ऊना, 11 फरवरी. शिक्षा, संवेदना और समाज सेवा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाली स्वर्गीय प्रो. (डॉ.) सिम्मी अग्निहोत्री की स्मृति समाज को आज भी दिशा और संबल प्रदान कर रही है। उनका निधन 9 फरवरी 2024 को हुआ था। उनकी सोच, मूल्य और सेवा-भाव समय के साथ और अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। इसी भाव के साथ उनकी दूसरी पुण्य स्मृति के अवसर पर गोंदपुर जयचंद स्थित उपमुख्यमंत्री आवास परिसर में श्रद्धांजलि एवं स्मरण कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें नमन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री आवास परिसर में स्थापित स्वर्गीय प्रो. (डॉ.) सिम्मी अग्निहोत्री की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उनकी पुत्री डॉ. आस्था अग्निहोत्री, दामाद सचिन शर्मा, अन्य परिजन, स्थानीय नागरिक तथा समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित रहे और श्रद्धासुमन अर्पित कर दिवंगत आत्मा को नमन किया।
कार्यक्रम में भजन एवं कीर्तन के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बना रहा। समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े गणमान्य नागरिकों और आमजन की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि प्रो. (डॉ.) सिम्मी अग्निहोत्री केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा स्मृति और प्रेरणा बन चुकी हैं।
सभा का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री ने अपनी मां को स्मरण करते हुए संबोधन दिया। आंसुओं को थामते हुए उन्होंने कहा कि उनकी मां ने अपना संपूर्ण जीवन परिवार और समाज को समर्पित कर दिया।
डॉ. आस्था ने कहा कि मां ने कभी अपने लिए कुछ नहीं चाहा। उन्हें जीवन में बड़े पदों और अवसरों के प्रस्ताव मिले, लेकिन उन्होंने मेरे पिता की ताकत बनकर उनके साथ खड़े रहना चुना। आज विवाह के बाद भी हर कदम पर उनकी कमी महसूस होती है, लेकिन ऐसा लगता है कि वे आज भी हमारे आसपास हैं और हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि मां के जाने के बाद पिता ने माता और पिता, दोनों की भूमिका निभाई है। डॉ. आस्था ने यह भी कहा कि उनकी मां सदैव हरोली के विकास तथा सामाजिक और धार्मिक कार्यों को लेकर चिंतित रहती थीं, और आज उनके आशीर्वाद से ही पूरा प्रदेश उनके परिवार के साथ खड़ा दिखाई देता है। इस दौरान उनके पति सचिन शर्मा उनके साथ मजबूती से खड़े नजर आए।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रो. (डॉ.) सिम्मी अग्निहोत्री एक उत्कृष्ट शिक्षाविद् होने के साथ-साथ संवेदनशील समाजसेवी भी थीं। शिक्षा, नशा-निवारण, सड़क सुरक्षा और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।