चंडीगढ़, 20 सितंबर। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश की खराब मेडिकल व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में डॉक्टरों के दो तिहाई से ज्यादा पद रिक्त होने के चलते मेडिकल शिक्षा और सुविधाएं ठप है। डॉक्टरों के लिए मेडिकल कॉलेज में पढ़ाने और ओपीडी चलाने के लिए 3500 से ज्यादा सीटें है, लेकिन इनमें से 2500 से ज्यादा पद खाली ही पड़े है। सरकार द्वारा पीजीआई, मेडिकल कॉलेजों, सरकारी अस्पतालों में मेडिकल ऑफिसर और सहायक स्टाफ के भी बड़ी संख्या में पद नहीं भरे गए है। दुष्यंत ने इसका बड़ा कारण बताते हुए कहा कि सरकार की खराब नीतियों की वजह से डॉक्टर ज्वाइनिंग नहीं कर रहे है। ऐसे में न तो प्रदेश में बेहतर तरीके से मेडिकल विद्यार्थियों की डॉक्टरी की ट्रेनिंग हो रही है और न ही मरीजों का उचित उपचार हो रहा। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार का फोकस मेडिकल सेवाएं सुधारने की बजाय केवल जनता पर रोजाना नए-नए टैक्स लगाकर अपना खजाना भरने का है। रविवार को पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला फरीदाबाद जिले में जनसंपर्क अभियान के दौरान स्थानीय लोगों से रूबरू थे।

दुष्यंत चौटाला ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की बिल्डिंग बनाने या फिर खाली घोषणाएं करने से जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए मेडिकल कॉलेजों और नई बनी इमारतों के अंदर डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों और अन्य कर्मियों की तैनाती होती है, तभी लोगों को मेडिकल सुविधा मिलती हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि प्रदेश में अधिकांश डॉक्टरों के पद खाली पड़े है। दुष्यंत ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि बिना डॉक्टरों के जनता को चिकित्सा सुविधा कैसे मिलेगी ? नए मेडिकल कॉलेजों के हालात ये है कि जींद में 559 पदों में से 555 पद, महेंद्रगढ़ में 559 में से 492, भिवानी में 552 में से 477, नूंह में 362 में से 197 पद तो वहीं पीजीआई रोहतक में 852 में 341 पद खाली है।

इसके उपरांत पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने पृथला में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते हुए कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने, एसआईआर के दौरान मतदाता सूचियों की बारीकी से जांच करने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा पृथला विधानसभा क्षेत्र में करीब 45 हजार वोटों को आपत्ति के दायरे में डाल दिया गया है, जो कि बेहद चिंताजनक विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता के अधिकारों की रक्षा होना जरूरी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतदाता सूचियों की गहन जांच करने और जिन मतदाताओं के नाम सूची से गायब है, उनकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाने का आह्वान किया।