चण्डीगढ़, 16 जनवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में,अराजकीय सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों से पहली जनवरी, 1988 से 10 मई,1998 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों द्वारा दी गई सेवाओं का सम्मान करते हुए, उन्हें पंडित दीन दयाल उपाध्याय मानदेय योजना के तहत मानदेय देने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इस योजना से इस अवधि के दौरान सेवानिवृत्त हुए 146 कर्मचारियों को लाभ होगा। यह नीति पहली अप्रैल, 2017 से लागू होगी।
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडियाकर्मियों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्रिंसीपल को 30,000 रुपये, लेक्चरर को 25,000 रुपये, श्रेणी-ढ्ढढ्ढढ्ढ के गैर-शिक्षण कर्मचारियों को 11,000 रुपये और चतुर्थ श्रेणी के गैर-शिक्षण कर्मचारियों को 6,000 रुपये का मासिक मानदेय दिया जाएगा। मानदेय के लाभार्थी ने स्वीकृत या सहायता प्राप्त पदों के समक्ष कार्य किया हो और उसके बाद सेवानिवृत्त हुआ हो। उन्होंने बताया कि  जिन कर्मचारियों ने सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में कार्य किया था और सरकार द्वारा अपने अधीन ले लिए गए थे, वे भी मानदेय के पात्र होंगे बशर्ते कि उन्होंने सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में 10 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए कार्य किया हो। 
उन्होंने बताया कि यह मानदेय किसी कर्मचारी के जीवित रहने तक ही दिया जाएगा और यह उसके आश्रितों या कानूनी वारिस को नहीं दिया जाएगा। मानदेय केवल उन्हीं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दिया जाएगा जो इस प्रकार के अन्य पेंशन लाभ नहीं ले रहे हैं।
*हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में, पुनर्वास एवं नशा मुक्ति केंद्रों कीकार्य प्रणाली में सुधार लाने के दृष्टिïगत हरियाणा नशा मुक्ति नियम, 2010 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इन नियमों को  हरियाणा नशा मुक्ति नियम (संशोधन) नियम, 2018 कहा जाएगा। 
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडियाकर्मियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि संशोधन के अनुसार, राज्य स्तरीय कमेटी में सरकारी और गैर-सरकारी सदस्य शामिल होंगे। स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा महिला एवं बाल विकास विभागों के प्रशासनिक सचिव, पुलिस महानिदेशक या उनका प्रतिनिधि (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के रैंक से नीचे न हो) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा उच्च शिक्षा विभागों के निदेशक कमेटी के सरकारी सदस्य होंगे। महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं कमेटी के सदस्य सचिव होंगे। इसी प्रकार, राज्य स्तर कमेटी में क्षेत्र में कार्यरत मौजूदा गैर-सरकारी संगठनों के दो प्रतिनिधि, दो प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता और स्वापक अनाम तथा मद्यसारिक अनाम के दो प्रतिनिधि शामिल होंगे। वरिष्ठतम प्रशासनिक सचिव कमेटी की अध्यक्षता करेंगे।
     उन्होंने बताया कि मनोविकृति नर्सिंग होम्स या अस्पतालों, जो मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम,1987(1987 का केन्द्रीय अधिनियम 14) तथा केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण नियम, 1990 के अधीन लाइसेंसधारक हैं तथा जो नशे के आदियों को उपचार दे रहे हैं तथा देखभाल कर रहे हैं, को लाइसेंस प्राप्त करने से छूट होगी। 
