बिलासपुर 14 जनवरी:- मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर डाॅ0 प्रकाश दरोच ने बताया कि जिला में अभी तक बर्ड फ्लू का कोई भी मामला नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मनुष्यों में इसके फैलने की सम्भावना कम रहती है, लेकिन फिर भी ऐहतियात बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस वायरस को भ्5छ1ंअपवद पदसिनमद्रं भी कहा जाता है। यह वायरस सर्दियों में ज्यादा होता है तथा यह वायरस प्रवासी पक्षियों से देशी पक्षियों में, जानवरों तथा उनसे मनुष्यों में भी फैल सकता है। उन्होंने बताया कि अभी तक संसार में 862 लोग इससे संक्रमित हुए है जिनमें से 455 यानि 60 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है जो कि कोरोना से कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अभी तक पांच राज्यों केरल, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश के कांगडा में बर्ड फ्लू के मामलें पाए गए हैं व बिलासपुर जिला में भी मृत कौए पाए गए हैं जिनके सैंपल टैस्ट के लिए पशुपालन विभाग ने भेज दिए है। अभी रिपार्ट आना वाकी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से इससे निपटने को तैयार है सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को भी अपने-अपने क्षेत्र में इस बारे ऐहतियात बरतने के निर्देश दे दिए है।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से इससे निपटने को तैयार है सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में इस बारे ऐहतियात बरतने के निर्देश दे दिए गए है।
उन्होंने बताया कि बर्ड फलू के लक्षणों की जानकारी सभी को होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बर्ड फ्लू के लक्षण 2 से 8 दिनों तक आने लग जाते हैं जैसे गले में खराश, छिंकें आना, नाक बहना, बुखार, मांस पेशियों में दर्द, शरीर में ठंड लगना, पसीना आना, थकान होना तथा शरीर में कमजोरी आना इसके लक्षण है। गम्भीर स्थिति में इसके कारण निमोनिया, ब्रोंकाइटिस इत्यादि संक्रमण हो सकते हैं जो कि मनुष्य के लिए जान लेवा सिद्ध हो सकतें है।

उन्होंने बताया कि बर्ड फलू से बचाव के लिए संक्रमित मुर्गियों, पक्षियों व जानवरों के सम्पर्क में आने से बचें, मीट, मछली, अंडे अच्छी तरह पकाकर खाएं, साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें, नियमित रुप से हाथ धोएं, पोल्ट्री फार्म में कार्य करते समय पी.पी.किट पहनकर कार्य करें। उन्होंने बताया कि ऐसे लक्षण आने पर पर्याप्त मात्रा में तरल पदाथों का अधिक सेवन करें व आराम करें तथा दूसरों से नजदीकी सम्पर्क न करें दूरी बनाए रखे।

उन्होंने बताया कि लक्षण पाए जाएं तो निकट के स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर चिकित्सा अधिकारी से परामर्श/सम्पर्क करें।