एससी-एसटी अत्याचार मामलों में तफ्तीश कर उनका समय पर निपटान हो सुनिश्चित: अतिरिक्त उपायुक्त
जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में 89 मामलों की हुई समीक्षा

धर्मशाला, 11 अगस्त: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 एवं नियम 1995 के अन्तर्गत जिला कांगड़ा में गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक उपायुक्त कार्यालय में आयोजित की गई। अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की।
अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंधित मामलों को शीघ्र निपटाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी न्याय न मिलने के समान है। इसलिए संबंधित मामलों की तफ्तीश कर उनका समय पर निपटान सुनिश्चित किया जाए।
अतिरिक्त उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए तथा पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए।
बैठक में जिला न्यायालयों में लंबित मामलों की स्थिति तथा पुलिस विभाग में दर्ज एवं लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में 89 मामलों की समीक्षा बैठक में की गई।
इस अवसर पर जिला कल्याण अधिकारी साहिल मांडला, अतिरिक्त एसपी आर. पी. जसवाल, सचिव जिला रेडक्रास ओम प्रकाश शर्मा, जिला अटाॅर्नी एनएस चैहान, डीआईईटी से वीना सिंह तथा गैर सरकारी सदस्य उपस्थित रहे।

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दिव्यांगजन का सशक्तिकरण केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकता भी : विनय कुमार

धर्मशाला, 11 अगस्त: अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार की अध्यक्षता में आज उपायुक्त कार्यालय धर्मशाला में विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत आयोजित त्रैमासिक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जिले में दिव्यांगजनों से जुड़ी योजनाओं, सुविधाओं और अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में दिव्यांगजनों से संबंधित विभिन्न मदों पर चर्चा की गई।

अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री सहारा योजना के प्रशासनिक संचालन एवं क्रियान्वयन का दायित्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग से स्थानांतरित कर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंप दिया गया है। इस योजना के माध्यम से गंभीर बीमारियों से पीड़ित पात्र व्यक्तियों को प्रतिमाह 3 हजार रुपये की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत पार्किसेिनिज्म, मैलिग्नेंट कैंसर, पैरालिसिस लकवा, मस्कुलर डिस्ट्राफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, रीनल फेल्यर (एक्यूट एवं क्राॅनिक) तथा अन्य ऐसी गंभीर बीमारियाँ शामिल हैं, जिनके कारण व्यक्ति स्थायी रूप से असमर्थ हो जाता है। उन्होंने बताया कि पात्र नागरिक अपने नजदीकी काॅमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से अथवा ीपउंबबमेेण्ीचण्हवअण्पदध्मांसलंद पर आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि तहसील स्तर पर हर दस्तावेज के लिए लगने वाली फीस की रेट लिस्ट प्रदर्शित की जाए और दिव्यांगजनों को दस्तावेज संबंधी कार्यों में प्राथमिकता दी जाए। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों में विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा सभी कार्यालयों में उस कार्यालय से सम्बन्धित दिव्यांगजन के अधिकारों बारे जानकारी अवश्य प्रदर्शित की जाए। इसके साथ ही प्रत्येक विभाग अपने कार्यालयों में व्हीलचेयर रैंप, दिव्यांग अनुकूल शौचालय तथा आवश्यक सुविधाओं का प्रावधान सुनिश्चित करे। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि यह सभी विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि वे अपने-अपने कार्यालयों में दिव्यांगजनहित उपायों को प्राथमिकता से लागू करें।

अतिरिक्त उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों से संबंधित योजनाओं की निगरानी नियमित रूप से की जाए और हर त्रैमासिक बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उनका सशक्तिकरण केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि प्रशासनिक प्राथमिकता भी है। प्रत्येक अधिकारी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें किसी भी स्तर पर भेदभाव या असुविधा का सामना न करना पड़े। अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि सभी विभाग अपने स्तर ऐसे उपाय करें ताकि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने में सहायता मिल सके।

