घुमारवीं (बिलासपुर), 04 जनवरी 2026:राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के सहयोग से रविवार को उपमंडलीय न्यायालय परिसर घुमारवीं में विशाल विधिक साक्षरता शिविर का सफल आयोजन किया गया।
इस शिविर का उद्देश्य आम जनता को उनके कानूनी अधिकारों, कर्तव्यों तथा विभिन्न सामाजिक विषयों के प्रति जागरूक करना रहा। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश घुमारवीं डॉ मोहित बंसल ने सभी अतिथियों का इस शिविर में शामिल होने पर स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि माननीय न्यायाधीश ज्योत्सना सुमंत डढवाल, जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर रहीं। उन्होंने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में माननीय न्यायाधीश श्रीमती ज्योत्सना सुमंत डढवाल ने कहा कि विधिक साक्षरता शिविरों का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि मुफ्त कानूनी सहायता, लोक अदालत, महिला एवं बाल संरक्षण कानून, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार और आपदा पीड़ितों के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना आज की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
इस अवसर पर बार एसोसिएशन घुमारवीं के प्रधान एडवोकेट एल. आर. नड्डा ने पर्यावरण संरक्षण विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण न केवल हमारा मौलिक अधिकार है, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने लोगों से प्लास्टिक के प्रयोग को कम करने, जल स्रोतों की रक्षा करने और वृक्षारोपण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में एडवोकेट निधि रतन ने महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखते हुए कहा कि महिलाओं को कानूनी रूप से सशक्त बनाना ही वास्तविक सशक्तिकरण है। उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम, दहेज निषेध कानून, कार्यस्थल पर महिलाओं के उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम तथा महिलाओं के लिए उपलब्ध मुफ्त कानूनी सहायता योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
वहीं तहसीलदार घुमारवीं बबीता धीमान ने आपदा पीड़ित पुनर्वास विषय पर जागरूक करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रशासन द्वारा उपलब्ध राहत एवं पुनर्वास योजनाओं, मुआवजा प्रक्रिया तथा आपदा के बाद कानूनी सहायता के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सही जानकारी और त्वरित कार्रवाई से जान-माल की क्षति को कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम में एडवोकेट पवन कुमार शर्मा ने नशा मुक्त समाज के निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि नशा समाज की सबसे बड़ी बुराइयों में से एक है, जो युवा पीढ़ी को खोखला कर रही है। उन्होंने नशे के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का संदेश दिया।
इस शिविर में श्री रंजीत सिंह ठाकुर सदस्य सचिव राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने विशेष रूप से भाग लिया, उन्होंने अपने संबोधन में विस्तार से विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा चलाए कार्यक्रमों की जानकारी दी शिविर में मुफ्त कानूनी सलाह, पंपलेट वितरण तथा विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों द्वारा जागरूकता सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
कार्यक्रम के अंत में उपमंडल विधिक सेवा प्राधिकरण घुमारवीं की कार्यवाहक अध्यक्ष श्रीमती स्वाति बरवाल द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों तथा आम जनता का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
इस विशाल विधिक साक्षरता शिविर ने पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, आपदा प्रबंधन और नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर जन-जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।