डीसी गंधर्वा राठौड़ ने ब्राहलड़ी और नारा में लिए जलस्रोतों की सफाई का जायजा
इस अभियान में आम लोगों, विशेषकर महिलाओं की भागीदारी की सराहना की

हमीरपुर 10 जुलाई। जिला में प्राकृतिक जलस्रोतों की सफाई और संरक्षण एवं संवर्द्धन सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ के विशेष आह्वान पर जिले भर में पारंपरिक कुओं, तालाबों, बावड़ियों, खातरियों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों की सफाई का अभियान लगातार जारी है। इस अभियान में ग्राम पंचायतों के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा महिला मंडलों, युवक मंडलों और अन्य सामाजिक संगठनों के सदस्य भी काफी उत्साह के साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।
उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ भी स्वयं फील्ड में जाकर इस अभियान का जायजा ले रही हैं। शुक्रवार को उन्होंने एडीसी अभिषेक गर्ग और अन्य अधिकारियों के साथ ग्राम पंचायत ब्राहलड़ी और ग्राम पंचायत नारा का दौरा करके प्राकृतिक जलस्रोतों की सफाई के कार्यों का निरीक्षण किया।
इन कार्यों में आम लोगों, विशेषकर महिलाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उपायुक्त ने कहा कि इससे यह अभियान एक जन आंदोलन का रूप लेगा और इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जिला में जल जनित रोगों के फैलने की आशंका भी नहीं रहेगी।
इस अवसर पर उपायुक्त ने क्षेत्र के नवनिर्वाचित पंचायत जनप्रतिनिधियों से इस अभियान को लगातार जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि इसके लिए पंचायतों को जिला प्रशासन, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग, जल शक्ति विभाग, वन विभाग और अन्य संबंधित विभागों के माध्यम से भी हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।
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एग्रीस्टैक से डिजिटल हो रही खेती, ऊना के 41 हजार से अधिक किसान डिजिटल रजिस्ट्री से जुड़े

मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण को मिली नई गति


ऊना, 10 जुलाई. मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में कृषि क्षेत्र में तकनीक आधारित बदलाव को नई गति मिली है। इसी कड़ी में एग्रीस्टैक परियोजना के तहत ऊना जिले के 41,861 किसान डिजिटल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। इस पहल से किसानों को एकीकृत डिजिटल पहचान मिलेगी, जिससे सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं तक उनकी पहुंच अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
तकनीक आधारित इस व्यवस्था के माध्यम से किसानों की पहचान, भूमि का रिकॉर्ड, फसल का विवरण और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल डाटाबेस तैयार करने के साथ किसानों तक सेवाओं को अधिक आसान, सटीक और पारदर्शी बनाना है।

41 हजार से अधिक किसानों का हुआ डिजिटल पंजीकरण
कृषि विभाग ऊना के उपनिदेशक प्रेम सिंह ठाकुर के अनुसार, जिला ऊना में अब तक 41,861 किसानों का पंजीकरण एग्रीस्टैक पोर्टल पर किया जा चुका है। प्रत्येक पंजीकृत किसान को आधार आधारित 11 अंकों की विशिष्ट किसान आईडी (यूनीक फार्मर आईडी) प्रदान की जाएगी, जो उसकी डिजिटल पहचान का आधार बनेगी। यह किसान आईडी भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, दस्तावेज़ों के सत्यापन तथा विभिन्न कृषि सेवाओं तक त्वरित पहुंच का मजबूत माध्यम बनेगी।

डिजिटल रिकॉर्ड से योजनाओं का लाभ होगा आसान
अब किसानों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार दस्तावेज़ जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एक बार डिजिटल रजिस्ट्री बनने के बाद किसान की भूमि, फसल और अन्य आवश्यक जानकारी सुरक्षित रूप से उपलब्ध रहेगी।
इससे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद, फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सहित अनेक योजनाओं का लाभ अधिक सरलता और पारदर्शिता से किसानों तक पहुंच सकेगा।

डिजिटल क्रॉप सर्वे बना रहा खेती का सटीक नक्शा
जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य भी तेज़ी से चल रहा है। अब तक 2,89,143 सर्वेक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें से 2,83,073 सर्वे स्वीकृत हो चुके हैं। मोबाइल ऐप और जीपीएस तकनीक के माध्यम से खेतों की मैपिंग कर फसलों का वास्तविक विवरण दर्ज किया जा रहा है। इससे कृषि योजनाओं का लाभ सही किसानों तक पहुंचाने के साथ-साथ भविष्य की कृषि नीति तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