इसके उपरांत अतिरिक्त उपायुक्त ने राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के तहत स्थानीय स्तरीय समिति की अध्यक्षता की और निःशक्त व्यक्तियों के संरक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। बैठक में ऐसे निःशक्त व्यक्तियों की समस्याओं के समाधान पर भी चर्चा की गई जिनके पास पारिवारिक सहारा नहीं है। इस अवसर पर 4 मामलों में कानूनी संरक्षक नियुक्त करने बारे संस्तुति भी की गई।

बैठक में जिला कल्याण अधिकारी साहिल मांडला, जिला स्वास्थ्य अधिकारी आरके सूद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य संबंधित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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एचपीयू क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में गणित एवं वाणिज्य विभाग के नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित

धर्मशाला, 11 अगस्त: हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र, धर्मशाला के गणित एवं वाणिज्य विभाग द्वारा 7 अगस्त को नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं उन्हें शैक्षणिक व्यवस्था, पाठयक्रम तथा उपलब्ध सुविधाओं से परिचित कराने के उद्देश्य से दो दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम-इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर जोगिंदर सिंह धीमान, पूर्व निदेशक, योजना एवं शिक्षक प्रशिक्षण, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन, डिजिटल कौशल एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। जबकि निदेशक, एचपीयू क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला प्रो. कुलदीप कुमार अत्री ने विद्यार्थियों को सेमिनार, कार्यशालाओं, प्रस्तुतियों एवं शोध गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में गणित विभाग के समन्वयक डाॅ विजेता पठानिया, वाणिज्य विभागाध्यक्ष डाॅ० श्वेता पठानिया, डाॅ. तिलक राज शर्मा, डाॅ तिलक राज शर्मा, डाॅ सुशील कुमार सहित विभाग के अन्य प्राध्यापक एवं नव-प्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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एससी-एसटी अत्याचार मामलों में तफ्तीश कर उनका समय पर निपटान हो सुनिश्चित: अतिरिक्त उपायुक्त
जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में 89 मामलों की हुई समीक्षा

धर्मशाला, 11 अगस्त: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 एवं नियम 1995 के अन्तर्गत जिला कांगड़ा में गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक उपायुक्त कार्यालय में आयोजित की गई। अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की।
अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति से संबंधित मामलों को शीघ्र निपटाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी न्याय न मिलने के समान है। इसलिए संबंधित मामलों की तफ्तीश कर उनका समय पर निपटान सुनिश्चित किया जाए।
अतिरिक्त उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जाए तथा पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए।
बैठक में जिला न्यायालयों में लंबित मामलों की स्थिति तथा पुलिस विभाग में दर्ज एवं लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में 89 मामलों की समीक्षा बैठक में की गई।
इस अवसर पर जिला कल्याण अधिकारी साहिल मांडला, अतिरिक्त एसपी आर. पी. जसवाल, सचिव जिला रेडक्रास ओम प्रकाश शर्मा, जिला अटाॅर्नी एनएस चैहान, डीआईईटी से वीना सिंह तथा गैर सरकारी सदस्य उपस्थित रहे।
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‘मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 3.0’ अभियान शुरू, लंबित मामलों के त्वरित निपटारे पर जोर

