कोराना संक्रमण ओर सरकारों कि नाकामी
CHANDIGARH,25.03.20-इस विषय की शुरुआत ताइवान के उदाहरण से करते है। करीब ढाई करोड़ की आबादी वाला यह देश कोराना वायरस के केंद्र चीन से मात्र 130 किलोमीटर के फासले पर है। जैसे ही चीन मै कोराना वायरस के संक्रमण का पता चला इस देश की सरकार ने त्वरित फेसला किया ओर देश में लोगो के विदेश जाने ओर विदेश से आने पर रोक लगा दी। इसके साथ ही देश की सेना को समूचे सार्वजनिक स्थानों को सेनेटाइज करने के काम में लगा दिया। सैनिकों के हाथो में हथियारों के स्थान पर सेनेटाइजर का छिड़काव करने वाले यंत्र दिखाई देने लगे। आज नतीजा यह है कि चीन के करीबी होते हुए भी ताइवान में संक्रमण ना के बराबर है।
दूसरी ओर भारत मै आज हड़बड़ी ओर घबराहट है। देशभर में जनता कर्फ्यू के बाद प्रदेशों मै पूरी तरह लाकडाउन ओर कर्फ्यू का सहारा लेना पड़ रहा है। तब भी मालूम नहीं कि कितनी सफलता इस घातक संक्रमण को रोकने में मिलेगी। मानव जीवन की हानि के साथ साथ कितनी आर्थिक हानि देश को झेलनी पड़ेगी। सरकार दिहाड़ी मै काम करने वाले लोगों को कुछ राहत बांटने का ऐलान तो कर चुकी है पर यह राहत किसी दिन लेने वालो को ही दूसरे रास्ते से चुकानी होगी। सरकारी खजाना उन लोगो का नहीं है जो कि ऐसी राहत का ऐलान करते हुए दंभ दिखाते है।वास्तव में सरकारी खजाना जनता द्वारा जनता के लिए है। ये जो राहत की घोषणा करते है उन्हें प्रबन्ध सौंपा गया है कि वे सूझ बूझ से काम करे। लेकिन कोराना संक्रमण को भारत आने से रोकने में इन जिम्मेदार लोगो की सूझ बूझ कही नहीं दिखाई देती है। देश में संक्रमण के घुस आने के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रोका गया। बाद में देशी उड़ानों को रोका गया। बेशक देश लौटने वाले भारतीयों को न रोका जाता पर ऐसे यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही क्वारांटाइन करने की कोई ठोस ओर तोड़ी न जा सकने वाली व्यवस्था की जाती। आज देश के तमाम प्रदेशों मै ऐसे लोग लापता हो गए जिनके विदेश से आने का पता है लेकिन देश में उनकी आगे के स्वास्थ्य की कोई जानकारी नहीं। यह सब कैसे हुआ है। क्या इसमें सरकार की ढिलाई जिम्मेदार नहीं है। वो सरकार किसे हर तरह का कानून बनाने ओर लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। ऐसे में इस ढिलाई के लिए सरकार के अलावा कोन जिम्मेदार होगा। गायिका कनीना कपूर का उदाहरण तो सभी को पता है। तमाम नेता ओर मंत्री उसके विदेश से लौटने के बाद उसके साथ कार्यक्रमों में पहुंचे थे। बाद में स्वयं को क्वारेंटाइन करने का ऐलान करते सुने गए। कनीना कपूर को ही विदेश से लौटने पर क्वॉर्रेंटाइन क्यों नहीं किया गया।लापरवाही का यह एक उदाहरण है।इसी तरह की लापरवाही के कारण आज देश में कोराना संक्रमित लोगो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।एक दिन पहले तक देश में कुल संक्रमित लोगो की संख्या 468 तक पहुंच गई थी।देशभर में भागदौड़ चल रही है। बन्द ओर कर्फ्यू के कारण शहर में रोजगार एन मिलने से लोग गावो की ओर भागने लगे थे। अब 31मार्च तक सभी रेले भी बन्द कर दी गई। लोगो को गांव लौटने ओर रेलो व बसो में भीड़ पैदा करने से रोका गया है। ऐसी हालत में उसका क्या होगा जो रोजाना मजदूरी करके खाना खाता है। सरकार उनके खातों में 4500 रुपए प्रतिमाह देगी पर कब खाना तो उन्हें आने वाली सुबह ओर शाम को चाहिए। सरकार का तंत्र बैंक खातों में पैसा कब पहुंचाएगी। क्या तब जबकि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कोराना से हार जाएगी