उन्होंने बताया कि वे मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (1987 का केंद्रीय अधिनियम 14) के प्रावधानों के तहत शासित होंगे। हालांकि, उन्हें स्वयं को लाइसेंसिंग प्राधिकरण में पंजीकृत करवाना होगा और निर्धारित प्रोफार्मा अर्थात मादक द्रव्य दुरुपयोग निगरानी प्रणाली में नशा मुक्ति मामलों का डाटा जमा करवाना होगा। निगरानी, पर्यवेक्षण और निरीक्षण के संबंध में वे जिला स्तरीय कमेटी  के कार्यक्षेत्र के अधीन भी होंगे।
        उन्होंने बताया कि लाइसेंस, इसके जारी होने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए वैध होगा, जब तक कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा इसे निलंबित, निरस्त या रद्द न किया जाए।
 कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि यदि  केंद्र के निरीक्षण पर यह पाया जाता है कि केंद्र इन नियमों में निर्दिष्ट देखभाल के न्यूनतम मानकों का पालन नहीं कर रहा है या जिला स्तरीय कमेटी से मानवाधिकारों के उल्लंघन की कोई रिपोर्ट प्राप्त होती है या लाइसेंसिंग प्राधिकरण के ध्यान में  ऐसी कोई शिकायत  आती है, तो वह लाइसेंस को रद्द कर सकता है। 
  उन्होंने  बताया कि लाइसेंसिंग प्राधिकरण देखभाल के न्यूनतम मानकों में किसी प्रकार की कमी होने या जिला स्तरीय कमेटी से मानवाधिकारों के उल्लंघन की कोई रिपोर्ट प्राप्त होने पर, निलम्बन आदेशों के जारी होने की तिथि से लाइसेंस को निलम्बित कर सकता है। लाइसेंसिंग प्राधिकरण  पंद्रह दिनों की अवधि के भीतर जांच शुरू कर सकता है। परन्तु इस तरह के केंद्र को लाइसेंसिंग प्राधिकरण द्वारा गठित जांच समिति द्वारा सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। यह समिति लाइसेंसिंग प्राधिकरण को एक महीने की अवधि के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी; जांच समिति से रिपोर्ट  मिलने पर, लाइसेंसिंग प्राधिकरण इसके बारे में निर्णय लेगा।
उन्होंने बताया कि असंतुष्टिï व्यक्ति महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा के पक्ष में भुगतान योग्य डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से 300 रुपये के शुल्क के साथ ऐसे निरस्तीकरण की सूचना की तिथि से  तीस दिन की अवधि के भीतर लाइसेंस रद्द करने के विरूद्घ अपील दायर कर सकता है।
वित्त मंत्री ने बताया कि यदि आवेदक को लाइसेंस देने से इंकार कर दिया जाता है तो वह प्रपत्र ढ्ढढ्ढढ्ढ में, लाइसेंसिंग प्राधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील प्राधिकरण के सम्मुख अपील कर सकता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और स्वास्थ्य विभागों के प्रशासनिक सचिव अपील प्राधिकरण के सदस्य और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक इसके सदस्य सचिव होंगे। 
        उन्होंने बताया कि परामर्श-सह-पुनर्वास केंद्र के लिए लाइसेंस संस्थान के प्रभारी व्यक्ति के नाम पर दिया जाएगा। एक व्यक्ति को केवल एक लाइसेंस दिया जाएगा। केन्द्र केवल 15 बिस्तर संख्या के लिए निर्दिष्ट मानवशक्ति का रख-रखाव करेंगे, परन्तु  15 बिस्तर संख्या से अधिक के लिए लाइसेंस के मामले में, डॉक्टर या मनोचिकित्सक को छोडक़र, निर्धारित मानदंडों के गुणज में अपेक्षित मानव शक्ति को नियोजितकरना होगा। लाइसेंस प्रदान करने के एक वर्ष के भीतर केन्द्र को, केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विकसित ऐसे केंद्रों के लिए एनएबीएच प्रत्यायन प्राप्त करना होगा।
उन्होंने बताया कि किसी भी मरीज तब तक परामर्श केंद्र में भर्ती नहीं किया जाएगा जब तक कि वह किसी मनोविकृति सम्बन्धी नर्सिंग होम या अस्पताल में डिटोक्सीफिकेशन के अधीन न हो। यह तथ्य प्रमाण पत्र के रूप में रिकॉर्ड पर होगा।
          कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि भारत सरकार द्वारा विकसित मादक द्रव्य आदी निगरानी प्रणाली (डीएएमए) प्रफोर्मा, सॉफ्टवेयर फार्मेट में विकसित किया जाएगा और राज्य स्तर पर डाटा समावेश तथा विश्लेषण के उद्देश्य से प्रत्येक लाइसेंसशुदा नशामुक्ति या परामर्श केंद्रों को लॉगिन व  पासवर्ड जारी किया जाएगा। यह सॉफ्टवेयर स्वास्थ्य विभाग द्वारा विकसित किया जाएगा। डीएएमएस के आंकड़़े स्वास्थ्य विभाग द्वारा कायम किए जाएंगे और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के साथ सांझा किए जाएंगे। 
 
