HISAR,04.12.21-एक्ट्रेस कंगना रानौत को किसान आंदोलन पर सोशल मीडिया में प्रतिकूल टिप्पणियां करने पर किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा । कंगना मनाली में अपने परिवार के साथ मिल कर व बहन का जन्मदिन मना कर सड़क मार्ग से चंडीगढ़ जा रही थीं कि किसानों ने चंडीगढ़ ऊना हाइवे पर कीरतपुर साहब के निकट कंगना की गाड़ी के आगे लेकर रोक रोक लिया और लगभग दो घंटे तक आगे नहीं जाने दिया जब तक कि कंगना ने माफी नहीं मांगी । हालांकि उसने बड़ी मासूमियत से कहा कि मैंने तो शाहीन बाग की आंदोलनकारी महिलाओं के बारे में टिप्पणी की थी न कि किसान आंदोलन में शामिल महिलाओं को लेकर कोई बात कही थी । इसके बावजूद कंगना सोशल मीडिया पर यह कहने से नहीं चूकीं कि उस पर हमला किया गया और गालियां भी दी गयीं जबकि किसानों का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं किया गया कंगना के साथ ।

कंगना के प्रसंग से यह बात साफ है कि सेलिब्रिटीज को बड़ा संभल कर , सोच विचार कर ही किसी आंदोलन पर टिप्पणी करनी चाहिए न कि जो मन में आये वह लिख कर विवाद में फंसना चाहिए । कंगना को ऐसी लत लग गयी है कि वह किसी न किसी विवाद में फंस ही जाती है । अभी पद्मश्री मिलते भी स्वतंत्रता आंदोलन पर कहा कि भारत को असली आज़ादी सन् 2014 के बाद मिली और इस टिप्पणी पर जो छीछालेदारी हुई कि पूछो मत लेकिन कंगना यही कहती रही कि सन् 1947 वाली आज़ादी तो भीख में मिली थी महात्मा गांधी को न कि किसी संघर्ष का नतीजा थी अंदर पूछती फिर रही थी कि कोई बताये कि सन् 1947 में कौन सा संग्राम हुआ था ? यह अंदाज है कंगना रानौत का । और मुझे कोई गलत साबित कर दे तो पद्मश्री लौटा दूंगी ।

इससे भी पहले रितिक रोशन और अध्ययन सुमन जैसे अभिनेताओं के साथ अपने संबंधों को लेकर कंगना खूब विवाद में उलझी रहीं और रितिक रोशन के साथ तो कोर्ट कचहरी भी हुई पर कंगना हैं कि मानती नहीं और नये से नये विवादों में घिरना जैसे उसका शगल है। अंजाम जाने बिना सोचे विचारे टिप्पणी कर देना यह उसके स्वभाव में शामिल है । लोग इन टिप्पणियों को कंगना की इमेज के साथ जोड़ कर देखते हैं , जो लगातार इसकी साख व छवि को धूमिल करने वाली है । महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री उद्धव ठाकरे पर भी अपने ऑफिस के गिराये जाने पर खूब विवाद में रहीं यह एक्ट्रेस ।
कंगना ज़रा शांत होकर अपने व्यवहार पर सोचो और कुछ बदलाव लाने की जरूरत समझो तो बदलाव करो अपने आप में । नहीं तो कंगना और विवाद पर्यायवाची यानी एक ही मान लिये जायेंगे । अपनी फिल्मों और अभिनय पर गंभीरता से काम करो । राजनीति के लिए बहुत उम्र पड़ी है ।
-पूर्व उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।
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