धर्मशाला, 11 अगस्त: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सचिव, आर मिहुल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 3.0 अभियान का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान जिला कांगड़ा के समस्त तालुका, न्यायालयों तथा जिला न्यायालयों में चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दीर्घकालीन लंबित मामलों का सुलह एवं मध्यस्थता के माध्यम से शीघ्र, सरल और प्रभावी निपटारा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत विवाह व पारिवारिक विवाद, मोटर वाहन दुर्घटना दावे, घरेलू हिंसा व चैक बाउंस मामले, वाणिज्यिक विवाद, सेवा मामले, समझौता योग्य आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली, विभाजन, बेदखली, भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले तथा अन्य उपयुक्त नागरिक मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया जाना है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता एक ऐसी वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षित मध्यस्थ की सहायता से पक्षकार आपसी सहमति एवं बातचीत के माध्यम से अपने विवादों का समाधान करते हैं। यह प्रक्रिया पूर्णतः गोपनीय, सरल, कम खर्चीली और समय-बचत करने वाली है, जिससे पक्षकारों के बीच संबंध भी बना रहते हैं और न्यायालयों में लंबित मामलों का भार भी कम होता है।
उन्होंने जिला कांगड़ा के समस्त नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों के शांतिपूर्ण, त्वरित और संतोशजनक समाधान के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया को अपनाएं। यह अभियान जनता को सुलभ, सस्ता और प्रभावी न्याय उपलब्ध करवाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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सार्वजनिक वितरण प्रणाली व सतर्कता समिति की जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित
खाद्यान्नों की गुणवत्ता और पारदर्शी वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश
पांच माह में 4.70 लाख राशनकार्ड धारकों को 62.68 करोड़ रुपये के खाद्यान्न वितरित
धर्मशाला, 11 अगस्त। जिला कांगड़ा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मार्च से जुलाई, 2026 तक पांच माह की अवधि में 1,161 उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से 4 लाख 70 हजार 948 राशनकार्ड धारकों को 62.68 करोड़ रुपये मूल्य के खाद्यान्न उपलब्ध करवाए गए। यह जानकारी अतिरिक्त उपायुक्त कांगड़ा विनय कुमार की अध्यक्षता में आज आयोजित जिला स्तरीय सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं सतर्कता समिति की समीक्षा बैठक में दी गई।
बैठक में जिला में उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाई जा रही खाद्य वस्तुओं के भंडारण, गुणवत्ता, पारदर्शी वितरण व्यवस्था तथा विभाग द्वारा किए जा रहे निरीक्षणों की विस्तृत समीक्षा की गई।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जिला में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से पात्र परिवारों को नियमित एवं पारदर्शी तरीके से आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र उपभोक्ता को निर्धारित मात्रा में समय पर खाद्यान्न उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने खाद्यान्नों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ वितरण व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने जिला में एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा।
उन्होंने बताया कि गत पांच माह के दौरान खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा जिला में कुल 7,164 निरीक्षण किए गए। इनमें 56 मामलों में अनियमितताएं पाए जाने पर प्रतिभूति एवं मूल्यांतर राशि के रूप में 8.38 लाख रुपये की राशि वसूल की गई। इसके अतिरिक्त पॉलीथीन कम्पाउंडिंग के तहत 16,500 रुपये तथा घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग के मामलों में 10,000 रुपये की जुर्माना राशि वसूल की गई।
विनय कुमार ने अधिकारियों को जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं उपभोक्ता हितैषी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नियमित निरीक्षण और सतत निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर भी बल दिया। बैठक में अंत्योदय अन्न योजना, प्राथमिक गृहस्थियां तथा विभिन्न श्रेणियों के तहत खाद्यान्न वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई और विभाग से आवश्यक फीडबैक प्राप्त किया गया।
अतिरिक्त उपायुक्त ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तथा पोषण से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित विभिन्न योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने जिला में राशन वितरण, खाद्यान्नों की गुणवत्ता, शिकायत निवारण प्रणाली, प्राप्त शिकायतों के त्वरित निवारण, स्कूलों में बच्चों को उपलब्ध करवाए जा रहे मिड-डे मील, डाइट चार्ट, भोजन की गुणवत्ता एवं शौचालयों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा आंगनवाड़ी केंद्रों में शिशु देखभाल एवं पोषण तथा गर्भवती एवं धात्री महिलाओं और नवजात शिशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच एवं पोषण संबंधी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में नियंत्रक, जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) पुरुषोत्तम सिंह ने बताया कि गत पांच माह के दौरान मुख्यमंत्री सेवा संकल्प के माध्यम से कुल 919, ई-समाधान पोर्टल के माध्यम से 7 तथा अन्य माध्यमों से 30 शिकायतें प्राप्त हुईं। उन्होंने बताया कि इन सभी शिकायतों का निपटारा सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला की सभी उचित मूल्य की दुकानों पर पीओएस मशीनों के माध्यम से चेहरे की पहचान एवं ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण के जरिए राशन वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
*9 उचित मूल्य की दुकानें व 3 शाखाएं खोलने को अनुमोदन*
बैठक में जिला से प्राप्त विभिन्न आवेदनों पर भी विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। समिति ने 9 उचित मूल्य की दुकानों तथा 3 शाखाएं खोलने को अनुमोदन प्रदान किया, जबकि 7 नई उचित मूल्य की दुकानों को स्वीकृति प्रदान की गई। संबंधित अधिकारियों को आगामी औपचारिकताएं निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्षा सीमा चौधरी, जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक कुमार शर्मा, डॉ. अरविंद राणा, डॉ. दीपिका सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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वरिष्ठ नागरिक समाज का अहम हिस्सा, उनके अनुभवों से लें सीख: अतिरिक्त उपायुक्त
वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए कांगड़ा में 10.05 लाख रुपये की कार्ययोजना