 *हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जिला पंचकूला में बडय़ाल से नीमवाला सडक़ पर 12 किलोमीटर पर रून नदी पर 21-21 मीटर के तीन स्पैन वाले एचएल पुल के निर्माण के लिए बातचीत के जरिए तय 14.32 लाख रुपये से अधिक की राशि से गांव नीमवाला में चार बीघा 4 बिसवा भूमि की खरीद को स्वीकृति प्रदान की गई है। 
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने आज मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी। उपायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति ने निजी भूमि की कीमत पर बातचीत की।
उन्होंने कहा कि इस पुल के निर्माण के उपरांत हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच अंतर-राज्यीय कनेक्टिविटी में सुधार होगा।  इससे आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास की गति में भी तेजी आएगी जिससे गरीबी उन्मूलन हो सकेगा। 
* हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार न्यायिक परिसर, खरखौदा के निर्माण के लिए नगर समिति, खरखौदा की 22 कनाल 15 मरला भूमि न्यायिक प्रशासन विभाग को हस्तांतरित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।
         हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने आज मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने सरकारी प्राथमिक स्कूल के लिए शिक्षा विभाग को नगर निगम, यमुनानगर की 700 वर्ग गज भूमि हस्तांतरित करने की भी स्वीकृति प्रदान की। भूमि 120 रुपये प्रति वर्ग गज के विकास शुल्क के साथ 52 लाख रुपये प्रति एकड़ की कलेक्टर दर पर हस्तांतरित की जाएगी।
          इसके अलावा, खरखौदा में मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए नगर समिति, खरखौदा की 22 कनाल 17 मरला भूमि राजस्व विभाग को हस्तांतरित करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई।
          उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने गांव लक्कड़पुर फरीदाबाद की राजस्व सम्पदा में खसरा संख्या 214 में स्थित और नगर निगम, फरीदाबाद से संबंधित 575 वर्ग गज भूमि गांव लक्कड़पुर निवासी श्री रघुवीर सिंह को 120 रुपये प्रति वर्ग के विकास शुल्क के साथ 45,000 रुपये प्रति वर्ग गज की बाजार दर दिए जाने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
* हरियाणा सरकार ने हरियाणा राज्य वित्तीय सेवाएं लिमिटेड के नाम से एक नई गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) स्थापित करने का निर्णय लिया है जो प्रदेश में राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्वायत्त निकायों के अधिशेष धन के कुशल प्रबंधन के लिए एक इन-हाउस ट्रेजरी मैनेजर  के रूप में कार्य करेगी।
          हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इस आशय का निर्णय आज यहां मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई  राज्य मंत्रिमंडल की एक बैठक में लिया गया।
         उन्होंने कहा कि एनबीएफसी राज्य सरकार की संस्थाओं को ओवरनाइट फंड पर बेहतर जमा दरें प्रदान करेगी। इसके अलावा, यह राज्य सरकार की संस्थाओं को वर्षभर बेहतर जमा दरें प्रदान करेगी। यह बैंकिंग उद्योग की तुलना में राज्य सरकार की संस्थाओं को बेहतर ऋ ण दरें भी प्रदान करेगी।
          एनबीएफसी जल्दी और परेशानी मुक्त ऋ ण सुविधा प्रदान करेगी और राज्य सरकार के संस्थानों के बीच वित्तीय अनुशासन सृजित करेगी। यह सामान्य प्रशासन विभाग के संपूर्ण नियंत्रण और पर्यवेक्षण के तहत धन के विवेकपूर्ण प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत तंत्र प्रदान करेगा।
