CHANDIGARH,18.02.20-प्राचीन कला केन्द्र द्वारा एक व्यापक लैक्चर डेनोस्ट्ेशन का आयोजन एम.एल.कौसर आॅडिटोरियम में किया गया । जिसमें ट्ीनीडाड से आए प्रसिद्ध वायलिन वादक एवं गुरू डाॅ.शिवानंद महाराज ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में नए आयामों,परिवर्तनों की बारीकियों को नए पक्ष से प्रस्तुत किया । डाॅ.शिवानंद एक मंझे हुए कलाकार होने के साथ-साथ वेस्ट इंडीज यूनिवर्सिटी में भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रोफैसर के तौर पर कार्य कर रहे हैं ।
डाॅ.शिवानंद ने भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत को पारम्परिक ढंग से सम्मिश्रित करके नए आयाम प्राप्त किए हैं । उन्होंने भारतीय संगीत की पारम्परिकता के मूल भाग को छेड़े बिना उसके साथ पाश्चात्य संगीत का सम्मिश्रण करके नए प्रयोग करके सफलता प्राप्त की है और उन्हें इसके लिए सराहना भी प्राप्त हुई है ।
इस कार्यशाला का उदेश्य दर्शकों को भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत के समिश्रण का सुंदर स्वरूप दिखाकर उसकी बारीकियों को पेश करना था । उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं तंत्रवादन की बारीकियों को प्रैक्टिकल एवं थ्योरेटिकल माध्यम से समझाया ।
उपरांत उन्होंने गायन एवं वायलिन वादन भी प्रस्तुत किया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा । इनके साथ तबले पर पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध तबला वादक डाॅ. महेंद्र प्रसाद वर्मा ने बखूबी संगत की ।
केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया ।