जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की मासिक बैठक आयोजित
जल-जनित रोगों से बचाव और पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें : अपूर्व देवगन
मंडी, 31 जनवरी। उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की मासिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिला में चल रही पेयजल योजनाओं के समयबद्ध निर्माण, जल गुणवत्ता, जन भागीदारी तथा जल-जनित रोगों की रोकथाम को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। उपायुक्त ने जिला मंडी में कार्यरत सभी अधिशासी अभियंताओं को निर्देश दिए कि सभी पेयजल योजनाओं का निर्माण निर्धारित समय अवधि के भीतर सुनिश्चित किया जाए तथा भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की सख्ती से अनुपालना की जाए।

उपायुक्त ने कहा कि वर्तमान समय में फैल रहे जल-जनित रोगों से बचाव हेतु तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। इसके लिए जल शक्ति विभाग को नियमित रूप से जल नमूनों की जांच करवाने तथा संभावित कंटैमिनेशन स्रोतों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए।

उपायुक्त ने शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि विद्यालयों, आंगनवाड़ी केंद्रों तथा स्वास्थ्य संस्थानों में लिए गए पेयजल नमूनों की जांच जल शक्ति विभाग की प्रयोगशालाओं में नियमित रूप से करवाना सुनिश्चित करें।

उपायुक्त ने कहा कि जिला मंडी ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत शत-प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। अब इस उपलब्धि को बनाए रखना तथा सभी योजनाओं की दीर्घकालिक कार्यक्षमता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जो योजनाएं 75 प्रतिशत से कम प्रगति पर हैं, उनकी नियमित मॉनिटरिंग कर समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जाए।

अधिशासी अभियंता देवराज चौहान ने बताया कि मंडी जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुल 213 पेयजल योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें से 149 योजनाएं पूर्ण की जा चुकी हैं तथा शेष योजनाओं का कार्य लगभग 75 से 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त पेयजल स्रोतों से संबंधित कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया जा चुका है तथा पेयजल नमूनों की जांच के लिए निर्धारित लक्ष्य भी पूरे कर लिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि जिला में जल जीवन मिशन सहित कुल 1569 पेयजल योजनाओं के माध्यम से जल आपूर्ति की जा रही है, जिनमें से 16 योजनाएं बड़े क्षेत्रों को कवर करती हैं। अब तक किए गए प्रयोगशाला परीक्षणों में पानी की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई है।