         उन्होंने कहा कि कंपनी को कंपनी अधिनियम के तहत एक लिमिटेड कंपनी के रूप में स्थापित किया जाएगा और भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) के साथ एनबीएफसी के रूप में पंजीकृत होगी। कंपनी की प्राधिकृत पूंजी 10 करोड़ रुपये होगी और पहली अवधि में पेड अप कैपिटल दो करोड़ रुपये होगी। कंपनी की संपूर्ण इक्विटी राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित होगी जबकि सामान्य प्रशासन विभाग कंपनी का प्रशासनिक विभाग होगा।
          कंपनी द्वारा राज्य सरकार, एक निगमित निकाय, सरकारी कंपनी, राज्य या नगर निगम, स्थानीय निकाय, सरकार के पूर्ण स्वामित्व या अर्ध स्वामित्व वाली कम्पनी को जमानत के बिना या जमानत के साथ अग्रिम,जमा, ऋण या वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह एक वित्तीय कंपनी के कारोबार को जारी रखेगी और राज्य सरकार की संस्थाओं को लघु या दीर्घकालिक ऋण प्रदान करेगी। इसके अलावा, यह केंद्र या राज्य सरकार, बैंकों, वित्तीय संस्थानों, कंपनियों, ट्रस्टों, सहकारी समितियों,अन्य वित्तीय एजेंसियों या व्यक्तियों से बिना ब्याज या ब्याज के साथ अनुदान, ऋण, अग्रिम या अन्य धनराशि या डिपोजि़ट या अन्य लेन-देन करेगी। 
        उन्होंने कहा कि  मुख्य सचिव कंपनी के अध्यक्ष होंगे जबकि सहकारिता, बिजली, उद्योग, कृषि, नगर एवं ग्राम आयोजना तथा  शहरी स्थानीय निकाय विभागों के प्रशासनिक सचिव अन्य पदेन निदेशक होंगे। इसका एक स्वतंत्र निदेशक भी होगा जो धन प्रबंधन पर अनुभव रखने वाला एक प्रख्यात वित्तीय पेशेवर होगा और वित्त विभाग का सचिव इसका प्रबंध निदेशक होगा।
*सभी के लिए आवास’ के उद्देश्य को प्राप्त करने और हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा कार्यान्वित प्रधानमंत्री आवास योजना कार्यक्रम के तहत पहचान किए गए लाभार्थियों को अधिकतम लाभ प्रदान करने के मद्देनजर मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मौजूदा सस्ती आवास नीति 2013 में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी लाभार्थियों को शामिल करने का प्रावधान करने का निर्णय लिया।
          हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने आज मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संशोधन के अनुसार, कोई भी व्यक्ति नीति के तहत आवेदन कर सकता है हालांकि, शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-सभी के लिए आवास’ योजना के तहत पहचान किए गए पीएमएवाई लाभार्थी, जिनमें उनके पति या पत्नी या आश्रित बच्चे शामिल हैं, को आबंटन में वरीयता दी जाएगी। उस शहर के पहचान किए गए लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, उसके बाद राज्य के अन्य पीएमएवाई के लाभार्थियों को लाभ दिया जाएगा। 
          शेष फ्लैटों के लिए व्यक्ति, जिनमें उनके पति या पत्नी या आश्रित बच्चे शामिल हैं, जिनके पास हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित किसी कॉलोनी या सैक्टर या हरियाणा में शहरी क्षेत्रों, संघीय क्षेत्र चंडीगढ़ और राष्ट्रीय राजधानी टेरेटरी दिल्ली की किसी लाइसेंस प्राप्त कॉलोनी में कोई फ्लैट या प्लॉट नहीं है, उन्हें आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी। 
उन्होंने कहा कि यह संशोधन इसकी अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होगा और उन सभी परियोजनाओं पर लागू होगा, जिन्हें अभी शुरू किया जाना है। जनसाधारण से आवेदन आमंत्रित करने की तिथि को परियोजना शुरू होने की तिथि माना जाएगा। अदायगी में किसी भी प्रकार की गल्ती के लिए हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण नियम, 2017 के नियम 15 के अनुसार जुर्माना ब्याज अदा करना होगा। 