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भारत के कर्ता धर्ताओ को एक ओर नसीहत:राजेन्द्र सिंह जादौन
ताइवान के बाद दक्षिण कोरिया के मॉडल से जांच ले कि कोराना से निपटने में भारत कितने पीछे रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ट्रादो अधानोम ने कोराना संक्रमण से निपटने की दक्षिण कोरिया की रणनीति को सराहा है ओर विश्व अन्य देशों को इसका अनुसरण करने को भी कहा है। दक्षिण कोरिया में एक बारगी तो हालत यह हो गई थी कि रोजाना 900 मरीज आ रहे थे। लेकिन नियंत्रण के उसके तरीके से हालत काबू में आईं ओर फिलहाल 60 से70 मरीज रोजाना आ रहे है। हालत काबू मै रखने के लिए यह देश समय रहते तैयारी मै जुट गया था। देश जब मरीजों को संख्या दो अंकों में नहीं पहुंची थी तभी सरकारी अधिकारियों ने जांच किट बनाने वाली कम्पनियों से बात की ओर उन्हें अधिक से अधिक किट बनाने को कहा गया।नतीजा यह रहा कि देश में आज एक लाख जांच किट रोजाना बनाए जा रहे है ओर दूसरे देशों को निर्यात करने की तैयारी की जा रही है। इधर भारत मै जब मरीजों की संख्या ,500 के पार हो गई तब किट लेने के लिए टेंडर आमंत्रित किए जा रहे है।इसी बीच कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का आरोप है कि संक्रमण आने के बाद भी देश से मास्क ओर जरूरी वस्तुएं निर्यात किए जाते रहे।आखिर क्यों नींद नहीं खुली कि देश को इन सब चीजों की जरूरत है।
दक्षिण कोरिया के उप स्वास्थ्य मंत्री किम नन लिप की दलील है कि एक बार जब संक्रमण आ जाता है तो बन्द ओर अलग थलग जैसे उपाय ज्यादा फलदाई नहीं होते। दक्षिण कोरिया के ज्यादा से ज्यादा किट बनवाने का फायदा यह हुआ कि उसने अमरीका की तुलना में 40 गुना अधिक लोगो की जांच की है। यह आंकड़ा भी तब आया है जबकि दक्षिण कोरिया स्वास्थय सेवाओं के ढांचे में अमरीका फ्रांस ओर स्पेन जैसे देशों से पीछे है। कोराना से लडने की उसकी रणनीति की विश्व स्वास्थ्य संगठन तारीफ कर रहा है ओर अन्य देशों को उसे अपनाने की सलाह दे रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इसलिए दक्षिण कोरिया से सलाह ले रहे है। स्वीडन ने भी सलाह ली है।
दक्षिण कोरिया में संक्रमण की जांच के लिए कार मै बैठे हुए ही सैंपल दिया जा सकता है। इसके बाद मात्र एक घंटे में जांच रिपोर्ट आ जाती है। यही कारण है कि अन्य बड़ी व्यवस्था वाले देशों से कहीं अधिक सैंपल जांच दक्षिण कोरिया में कि गई है। उसने जांच के मामले में अमरीका को भी पीछे छोड़ दिया।
दक्षिण कोरिया संक्रमित पाए जाने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने वालों का पता कार ओर मोबाइल के जीपीएस से लगाते हुए उन सभी लोगों की जांच भी करवाता है।संक्रमित व्यक्ति को अपने मोबाइल मै एप डॉउन लोड करना होता है। इसके जरिए स्वास्थ्य विभाग को उसकी स्थिति के बारे में पता चलता रहता है।संक्रमण की निगरानी के लिए दक्षिण कोरिया ने टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया है।आज भारत में संक्रमण की निगरानी पर गोर किया जाए तो पता चलता है कि पिछले पचास दिन में पंजाब एक लाख से अधिक नॉन रेजिडेंट इंडियन आए ओर इनमे से 16 हजार का कोई पता नहीं। उनके पते ही बदल गए।जाहिर है कि संक्रमण विदेश से लौटने वाले लोग लाए। देश में उन्हें क्वेयरंटाइन नहीं किया गया। गायिका कनिका कपूर का उदाहरण भी मौजूद है।
