गेहूं के एमएसपी में सिर्फ 25 रुपये की बढ़ोतरी किसान के जख्मों पर नमक छिडक़ने के समान: चौधरी अभय सिंह चौटाला
किसान खेतों में विपरीत परिस्थितियों में भी काम करके देश का पेट भरता है, जबकि उसकी उपज का मूल्य तय करने वाले सरकारी अफसर और मंत्री जमीन की वास्तविक परिस्थितियों से दूर एसी कमरों में बैठकर खेती की नीतियां बना रहे हैं
चंडीगढ़, 3 अक्टूबर। इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में मात्र 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार किसानों के साथ मजाक करना बंद करे। गेहूं का एमएसपी 2,585 रुपये से बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। यानी किसान को एक क्विंटल गेहूं पर महज 25 रुपये की अतिरिक्त कीमत मिलेगी। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के अनुसार किसानों की लागत तो 5.4 प्रतिशत की दर से बढ़ी लेकिन गेहूं की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य .97 प्रतिशत की दर से बढ़ाया गया। जब किसान की लागत में बढ़ोतरी फसल के मूल्य में बढ़ोतरी से पांच गुना से भी ज्यादा हो तो किसानों की आमदनी कैसे बढ़ेगी? किसान के डीजल, खाद, बीज, बिजली, मजदूरी और सिंचाई सहित खेती के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन जब किसान की फसल का दाम तय करने की बारी आती है तो भाजपा सरकार की संवेदनशीलता गायब हो जाती है। सरकार को यह बताना चाहिए कि जिस किसान की लागत और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, उसके गेहूं के एमएसपी में सिर्फ 25 रुपये की बढ़ोतरी किस आधार पर की गई?। किसान खेतों में विपरीत परिस्थितियों में भी काम करके देश का पेट भरता है, जबकि उसकी उपज का मूल्य तय करने वाले सरकारी अफसर और मंत्री जमीन की वास्तविक परिस्थितियों से दूर एसी कमरों में बैठकर खेती की नीतियां बना रहे हैं। किसान को आंकड़ों और सरकारी विज्ञापनों की नहीं, बल्कि उसकी मेहनत की फसल का उचित और सुनिश्चित दाम चाहिए। भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि किसान को भाषणों से नहीं, उसकी फसल के लाभकारी मूल्य से राहत मिलेगी।