मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं - बजरंग गर्ग
नवरात्रें पर्व हमें शान्ति, संयम, धर्म, त्याग और सचाई के मांर्ग पर चलने की प्ररेणा देता है - बजरंग गर्ग
माता दुर्गा की आराधना से मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है - बजरंग गर्ग
हिसार, 12 10.26- - श्री प्रयाग गिरि शिवालिक मंदिर ट्रस्ट में नवरात्रों के दूसरे दिन शिवालिक मंदिर ट्रस्ट के प्रधान बजरंग गर्ग ने मां दुर्गा के दुसरे स्वरूप मां ब्रहाचारिणी की विधिवात पूजा-अर्चना व माला अर्पण करने के उपरान्त कहा कि नवरात्रे भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का महत्वपूर्ण पर्व हैं। यह पर्व हमें शक्ति, संयम, श्रद्धा, त्याग और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मां दुर्गा की आराधना से मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने का साहस प्राप्त होता है।
बजरंग गर्ग ने कहा कि मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। उनके जीवन से हमें सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए और सच्चाई तथा धर्म के मार्ग पर चलते रहना चाहिए। नवरात्रों का पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, सेवा, सद्भाव और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने का भी संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं समाज को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य करती हैं। ऐसे पावन पर्वों पर हमें आपसी भाईचारे को मजबूत करने, जरूरतमंदों की सहायता करने तथा समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। माता रानी की सच्ची भक्ति तभी सार्थक होती है, जब हम अपने जीवन में अच्छे विचारों और अच्छे कर्मों को अपनाते हैं।
बजरंग गर्ग ने श्रद्धालुओं से अपील की कि नवरात्रों के दौरान धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करें। जरूरतमंदों की सहायता करें, कन्याओं का सम्मान करें और समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने में योगदान दें।
उन्होंने मां दुर्गा से प्रार्थना की कि सभी देशवासियों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली आए, देश में आपसी भाईचारा मजबूत हो तथा हर परिवार पर माता रानी की कृपा बनी रहे। इस कार्यक्रम मे विनोद गोयल, प्रवीन जैन, सुरेन्द्र सिंगला, जगत नारायण, सतेन्द्र गोयल, सुभाष बंसल, नरेश गोयल, जवाहर लाल नागरू, महेश सिंह भाटिया, करूणा देवी सिंगला, रेनू पहूजा आदि भक्तजन भारी संख्या में मौजूद थे।