इसके अतिरिक्त, प्रस्ताव के तहत आने वाली संबंधित विकास योजनाओं में रिहायशी प्लॉटिड कॉलोनियों में लागू फीस और शुल्क जैसे कि लाइसेंस फीस, परिवर्तन शुल्क, बाह्यï विकास शुल्क, आतंरिक विकास शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का भी निर्णय लिया गया। 
*चिट फण्ड कंपनियों द्वारा की जा रही वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को रोकने और चिट्स के छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करने के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने चिट फण्ड अधिनियम, 1982 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतू एक तंत्र विकसित करने के लिए हरियाणा चिट फण्ड नियम, 2018 तैयार करने का निर्णय लिया है। यह नियम ऐसी चिट फण्ड कंपनियों में निवेशकों द्वारा निवेश की गई धनराशि की सुरक्षा के लिए एक तंत्र उपलब्ध करवाएगा। 
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इस आशय का निर्णय आज यहां हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। 
चिट फंड कम्पनियां ऐसे लोगों के लिए बचत करने तथा उधार लेने की सरल सुविधा प्रदान करती हैं जिनके पास बैंकिंग सुविधा की सीमित पहुंच है। चूंकि चिट फण्ड कंपनियां क्षमतावान सदस्यों की तलाश करती हैं इसलिए वे आमजन को चिट में सदस्य के रूप में पंजीकृत करती हैं, धनराशि एकत्रित करती हैं और फण्ड के वितरण के लिए नीलामी का आयोजन करती हैं। 
* - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा दिवंगत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों को अनुकंपा सहायता (संशोधन) नियम, 2017 के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गई।
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने आज मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य सरकारी कर्मचारी, जिनकी मृत्यु पहली जनवरी, 2016 से पहले हुई है, के परिवार को दी जाने वाली अनुकंपा वित्तीय सहायता को संशोधित करना है। यह अनुकंपा वित्तीय सहायता 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के प्रावधानों के अनुसार दी जाएगी। यह हरियाणा सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2016 और हरियाणा सिविल सेवा (सुनिश्चित आजीविका प्रगति) नियमावली, 2016 के तहत निर्धारित फॉर्मूला और प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाएगा। 
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि वर्तमान नीति के अनुसार मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों को मृत कर्मचारी की सेवानिवृत्ति की आयु तक उसके अंतिम आहरित वेतन जो कि वेतन तथा अन्य भत्तों के बराबर की राशि है, के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।  
* एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज हरियाणा सरकार ने देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले सशस्त्र बलों के तीन शहीदों के आश्रितों को अनुकंपा आधार पर रोजगार देने के लिए अपनी नीति में ढील देने का निर्णय लिया है। 
          हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।
          उन्होंने कहा कि सेना के कांस्टेबल मुकेश कुमार, जो गांव और डाकघर झारली, जिला झज्जर के निवासी थे, ने 10 दिसंबर, 2002 को जम्मू-कश्मीर में डुबरी में ऑपे्रशन पराक्रम के दौरान अपने जीवन का बलिदान दिया था। उस समय मुकेश कुमार का भाई मनोज कुमार, 19 साल का था। अब उसने अनुकंपा आधार पर सरकारी नौकरी देने का आग्रह किया है और वह स्नातक है तथा गु्रप सी के पद के लिए योग्य है। हालांकि, सरकारी नीति के अनुसार, केवल आश्रित बेटा या बेटी या पत्नी, जो कमाई नहीं कर रहा है नियुक्ति के लिए पात्र है। इसलिए, इस मामले में, सरकार ने उसे लिपिक, जो कि गु्रप सी का पद है, पर नौकरी देने के लिए नियमों  में ढील देने का निर्णय लिया है।
