चंबा, 9 अक्तूबर-हिमाचल प्रदेश परिवहन निदेशक नीरज कुमार ने आज बचत भवन चंबा में सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास तथा जिला प्रशासन चंबा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘शून्य दुर्घटना दिवस की ओर’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी उपाय किए जाएंगे।
परिवहन निदेशक नीरज कुमार ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक विश्लेषण और दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों का प्रभावी उपयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों और आमजन का सामूहिक दायित्व है। पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय से दुर्घटनाओं में कमी लाने के प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यह आंकड़ों पर आधारित एवं सामुदायिक सहभागिता से संचालित पहल आगामी दो माह के दौरान पूरे चंबा जिले में लागू की जाएगी। इसके अंतर्गत स्थानीय दुर्घटना आंकड़ों और जमीनी परिस्थितियों का विश्लेषण कर दुर्घटना संभावित सड़क खंडों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक उपायों को प्राथमिकता देते हुए कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने कहा कि जिला प्रशासन सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए संबंधित विभागों के सहयोग से आंकड़ों पर आधारित कार्ययोजना तैयार करेगा। दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विश्लेषण और लक्षित उपायों के माध्यम से सड़क हादसों में कमी लाने तथा लोगों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए यातायात नियमों का पालन, आमजन में जागरूकता और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने सुरक्षित एवं जिम्मेदार यातायात व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के मुख्य परिचालन अधिकारी अतुल सिंह, प्रधान परियोजना अधिकारी पंकज मेहरा तथा वरिष्ठ परियोजना अभियंता अभिषेक ठाकुर ने प्रस्तुति के माध्यम से कार्यक्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं से संबंधित आंकड़ों और जमीनी साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर दुर्घटना संभावित सड़क खंडों की पहचान की जाएगी। इसके पश्चात कम लागत वाले इंजीनियरिंग सुधारों, तकनीकी उपायों और अन्य आवश्यक हस्तक्षेपों के माध्यम से सड़क सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि चंबा जैसे पहाड़ी जिले में तीखे मोड़, सीमित दृश्यता, बदलती मौसमी परिस्थितियां और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने में लगने वाला समय सड़क सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना संभावित स्थलों में सुधार, सड़क सुरक्षा जागरूकता तथा सुरक्षित यातायात व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए विशेष उपाय किए जाएंगे।
इस पहल के अंतर्गत जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा स्थानीय निकायों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य वैज्ञानिक विश्लेषण और विभागीय सहभागिता के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं तथा उनसे होने वाली जनहानि में कमी लाना और जिले में सुरक्षित यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
इस अवसर पर एसडीएम चिराग शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जालम सिंह भारद्वाज, जिला विकास अधिकारी तिबेंद्र चिनोरिया, उच्च शिक्षा उपनिदेशक विकास महाजन, उपमंडलीय प्रबंधक शुगल सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास कमल किशोर शर्मा, जिला भाषा अधिकारी तुकेश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।