ऊना, 26 जुलाई। ऊना ज़िला में बागवानी की तस्वीर तेजी से बदल रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कृषि और बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के बीच एचपी-शिवा परियोजना किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। जंगली जानवरों के आतंक और सिंचाई की कमी से जूझने वाले क्षेत्रों में अब सौर फेंसिंग, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों के सहारे फलदार बाग विकसित हो रहे हैं। इससे किसान व्यावसायिक बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं और उनकी आय बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।
बंगाणा उपमंडल के बौल गांव के 65 वर्षीय किसान अजमेर सिंह एचपी-शिवा परियोजना की सफलता की जीवंत मिसाल हैं। परियोजना के तहत भूमि समतलीकरण, ड्रिप सिंचाई और तकनीकी सहयोग मिलने के बाद उन्होंने 25 कनाल भूमि पर श्वेता और ललिता किस्म के अमरूद के पौधों से बागवानी की शुरुआत की। बेहतर परिणाम मिलने पर उन्होंने अपने बगीचे का लगातार विस्तार किया और आज लगभग 125 कनाल भूमि पर अमरूद की सफल खेती कर रहे हैं। पिछले वर्ष उनके बगीचे से लगभग 25 क्विंटल अमरूद का उत्पादन हुआ, जिससे करीब 1.25 लाख रुपये की आय हुई। उत्पादन लागत के बाद लगभग 50 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर उन्होंने यह साबित किया कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक बागवानी किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
अजमेर सिंह की सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
साथ ही, चंगर-हंडोला के सुनील कुमार ने परियोजना के तहत 25 कनाल भूमि पर 1,725 अमरूद के पौधों का आधुनिक बगीचा विकसित किया है।
वहीं, उपरली बॉल गांव के 74 वर्षीय रोशन लाल ने ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसल को अपनाते हुए 25 कनाल भूमि पर ताइवान पिंक वैरायटी के लगभग 3,300 पौधे लगाए हैं। इन किसानों की उपलब्धियां दर्शाती हैं कि एचपी-शिवा परियोजना ऊना में बागवानी को नई पहचान देने के साथ किसानों के लिए आय और आत्मविश्वास का नया आधार भी बन रही है।
*दो चरणों में हो रहा है परियोजना का क्रियान्वयन*
उद्योग विभाग के उप निदेशक केके भारद्वाज ने बताया कि एचपी-शिवा परियोजना को जिला ऊना में दो चरणों में लागू किया जा रहा है। प्रथम चरण के अंतर्गत जिले में 200 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक फल बागवानी विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जबकि दूसरे चरण में 300 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रकार कुल 500 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक फल उत्पादन विकसित करने की योजना बनाई गई है।
*प्रथम चरण में उल्लेखनीय उपलब्धियां*
श्री भारद्वाज ने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में अब तक 149 हेक्टेयर भूमि का चयन किया जा चुका है। इस चयनित क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान आधारभूत ढांचे के विकास के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पौधरोपण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
अब तक लगभग 30 हजार मीटर (30 किलोमीटर) लंबी सौर ऊर्जा आधारित फेंसिंग स्थापित की जा चुकी है, जिससे किसानों की फसलें जंगली जानवरों से सुरक्षित हो रही हैं।
इसके अतिरिक्त लगभग 13 लाख लीटर क्षमता के अत्याधुनिक प्री-फैब्रिकेटेड मॉड्यूलर जल टैंक बनाए गए हैं तथा आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित की गई है, जिससे सीमित जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। इन सभी व्यवस्थाओं के उपरांत लगभग 60 हेक्टेयर क्षेत्र में 65,575 उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों का सफलतापूर्वक रोपण किया जा चुका है। इन पौधों में मुख्य रूप से अमरूद, मुसम्मी एवं अनार शामिल हैं।
*13 क्लस्टरों में विकसित हो रही आधुनिक फल बागवानी*