          इसी तरह, कांस्टेबल राकेश कुमार, सेना के गनर, जो जिला अंबाला के गांव सुभरी का निवासी था, ने भी 26 दिसंबर, 2000 को, जम्मू-कश्मीर में ऑपे्रशन रक्षक में अपने जीवन का बलिदान दिया था। उस समय उसका भाई चमन लाल 15 साल का था। अब उसके भाई, जो मैट्रिक पास है, ने अनुकंपा आधार पर नौकरी देने का आग्रह किया है, इसलिए सरकार ने उसे गु्रप डी के पद पर नौकरी देने के लिए अपनी नीति में ढील दी है।
        उन्होंने कहा कि  ऐसे ही तीसरे मामले में, भारतीय सेना के कांस्टेबल रसबीर सिंह, जो गांव और डाकघर सिंसर जिला जींद का निवासी था, ने 21 सितम्बर, 2003 को जम्मू-कश्मीर में ऑपे्रशन सहायक में अपने जीवन का बलिदान दिया था। उस समय, शहीद रसबीर का भाई होशियार सिंह सात वर्ष का था। अब होशियार सिंह की मैट्रिक पास है। इसलिए मंत्रिमंडल ने नीति में ढील देकर उसे गु्रप डी के पद पर नौकरी देने का निर्णय लिया है। 
यहां यह उल्लेखीय है कि इससे पहले मौजूदा सरकार ने 174 शहीदों के आश्रितों को नौकरी प्रदान की है जिनमें सेना के 146, बीएसएफ के 18 और सीआरपीएफ के 10 शहीद शामिल हैं।
* जनवरी - हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार करने के अपने अभियान को जारी रखते हुए मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित चिकित्सीय प्रतिष्ठानों का अंगीकरण (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 अपनाने के लिए एक अध्यादेश लाने का निर्णय लिया गया।
         हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अध्यादेश लाना इस लिए आवश्यक था क्योंकि इस समय विधान सभा सत्र  नहीं चल रहा कि गुणवत्तापरक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए सुविधाओं और सेवाओं के न्यूनतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए चिकित्सीय प्रतिष्ठानों का विनियमन एवं पंजीकरण किया जा सके। अध्यादेश 50 से अधिक बिस्तर वाले चिकित्सीय प्रतिष्ठïानों को कवर करेगा। 
उन्होंने कहा कि अधिनियम का प्रभावी कार्यान्वयन राज्य के चिकित्सीय प्रतिष्ठानों द्वारा उपचार और मरीजों की देखभाल के लिए नैतिक चिकित्सा आचरणों को अपनाया जाना सुनिश्चित करेगा। धोखाधड़ी या अनैतिक कार्यों में लिप्त चिकित्सीय प्रतिष्ठानों के खिलाफ चिकित्सीय  प्रतिष्ठान (पंजीकरण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 के तहत प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी। इसके अलावा, यह अधिनियम रोगियों का उचित और किफायती दरों पर गुणवत्ता देखभाल और उपचार भी सुनिश्चित करेगा।
          यहां यह उल्लेखनीय है कि भारतीय चिकित्सा संघ सहित विभिन्न हितधारकों ने  आग्रह किया था कि 50 बिस्तरों की क्षमता वाले छोटे चिकित्सीय प्रतिष्ठानों को आरंभ में अधिनियम की प्रयोज्यता से छूट दी जाए क्योंकि वर्तमान में अधिनियम के प्रावधानों का पालन करने के लिए उनकी क्षमता और तैयारी में कमी है। ऐसे प्रतिष्ठानों को आमतौर पर एक ही डॉक्टर द्वारा प्रबंधित किया जाता है और उनके लिए अधिनियम की आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। 
* हरियाणा सरकार ने एक अध्यादेश लाकर हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद स्थापित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में  हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद के गठन के लिए अध्यादेश के मसौदे को स्वीकृति प्रदान की गई है ताकि नीति निर्धारण और परिप्रेक्ष्य आयोजना के लिए शैक्षिक इनपुट प्राप्त करके शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल माहौल बनाया जा सके। 
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि परिषद राज्य में सभी उच्चतर शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता और अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करेगी और राज्य की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुसार उच्चतर शिक्षा के विकास के लिए भी मार्गदर्शन करेगी। 
