब्द "प्राण" है दूसरा "आयाम"। प्राण का अर्थ जो हमें शक्ति देता है या बल देता है। आयाम का अर्थ विस्तार करना। श्वास-लेने सम्बन्धी खास तकनीकों द्वारा प्राण पर नियंत्रण यानि प्राणो का विस्तार करना ही प्राणायाम कहलाता है। या प्राणों के सम्यक् व संतुलित प्रवाह को ही प्राणायाम कहते हैं ।
कपालभाति प्राणायाम- ध्यान के किसी आसन में बैठ जाएं। अब आंखों को बंद कर लें। पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। अब नाक से तेजी से श्वाश बाहर निकालने की क्रिया करें। सांस को बाहर निकालते वक्त पेट को भीतर की ओर खींचें। ध्यान दें कि सांस को छोड़ने के बाद, सांस को बाहर न रोककर बिना प्रयास किए सामान्य रूप से सांस को अन्दर आने दें। इससे एक सेकेंड में एक बार सांस फेंकने की क्रिया कह सकते हैं। इसके बाद सांस को अंदर लें। ऐसा करते वक्त संतुलन बनाए रखें। आपके अंदर से धौकनी के जैसी आवाज आयेगी। इस प्रकिया को धीरे-धीरे बढ़ाये।
लाभः- कपालभाति प्राणायाम फेफड़ों, स्प्लीन, लीवर, पैनक्रियाज के साथ-साथ दिल के कार्य में सुधार करता है। यह न केवल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है बल्कि धमनी के अवरोध को दूर करने में भी मददगार है। यह शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके करने स्व अस्थमा रोगियों को लाभ मिलता है। इससे मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन कम होने लगता है। इस प्राणायाम के करने से कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी पेट से संबंधित समस्या भी दूर हो जाती है। यह प्राणायाम साइनस को शुद्ध करता है तथा मस्तिष्क को सक्रिय करने में मदद करता है।
अनुलोम विलोम प्राणायाम- अनुलोम का अर्थ होता है सीधा और विलोम का अर्थ है उल्टा। यहां पर सीधा का अर्थ है नाक का दाहिना छिद्र और उल्टा का अर्थ है नाक का बायां छिद्र । अर्थात अनुलोम-विलोम प्राणायाम में नाक के दाएं छिद्र से सांस खींचते हैं, तो बायीं नाक के छिद्र से सांस बाहर निकालते है। यह प्राणायाम आप सुखासन या पद्मसान में बैठकर कर सकते हैं।
लाभः- फेफड़े शक्तिशाली होते है। सर्दी, जुकाम व दमा से काफी हद तक बचा जा सकता है। हृदय एवं शरीर में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाता है। पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है।
भ्रामरी प्राणायाम- भ्रामरी प्राणायाम करते समय आपके अंदर से भवरे की गुंजन की तरह आवाज आनी चाहिए। आप सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठें। दोनो अंगूठों से कान पूरी तरह बन्द करके, दो उंगलिओं को माथे पर रख कर, छः उंगलियों को दोनो आँखो पर रख दे। और लंबी साँस लेते हुए कण्ठ से भवरें जैसा (म……) आवाज निकालना है ।
लाभ:- यह मायग्रेन पेन, डीप्रेशन, और मस्तिष्क से सम्बधित सभी व्याधिओं को मिटाने के लिये है। मन और मस्तिषक की शांति मिलती है। एकाग्रता को बढाता है।
उद्गीथ एवं प्रणव प्राणायाम- सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन में बैठें। आँखे बंद करके दोनों हाथों की उंगलियां कानों में डालकर लम्बा गहरा श्वास अंदर लें और मुँह से ॐ "ओउम" का जाप करते समय श्वास बाहर छोड़ते रहें।
लाभ:- आपके शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है माइग्रेन, डिप्रेशन और मस्तिक से संबंधित सभी व्याधियों को मिटाने के लिए और मस्तिष्क शांति के लिए इन दोनों प्राणायाम को किया जा सकता है
आगे मेहरा ने यह भी सुझाव दिया कि जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या है वह लोग शीतली प्राणायाम, शीतकारी प्राणायाम और चंद्रभेदी प्राणायाम कर सकते हैं । जो व्यक्ति अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना चाहता हैं वह पद्मासन, धनुरासन, भुजंगासन, हलासन, चक्रासन आदि आसन भी कर सकते है। इसके इलावा अगर आप सिर्फ 7 बार सूर्य नमस्कार का अभ्यास भी कर लेंगे तो आप पुर्णतः स्वस्थ रहेंगें।