धर्मशाला, 11 अगस्त: जिला कांगड़ा में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण एवं उन्हें सक्रिय और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य कार्ययोजना एसएपीएसआरसी के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त कांगड़ा विनय कुमार ने की।
बैठक में अटल वयो अभ्युदय योजना के अंतर्गत कांगड़ा जिले को स्वीकृत 10.05 लाख रुपये की राशि से विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्ययोजना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए उत्पादक गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों, अंतरपीढ़ी संवाद, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिविर, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता तथा पौधरोपण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज का अहम हिस्सा हैं, समाज को उनके अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार वृद्धजनों को इस डिजिटल युग में उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक ऐसे कार्यक्रम चला रही है जिससे वे समाज को अपने अनुभवों का लाभ दे सकेें।
उन्होेंने कहा कि जिला कांगड़ा में वृद्धजनों के लिऐ उत्पादक वृद्धावस्था के अंतर्गत तीन सात दिवसीय कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इनमें कुल 150 वरिष्ठ नागरिकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यशालाओं का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को आजीविका एवं उत्पादक गतिविधियों से जोड़ना और उनके कौशल का उपयोग सुनिश्चित करना है। इनका आयोजन वरिष्ठ नागरिक गृहों, डे-केयर सेंटरों, वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्रों आदि में एचपीएसआरएलएम के सहयोग से किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े विषयों को लेकर चार एक दिवसीय जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इनमें पुलिस, वार्ड एवं ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासनिक कर्मचारियों, युवाओं तथा सामुदायिक संगठनों को शामिल किया जाएगा।
विनय कुमार ने कहा कि अंतरपीढ़ी संबंधों को मजबूत करने के लिए सात कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं के बीच ज्ञान एवं कौशल का आदान-प्रदान, कला-संस्कृति, नृत्य-संगीत, चित्रकला, क्विज, खेल एवं साॅफ्ट स्किल, बागवानी, पाक कला, पुस्तक एवं कविता पाठ तथा कहानी वाचन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए दो स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिमेंशिया स्क्रीनिंग के साथ-साथ विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आॅर्थोपेडिक, ईएनटी, नेत्र रोग तथा सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जांच एवं परामर्श उपलब्ध करवाया जाएगा। मोतियाबिंद सर्जरी के लिए पात्र वरिष्ठ नागरिकों की पहचान भी इन शिविरों में की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को इस डिजिटल युग में समाज और तकनीकी से साथ चलने में डिजिटल साक्षरता अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता, समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण, शारीरिक एवं मानसिक कौशल सुधार तथा नृत्य, कला एवं संगीत थेरेपी से संबंधित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत पौधरोपण अभियान भी आयोजित किया जाएगा।
अतिरिक्त उपायुक्त ने संबंधित विभागों को कार्ययोजना के तहत सभी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा अधिक से अधिक वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर जिला कल्याण अधिकारी साहिल मांडला, अतिरिक्त एसपी आर. पी. जसवाल, सचिव जिला रेडक्रास ओम प्रकाश शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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