यह अधिनियम हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद अधिनियम, 2017 कहलाएगा।   परिषद का एक अध्यक्ष होगा जो सिद्ध नेतृत्व गुणों वाला शिक्षाविद् या एक मशहूर बौद्धिक होगा। उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे। परिषद का उपाध्यक्ष ऐसा शिक्षा प्रशासक होगा जो प्रोफेसर या समकक्ष पद पर कार्य कर रहा हो या जिसने ऐसे पद पर कार्य किया हो। राज्य परियोजना निदेशक, उच्चतर शिक्षा विभाग एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का एक-एक प्रतिनिधि,जो उप निदेशक के रैंक से कम के नहीं होंगे, वित्त विभाग का प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव के रैंक से कम का नहीं होगा, परिषद के सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, सामाजिक क्षेत्र और उद्योग तथा व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र से 15 सदस्य भी होंगे।
उन्होंने कहा कि परिषद के 10 सदस्य राज्य से और पांच सदस्य अन्य राज्यों से होंगे। परिषद के अन्य सदस्यों में राज्य के तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति, स्वायत्त या संबद्ध महाविद्यालयों के दो प्रधानाचार्य और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नामित एक सदस्य शामिल होगा। प्रत्येक नामांकित सदस्य का कार्यकाल छ: वर्षों की अवधि के लिए होगा। एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो-दो वर्ष के बाद सेवानिवृत हो जाएंगे और परिषद प्रत्येक दो वर्ष में सात नए सदस्यों को नामांकित करेगी। परिषद की प्रत्येक तीन महीनों में एक बार बैठक होगी। राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट स्थान परिषद का मुख्यालय होगा। 
परिषद का प्रथम अध्यक्ष राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा और वह इस पद पर तब तक जारी रहेगा जब तक कि चयन समिति इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक अध्यक्ष का चयन नहीं करती। परिषद के अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार की तलाश हेतू तीन प्रतिष्ठित शिक्षाविदों या प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों की एक सलाहकार समिति होगी। इन तीन सदस्यों में से दो सदस्यों को परिषद द्वारा और एक सदस्य को राज्य सरकार द्वारा नामित किया जाएगा और वह सलाहकार समिति का अध्यक्ष होगा। अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष की अवधि के लिए होगा। सलाहकार समिति की सिफारिश पर चयन समिति द्वारा अध्यक्ष का चयन किया जाएगा जिसमें राज्य विधानसभा के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री तथा नेता प्रतिपक्ष शामिल होंगे। किसी सदस्य की अयोग्यता के संबंध में विवाद पर मुख्यमंत्री का निर्णय अंतिम होगा।
उन्होंने कहा कि परिषद उच्चतर शिक्षा की नीति तैयार करेगी और राज्य के उच्चतर शिक्षा संस्थानों को नियोजन और कार्यान्वयन में सहायता करेगी और शिक्षा, विनियामक निकायों और राज्य सरकार के शीर्ष संस्थानों के बीच समन्वय करेगी। परिषद प्रत्येक वर्ष सरकार को अपनी गतिविधियों की वार्षिक रिपोर्ट पेश करेगी।
हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा आयोग होगा जिसका नेतृत्व शिक्षा मंत्री करेंगे और परिषद द्वारा आयोग के निर्णयों को क्रियान्वित किया जाएगा।
*हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के मामले में गुणन कारक को अधिसूचित करने का निर्णय लिया गया जिससे कलेक्टर द्वारा इस प्रकार निर्धारित बाजार मूल्य को गुणा किया जाएगा ताकि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनस्र्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम, 2013 के तहत अंतिम मुआवजा निर्धारित किया जा सके। 
         हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी। 
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के मामले में, 10 किलोमीटर तक अधिगृहित की जाने वाली भूमि के विशेष किल्ले के किसी भाग या उसके भाग जैसा भी मामला हो, के लिए कारक 1.25 होगा। इसीप्रकार, 10 किलोमीटर से अधिक और 20 किलोमीटर तक के मामले में कारक 1.50, 20 किलोमीटर से अधिक और 30 किलोमीटर तक की दूरी के लिए कारक 1.75 और 30 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए कारक दो से गुणा किया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों की बाहरी सीमा, जो कि नगर सीमा है, से दूरी सबसे छोटी दूरी होगी। शहरी क्षेत्रों के मामले में, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनस्र्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम, 2013 के अनुसार कारक एक होगा। 
* हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, करनाल अधिनियम, 2016 में संशोधन करके स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, करनाल का नाम बदलकर दीन दयाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, करनाल करने के मसौदा विधेयक को स्वीकृति प्रदान की गई।
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इसके अतिरिक्त, बैठक में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1977 और उसके तहत नियमों में संशोधन करके हरियाणा अर्बन डवेलपमेंट अथोरिटी का नाम बदल कर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई। 
इसके अतिरिक्त, बैठक में हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) और सम्बद्घ सेवाएं परीक्षा आयोजित करने में एकरूपता लाने के दृष्टिïगत नायब तहसीलदार के पद को हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) और सम्बद्घ सेवाएं परीक्षा में शामिल करने का निर्णय लिया गया।
*हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा मोटरयान कराधान अधिनियम, 2016 में संशोधन करने के लिए हरियाणा मोटरयान कराधान (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गई।  
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि अधिनियम में संशोधन से लोगों को सुविधा हेागी क्योंकि इससे 19 सितंबर, 2016 और 31 मार्च, 2017 के बीच एकत्रित कर वैध होगा, ब्याज दंड की दर 1.5 प्रतिशत से एक प्रतिशत होगी और कर अदायगी की देनदारी से छूट भविष्यलक्षी या भूतलक्षी प्रभाव से मिलेगी। इससे वाहन मालिक द्वारा अदा किये गये अतिरिक्त कर या जुर्माने की राशि को पहले या बाद में वापिस करना संभव होगा। इसके अतिरिक्त, इस संशोधन से आबकारी एवं कराधान विभाग द्वारा हरियाणा मोटरयान कराधान अधिनियम, 2016 के नियम बनने से पूर्व विभाग में लंबित आकलन मामलों का निपटान करने में भी मदद मिलेगी।  
* हरियाणा सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं व सेवा से जुड़े मामलों के त्वरित निदान तथा उच्च न्यायालय में लंबित मामलों को कम करने के मद्देनजर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (एसएटी) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करने के लिए हरियाणा राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (प्रक्रिया) नियम, 2017 को स्वीकृति प्रदान की है। 
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने मंत्रिमंडल की बैठक के उपरांत मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि यह निर्णय आज यहां हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठमें लिया गया। 
न्यायालय मामलों, विशेषकर सेवा मामलों तथा कर्मचारियों के विवादों से संबंधित मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर एसएटी की स्थापना बहुत लाभकारी और आवश्यक सिद्घ होगी।