फार्मर रजिस्ट्री से बढ़ेंगी किसानों की सुविधाएं
फार्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए अनेक नई सुविधाओं का माध्यम बन रही है। इस व्यवस्था से किसानों को सरकारी योजनाओं में स्वतः जुड़ने की सुविधा मिलेगी। फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री की प्रक्रिया अधिक सरल होगी। साथ ही भूमि, फसल, मिट्टी और जलवायु के आधार पर वैज्ञानिक कृषि परामर्श उपलब्ध कराया जा सकेगा। सरकारी सहायता का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित होगा और पात्र किसानों की पहचान भी आसान बनेगी।

लोक मित्र केंद्रों पर उपलब्ध है पंजीकरण सुविधा
उपनिदेशक ने बताया कि जिन किसानों का अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है, वे अपने निकटतम लोक मित्र केंद्र या एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से निःशुल्क पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके लिए केवल आधार कार्ड, भूमि का कोई भी खसरा नंबर तथा आधार से लिंक मोबाइल नंबर आवश्यक है।

जागरूकता अभियान से बढ़ रही किसानों की भागीदारी
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों को इस डिजिटल पहल के बारे में जागरूक कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस सुविधा से जुड़ सकें और आधुनिक कृषि सेवाओं का लाभ उठा सकें।

डिजिटल खेती की ओर बढ़ता ऊना
कृषि अब पारंपरिक दायरे से निकलकर तकनीक आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। एग्रीस्टैक और फार्मर रजिस्ट्री जैसी पहलें इस बदलाव की मजबूत नींव हैं। ऊना जिले के 41 हजार से अधिक किसानों का इस अभियान से जुड़ना इस बात का संकेत है कि किसान नई तकनीक को अपनाकर आधुनिक, पारदर्शी और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यह पहल कृषि सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जिलाधीश की किसानों से अपील
जिलाधीश जतिन लाल ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे समय रहते एग्रीस्टैक पोर्टल पर अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल किसान रजिस्ट्री से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध तरीके से किसानों तक पहुंचेगा। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक पात्र किसान तक इस अभियान की जानकारी पहुंचे और कोई भी पात्र किसान इस पहल से वंचित न रहे।
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पॉलीक्लीनिक पशु चिकित्सालय ललड़ी में 66 नुकीली धातु की तारें निकालकर गर्भवती भैंस को दिया नयाजीवन

ऊना, 10 जुलाई। जिला ऊना के पशु चिकित्सालय पॉलीक्लिनिक ललड़ी में पशु चिकित्सकों की टीम ने एक जटिल एवं सफल शल्य चिकित्सा कर नौ माह की गर्भवती भैंस को नया जीवन प्रदान किया। ऑपरेशन के दौरान भैंस के पेट से 66 नुकीली धातु की वस्तुएं, जिनमें कीलें, तार तथा धातु के छोटे-छोटे टुकड़े शामिल थे, सुरक्षित रूप से निकाले गए।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत राणौत ने बताया कि हरोली उपमंडल के बारेवाल गांव के पशुपालक करनैल सिंह अपनी नौ माह की गर्भवती भैंस को पिछले लगभग दस दिनों से चारा न खाने, सुस्त रहने तथा लगातार अस्वस्थ दिखाई देने की शिकायत के साथ पशु चिकित्सालय पॉलीक्लिनिक ललड़ी लेकर आए थे। पशु की विस्तृत चिकित्सीय जांच, रक्त परीक्षण तथा अल्ट्रासाउंड के दौरान उसके पेट में बड़ी संख्या में धातु की विदेशी वस्तुएं (फॉरेन बॉडी) होने की पुष्टि हुई।
उन्होंने बताया कि भैंस की गंभीर स्थिति को देखते हुए पशु मालिक को तुरंत ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई। इसके उपरांत डॉ. निशांत राणौत, डॉ. नवनीत शर्मा, डॉ. शिल्पा राणौत तथा डॉ. स्टेफनी प्रधान की टीम ने सफल शल्य चिकित्सा कर भैंस के पेट से कुल 66 नुकीली धातु की वस्तुएं बाहर निकालीं। यदि समय रहते यह ऑपरेशन नहीं किया जाता तो ये धातु की वस्तुएं भैंस के पेट एवं अन्य अंदरूनी अंगों को गंभीर क्षति पहुंचाकर उसकी जान के लिए खतरा बन सकती थीं।

डॉ. राणौत ने बताया कि ऑपरेशन के बाद भैंस की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। उसे दर्द से काफी राहत मिली है तथा अगले सात से दस दिनों तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखकर आवश्यक उपचार दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस सफल शल्य चिकित्सा में फार्मासिस्ट सौरव कुमार, सुनंदा, दीपक, करमवीर तथा विकास ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