उप निदेशक ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत जिला ऊना में कुल 13 क्लस्टरों का चयन किया गया है। इनमें विकास खंड बंगाणा के अंतर्गत डुमखर, नलवाड़ी, बौल, सन्हाल, टीहरा, मुच्छाली, चड़ोली, कुवाड़ी, हंडोला, लमलेहडी तथा डोहक सहित लगभग 140 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है। वहीं विकास खंड हरोली के नंगल खुर्द में लगभग 4 हेक्टेयर तथा विकास खंड गगरेट के सलोह बेरी में लगभग 5 हेक्टेयर क्षेत्र में परियोजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
**इस वर्ष 70 हजार और पौधे रोपित करने का लक्ष्य **
उन्होंने बताया कि बागवानी विभाग द्वारा परियोजना के विस्तार के तहत जुलाई-अगस्त 2026 के दौरान लगभग 70 हज़ार अतिरिक्त फलदार पौधों का रोपण प्रस्तावित है। इसके लिए पौधों की मांग पहले ही भेजी जा चुकी है तथा पौधारोपण की सभी तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं।
एचपी-शिवा परियोजना को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले विकास खंड बंगाणा में वर्ष 2021 से 2024 के बीच लगभग 11 हेक्टेयर क्षेत्र में 11 अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन स्थल स्थापित किए गए थे। इनमें पांच अमरूद, चार अनार, एक मौसमी/माल्टा तथा एक ड्रैगन फ्रूट का प्रदर्शन प्लॉट विकसित किया गया। इन प्रदर्शन स्थलों पर लगाए गए पौधों ने केवल 2 से 3 वर्षों के भीतर फल देना शुरू कर दिया, जिसके अच्छे परिणामों ने क्षेत्र के अन्य किसानों का भी विश्वास बढ़ाया। इससे एचपी-शिवा परियोजना के व्यापक विस्तार को आधार मिला।
*दूसरे चरण में सुपर फ्रूट्स पर विशेष फोकस*
केके भारद्वाज ने जानकारी दी कि परियोजना के दूसरे चरण में बागवानी विभाग आधुनिक एवं उच्च मूल्य वाली बागवानी को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत ब्लूबेरी, एवोकैडो तथा ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
वर्तमान में जिला ऊना में लगभग 6 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा रही है। वहीं ब्लूबेरी की खेती को लेकर भी किसानों में उत्साह बढ़ रहा है। जिला ऊना के एक प्रगतिशील किसान ने बागवानी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में एक एकड़ भूमि पर ब्लूबेरी की खेती शुरू की है, जिसके शुरुआती परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे हैं। विभाग को उम्मीद है कि भविष्य में यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
*358 किसानों को मिल रहा सीधा लाभ*
केके भारद्वाज ने बताया कि एचपी-शिवा परियोजना के अंतर्गत अब तक 358 किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो चुके हैं। परियोजना पर बागवानी विभाग द्वारा अब तक लगभग 838 लाख रुपये व्यय किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 372 लाख रुपये केवल सौर फेंसिंग पर खर्च किए गए हैं, जबकि लगभग 70 लाख रुपये पंप हाउसों के लिए तीन-फेज बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए विद्युत विभाग को प्रदान किए गए हैं।
*सिंचाई ढांचे को भी मिला नया विस्तार*
परियोजना के माध्यम से केवल बागवानी ही नहीं बल्कि सिंचाई सुविधाओं को भी व्यापक रूप से सुदृढ़ किया गया है। जल शक्ति विभाग के माध्यम से उठाऊ सिंचाई योजना (एलआईएस) बल्ह, मुच्छाली तथा चपलाह जैसी तीन नई सिंचाई योजनाएं लोगों को समर्पित की गई हैं।
इसके अतिरिक्त पूर्व से संचालित सिंचाई योजनाओं का भी आधुनिकीकरण किया गया है। एलआईएस समूर से पिपली क्षेत्र में तीन-तीन लाख लीटर क्षमता के दो बड़े जल टैंकों का निर्माण किया गया है, जबकि एलआईएस हंडोला को भी सुदृढ़ बनाकर सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
*ऊना में किसानों का बदल रहा है खेती का भविष्य*
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि एचपी-शिवा परियोजना केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खेती को आधुनिक तकनीक, सुरक्षित उत्पादन, जल संरक्षण तथा बेहतर विपणन की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक समग्र मॉडल बनकर उभर रही है। सौलर फेंसिंग, ड्रिप सिंचाई, जल भंडारण, उच्च गुणवत्ता वाले पौधों तथा तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से किसानों की उत्पादन लागत कम होने के साथ-साथ आय में वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।