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अमरीका की तरह भारत के नागरिकों को भी मदद की जरूरत:राजेन्द्र सिंह जादौन
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बड़े जोर शोर से देश के नागरिकों से यह वायदा किया था कि विदेश ले जाया गया काला धन वापस लाया जाएगा ओर इसका हिस्सा हर नागरिक को मिलेगा। लेकिन यह वायदा एक जुमला ही साबित हुआ। बाद में भाजपा के है कुछ नेताओ ने यह स्वीकार कर लिया कि हर नागरिक के खाते में 15लाख रुपए डलवाने का वायदा एक जुमला ही था। लेकिन केंद्र के शासन में दूसरी बार आरूढ़ हुई भाजपा अपने पर लगे हमले फेंकने के दाग़ को धो सकती है।कोराना प्रकोप के इस दौर में केंद्र की दूसरी मोदी सरकार अपने पहले चुनाव के वायदे को पूरा कर जुमलाबाज होने के आरोप से मुक्त हो सकती है। इसके लिए मोदी आपने दोस्त अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तर्ज पर देश के आम नागरिक के साथ उद्योग धन्धो को पैकेज से सकते है।
डोनाल्ड ट्रंप ने कोराना वायरस के कारण कमजोर होती अर्थव्यवस्था को ताकत देने के लिए हाल मै दो खरब डॉलर का पैकेज दिया है। रिपबलिकन राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पैकेज पर अपने विरोधी डेमोक्रेट्स को भी सहमत कर लिया है। मतलब है कि यह पैकेज राष्ट्रीय सहमति से दिया जा रहा है। इस पैकेज का बड़ा हिस्सा उद्योग धंधों को कोराना बन्द के कारण कमजोर हुए उद्योगों की मदद में जाएगा। इस मदद से वे बन्द के दौरान अपने कर्मचारियों को वेतन दे सकेंगे ओर बन्द के कारण पैदा होने वाले घाटे को पूरा करेंगे। लेकिन इस पैकेज में असली राष्ट्रप्रेम छिपा है ओर वह यह की कोराना के कारण आर्थिक रूप से परेशान हर अमरीकी नागरिक के खाते में 1200डॉलर इसी पैकेज से जाएंगे। अमरीकी नागरिकों को यह बड़ी राहत की बात होगी।
अमरीका जैसे सम्पन्न देश में जहा आम आदमी की क्रय शक्ति भारत के मुकाबले बहुत बड़ी है ओर इसके चलते उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत है लेकिन सरकार ने चिंता की है ओर हर नागरिक के खाते में 1200डॉलर पहुंचाए जा रहे है। भारत के आम आदमी की हालत हम सभी जानते है। कुपोषण के कारण उसकी रोगों से लडने की क्षमता की बात करना ही बेमानी है। ऐसे भारतीयों को इस दौर में तुरन्त सरकारी मदद की जरूरत है। कोराना से बचाव के लिए क्या मोदी सरकार शुरुआती एहतियात न कर पाने की अपनी चूक की सजा मेहनतकश भारतीय को लॉक डॉउन के जरिए रोजगार छीन कर देगी। इस मेहनतकश के पास वायरल रोगों से लडने के लिए न तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले भोजन ग्रहण करने की ताकत है ओर न ही रोगों के आ जाने पर कम से कम सौ रूपए की कीमत वाला सेनेटाइजर या महंगे मास्क खरीदने की क्षमता है। शोचनीय विषय है कि जब अमरीका जैसे देश में आम नागरिक को सरकार मदद दे रही है तो भारत में तो यह बहुत ही जरूरी है।