पशुपालकों से सावधानी बरतने की अपील
डॉ. निशांत राणौत ने पशुपालकों से आग्रह किया कि पशुओं को चारा खिलाने से पहले विशेष रूप से गेहूं के भूसे एवं अन्य सूखे चारे को अच्छी तरह छान लें, ताकि उसमें मौजूद कील, तार अथवा अन्य धातु के टुकड़े पशुओं के पेट में न पहुंच सकें। थोड़ी-सी सावधानी पशुओं को गंभीर बीमारी और बड़े ऑपरेशन से बचा सकती है।

*आधुनिक सुविधाओं से लैस है पॉलीक्लीनिक ललड़ी *
डॉ रनौत ने बताया कि पशु चिकित्सालय पॉलीक्लिनिक ललड़ी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है । यहाँ जटिल शल्य चिकित्साएं नियमित रूप से की जा रही हैं। अस्पताल में अब तक एक हजार से अधिक सफल सर्जरी की जा चुकी हैं। यहां अनुभवी पशु चिकित्सकों की टीम आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार की सर्जरी, ऑर्थोपेडिक उपचार, फ्रैक्चर प्रबंधन तथा एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रही है। इन सेवाओं के माध्यम से क्षेत्र के पशुपालकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण एवं विशेषज्ञ पशु चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
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सुनील शर्मा बिट्टू ने कुसवाड़ में सुनीं जनसमस्याएं

हमीरपुर 10 जुलाई। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने शुक्रवार को ग्राम पंचायत जंगल रोपा के गांव कुसवाड़ का दौरा करके स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं।
इस दौरान लोगों ने सुनील शर्मा बिट्टू के समक्ष फोरलेन नेशनल हाईवे से गांव घनोटला तक सड़क खराब होने की समस्या उठाई तथा इसकी तुरंत मरम्मत करवाने की मांग की। गांववासियों ने पशु औषधालय खोलने, हमीरपुर से मसयाणा चौक तक बस सेवाएं आरंभ करने और कई अन्य मांगें भी रखीं।
सुनील शर्मा बिट्टू ने लोगों की ओर से उठाई गई सभी समस्याओं का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को इन जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हमीरपुर से मसयाणा चौक तक बस सेवा आरंभ करने, पशु औषधालय खोलने व अन्य सभी मांगों को वह मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह के समक्ष रखेंगे तथा इन्हें पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार त्वरित कदम उठाए जाएंगे।
इस अवसर पर एपीएमसी अध्यक्ष अजय शर्मा, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुमन भारती, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुनील कुमार, पंचायत प्रधान करतार चंद, जोगिंद्र सिंह, केवल किशोर, रूपलाल, तुलसी राम, सरोज कुमारी, वीना देवी, मीना कुमारी, अनीता कुमारी, सावित्री देवी, करतारो देवी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।
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एचपीवी वैक्सीनेशन में जिला हमीरपुर ने पार किया 50 फीसदी का आंकड़ा
14-15 वर्ष के आयु वर्ग की लड़कियों को सर्विकल कैंसर से बचाएगा एचपीवी का टीका

हमीरपुर 10 जुलाई। 14-15 वर्ष के आयु वर्ग की लड़कियों को सर्विकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से बचाने के लिए आरंभ किए गए एचपीवी टीकाकरण अभियान का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए अब जिला हमीरपुर में आवश्यकतानुसार स्कूल स्तर पर भी टीकाकरण सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इससे जिला में एचपीवी वैक्सीनेशन को गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय अत्री ने जिला में एचवीपी वैक्सीनेशन का आंकड़ा अब 50 प्रतिशत से पार हो गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने जिला में 14-15 वर्ष के आयु वर्ग की लगभग 2967 लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन का टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें से अभी तक 1490 लड़कियां यह टीका लगवा चुकी हैं।
डॉ. अजय अत्री ने बताया कि महिलाओं में बार-बार इनफेक्शन के कारण सर्विकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। सर्विकल कैंसर की शिकार लगभग 99.7 प्रतिशत महिलाओं में इसका कारण लंबे समय तक इनफेक्शन होना ही है। एक अध्ययन के अनुसार एक लाख महिलाओं में लगभग 14 महिलाएं इससे ग्रस्त पाई जाती हैं। महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर के बाद सर्विकल कैंसर सबसे ज्यादा पाया गया है। इस गंभीर रोग से बचाव के लिए ही एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान आरंभ किया गया है। यह टीका 14-15 वर्ष के आयु वर्ग की लड़कियों को भविष्य में सर्विकल कैंसर से बचाएगा।