चंडीगढ़, 5 सितंबर 2026: संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा संचालित निरंकारी इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड आर्ट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों के साथ संत निरंकारी सत्संग भवन, सेक्टर-30 ए, चंडीगढ़ में विशेष बैठक आयोजित की गई।
चंडीगढ़ ब्रांच के संयोजक श्री नवनीत पाठक जी ने बताया कि यह संस्थान चण्डीगढ़ की प्राचीन कला केंद्र से सम्बन्धित है, यहां से किए गये तीन साल के कोर्स की मान्यता स्नातक डिग्री के समान है। इस संस्थान में कोई भी सज्जन संगीत सीखने या संगीत की डिग्री प्राप्त करने के भाव से संगीत सीख सकता है। संस्थान का उद्देश्य संगीत एवं कला में रुचि रखने वाले शिक्षार्थियों की प्रतिभा को निखारकर उन्हें उचित दिशा एवं मंच प्रदान करना है। संस्थान में संगीत के साथ वोकल, हारमोनियम, तबला, गिटार सहित विभिन्न कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है। हमारे पास अनुभवी संगीत के प्रशिक्षित अध्यापक हैं।
बैठक में शिक्षार्थियों के प्रशिक्षण, नियमित अभ्यास, अनुशासन एवं प्रगति पर विचार-विमर्श किया गया। शिक्षार्थियों को निरंतर अभ्यास, लगन एवं समर्पण के साथ अपने हुनर को निखारने के लिए प्रेरित किया गया।
श्री पाठक जी ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देना आवश्यक है। संगीत एवं कला बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, एकाग्रता तथा सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर शिक्षार्थियों ने अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए, जबकि अभिभावकों ने संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के आदेशानुसार संचालित संस्थान का उद्देश्य शिक्षार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देकर उनकी रचनात्मक प्रतिभा को सकारात्मक दिशा प्रदान करना तथा उनमें अनुशासन, समर्पण एवं सेवा भावना जैसे मानवीय गुणों का विकास करना है।
अंत में संचालक श्री संजय वर्मा जी ने सभी शिक्षार्थियों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं की ।