औहर (बिलासपुर), 25 सितम्बर: नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने आज राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, औहर में जिला स्तरीय छात्राओं की अंडर-19 खेलकूद प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। प्रतियोगिता में बिलासपुर जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं खंडों से लगभग 700 छात्रा खिलाड़ी भाग ले रही हैं।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियाँ केवल पदक या ट्रॉफी जीतने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास और व्यक्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि खेलों से झिझक दूर होती है और नेतृत्व क्षमता तथा अनुशासन का विकास होता है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों तथा शारीरिक शिक्षकों को निर्देश दिए कि वह प्रत्येक बच्चे को मैदान से जोड़ें ताकि सभी को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर प्राप्त हो सके।
राजेश धर्माणी ने समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन और राष्ट्र के वास्तविक निर्माता हैं। शिक्षक जितना समर्पित और मेहनती होगा परिणाम उतने ही बेहतर होंगे। उन्होंने गुणात्मक और व्यावहारिक शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि केवल डिग्री या डिप्लोमा हासिल करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसका उपयोग समाज और देश की समस्याओं के समाधान में कर सकें।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए सरकार प्रयासरत है। लाहौल-स्पीति के जिस्पा में हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग के लिए सुविधाओं को विकसित करने तथा शिलारू सहित अन्य स्थानों में खेल प्रशिक्षण अधोसंरचना को और सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इन सुविधाओं को पर्यटन से जोड़कर विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि देश-विदेश के खिलाड़ी भी हिमाचल में प्रशिक्षण के लिए आकर्षित हो सकें।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को संविधान और कानून द्वारा प्राप्त अधिकार व्यवहार में भी समान रूप से सुनिश्चित होने चाहिए। भावनाएं महिलाओं की शक्ति हैं, लेकिन किसी को भी इन भावनाओं का अनुचित लाभ उठाने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य निर्धारित कर जीवन में आगे बढ़ने को प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि केवल लक्ष्य निर्धारित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से वर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर स्वयं को किस भूमिका में देखना चाहते हैं, इस पर विचार करने और उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने को कहा।
उन्होंने कहा कि आने वाला समय नवाचार और अनुसंधान का है। देश को केवल उपभोक्ता राष्ट्र के रूप में नहीं, बल्कि नई तकनीक, उत्पाद और समाधान विकसित करने वाले राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसी सोच विकसित करने का आग्रह किया, जिससे उनके ज्ञान और प्रतिभा का लाभ केवल स्वयं तक सीमित न रहे, बल्कि समाज, देश और पूरी दुनिया को मिले।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं को एक-दूसरे से संवाद करने, नई मित्रताएं बनाने और एक-दूसरे की प्रतिभाओं एवं खूबियों से सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे इन चार दिनों को यादगार बनाएं और विभिन्न विद्यालयों से आई छात्राओं के साथ अधिक से अधिक संवाद स्थापित करें। उन्होंने कहा कि विद्यालय जीवन की यादें जीवनभर साथ रहती हैं और ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के जीवन में स्थायी स्मृतियां बनाते हैं।
इससे पहले उन्होंने प्रतियोगिता का झंडा फहराकर शुभारंभ किया तथा खिलाड़ी छात्राओं द्वारा प्रस्तुत भव्य मार्च पास्ट की सलामी ली।
आयोजन समिति ने मुख्यातिथि का स्वागत किया तथा आयोजन के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के उपरांत तकनीकी शिक्षा मंत्री ने भोजन कक्ष का भी निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में किसी भी प्रकार की कोताही को गंभीरता से लिया जाएगा।
इस अवसर पर उपनिदेशक स्कूल शिक्षा उच्च नरेश चंदेल, प्रारंभिक स्कूल शिक्षा अरूण गौतम सहित स्थानीय स्कूल की प्रधानाचार्य, विभिन्न स्कूलों के अध्यापकों सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।