CHANDIGARH, 17.09.26-प्रो. विवेक लाल, निदेशक स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, चण्डीगढ़ की अध्यक्षता में आज 17 सितम्बर, 2026 को हिंदी दिवस का आयोजन किया गया। उन्होंने इस अवसर पर संस्थान के डॉ. तुलसीदास पुस्तकालय में हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के साथ संस्थान के कार्मिकों के नाम हिंदी दिवस पर संदेश जारी किया।
प्रो. विवेक लाल ने हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर संस्थान के कार्मिकों के नाम संदेश जारी करते हुए कहा कि भाषा किसी भी राष्ट्र की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत की संवाहक होती है। भारत की विविध भाषाएँ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं और हिंदी इन विविधताओं को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है, जो देश के लोगों को एक सूत्र में पिरोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह भारतीय संस्कृति की संवाहक तथा भारतीय अस्मिता की अभिव्यक्ति है। हिंदी दिवस हमें राजभाषा के प्रति अपने नैतिक एवं संवैधानिक दायित्वों का स्मरण कराते हुए हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि हमारा संस्थान हिंदी को सरल एवं सहज माध्यम के रूप में जन-जन तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। चिकित्सा संस्थान में इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि हमारा सीधा संपर्क मरीजों और उनके तीमारदारों से होता है। उनकी सहज भाषा में रोग एवं उपचार की जानकारी देने से उनका भय और तनाव कम होता है तथा जनता और प्रशासन के बीच संवाद अधिक प्रभावी बनता है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक तकनीक, आयुर्विज्ञान, अनुसंधान एवं नवोन्मेष के अनुरूप हिंदी का सरल, सुगम एवं गुणवत्तापूर्ण प्रयोग प्रत्येक क्षेत्र में बढ़े। हिंदी में कार्य की संख्या के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता एवं प्रभावशीलता सुनिश्चित करना हमारा ध्येय है। अपने इस ध्येय को सामूहिक प्रयासों से साकार करने के लिए हम जन-जागरूकता अभियान के अंतर्गत मरीजों एवं तीमारदारों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने के लिए हिंदी एवं मिश्रित भाषा में व्याख्यान आयोजित करते हैं। आकाशवाणी, विभिन्न FM रेडियो स्टेशनों तथा दूरदर्शन चंडीगढ़ के ‘स्वस्थ जीवन’ कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सक आमजन को विभिन्न रोगों, उनकी रोकथाम एवं उपचार संबंधी जानकारी प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, रोगों से संबंधित पुस्तिकाएँ, पैम्फलेट, प्रश्नावलियाँ, सहमति-पत्र एवं डाइट चार्ट आदि हिंदी में उपलब्ध कराए जाते हैं तथा ओपीडी में हिंदी एवं मिश्रित भाषा में तैयार स्वास्थ्य संबंधी वीडियो भी प्रसारित किए जाते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संस्थान में राजभाषा हिंदी का प्रचार-प्रसार प्रेरणा, प्रोत्साहन एवं सद्भावना के माध्यम से निरंतर किया जा रहा है। मैं सभी वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह करता हूँ कि वे कार्यालयीन कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें, जिससे अन्य कार्मिक भी प्रेरित हों और राजभाषा नीति के कार्यान्वयन को गति मिले। उन्होंने यह भी कहा कि आइए, इस अवसर पर हम सभी संकल्प लें कि सभी भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान एवं सौहार्द की भावना रखते हुए राजभाषा हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करेंगे और संस्थान को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अपना योगदान देंगे। मुझे आशा है कि सभी विभागाध्यक्ष एवं अनुभागाधिकारी राजभाषा नियमों एवं अधिनियमों के प्रभावी कार्यान्वयन, निर्धारित जाँच-बिंदुओं के अनुपालन तथा अपेक्षित जानकारी समय पर उपलब्ध कराने में अपना सहयोग प्रदान करेंगे। राजभाषा कार्यान्वयन से संबंधित कठिनाइयों का समाधान हम आपसी सहयोग एवं सकारात्मक दृष्टिकोण से करेंगे।
श्री पंकज राय, उप-निदेशक (प्रशासन) ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में उपस्थित सदस्यों को हिंदी दिवस की बधाई दी एवं संस्थान में कार्यरत सभी कार्मिकों तथा अध्ययनरत विद्यार्थियों को राजभाषा हिंदी के विकास और समृद्धि को राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझते हुए अपील की कि हम सभी सरकार की राजभाषा नीति का कार्यान्वयन कारगर बनाने में अपना सहयोग एवं योगदान दें। उन्होंने बताया कि संस्थान में हिंदी पखवाड़े के दौरान हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं और हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने इन प्रोत्साहन योजनाओं और प्रतियोगिताओं में संस्थान के विभागाध्यक्षों/संकाय सदस्यों को स्वयं भाग लेने और उनके मातहत कार्य करने वाले सभी कार्मिकों को भाग लेने के लिए अनुरोध किया।
प्रो. संजय भदादा, नोडल अधिकारी (राजभाषा) ने उपस्थित अधिकारियों एवं कार्मिकों को राजभाषा प्रतिज्ञा अर्थात् भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 और 351 तथा राजभाषा संकल्प 1968 के आलोक में हम, संस्थान के कार्मिक यह प्रतिज्ञा करते हैं कि अपने उदाहरणमय नेतृत्व और निरंतर निगरानी से; अपनी प्रतिबद्धता और प्रयासों से; प्रशिक्षण और प्राइज़ से अपने साथियों में राजभाषा प्रेम की ज्योति जलाये रखेंगे, उन्हें प्रेरित और प्रोत्साहित करेंगे; अपने अधीनस्थ के हितों का ध्यान रखते हुए; अपने प्रबंधन को और अधिक कुशल और प्रभावशाली बनाते हुए राजभाषा हिंदी का प्रयोग, प्रचार और प्रसार बढ़ाएंगे। हम राजभाषा के संवर्द्धन के प्रति सदैव ऊर्जावान और निरंतर प्रयासरत रहेंगे, दिलवाई।