चण्डीगढ़,24.03.26- : भगवान राम का पृथ्वी पर आगमन सत्य की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से हुआ था। वे वास्तव में धर्म के साक्षात स्वरूप थे। ये कहना है कथा वाचक आचार्य श्री शिवदत्त बहुगुणा का, जो श्री राम मंदिर-47 में नवरात्रों व श्री राम नवमी के अवसर पर श्री रामचरित मानस कथा का वाचन कर रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि उनका जीवन और यात्रा पूर्णतः सनातन धर्म – शाश्वत सत्य – के अनुरूप और उसके पालन में ही संपन्न हुई। परिस्थितियों द्वारा उत्पन्न कठोर परीक्षाओं के बावजूद, उन्होंने बार-बार समस्त मानवजाति के लिए आदर्श जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। भगवान राम आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श मित्र, आदर्श योद्धा, आदर्श राजा और आदर्श पुरुष थे। इसलिए, वे अनुकरणीय आदर्श हैं। हमें श्री राम के गुणों को पूर्णतः अपनाना चाहिए और उनके अनुसार जीवन व्यतीत करके अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को पवित्र बनाना चाहिए।
मंदिर कमेटी के पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष आरके सूद, महासचिव आरडी नारंग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष केके छाबड़ा व अन्य पदाधिकारी अशोक शर्मा, वीके ठाकुर, वीके गुप्ता, प्रदीप शर्मा, आरपी शर्मा, सुरेश कुमार व हुकुम सिंह आदि भी मौजूद रहे।