मिशन दृष्टि के तहत 6 स्कूलों में 225 बच्चों की आंखों की जांच, 29 में दृष्टि संबंधी दोष पाए गए: उपायुक्त
कहा.....बच्चों की नियमित जांच, समय पर उपचार और फॉलोअप पर जोर, ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य
मिशन दृष्टि अभियान को लेकर उपायुक्त राहुल कुमार ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक
बिलासपुर, 11 सितंबर: उपायुक्त राहुल कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा शुरू किये गए ‘मिशन दृष्टि’ के तहत अब तक छह स्कूलों में 3 से 8 वर्ष आयु वर्ग के 225 बच्चों की आंखों की जांच की गई है। जांच के दौरान 29 बच्चों में दृष्टि संबंधी दोष पाए गए हैं, जिनमें 15 बच्चे मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) तथा 14 बच्चे हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) के मामले शामिल हैं। उपायुक्त आज यहां मिशन दृष्टि अभियान को लेकर अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में प्रगति की समीक्षा कर रहे थे।
उपायुक्त ने कहा कि मिशन दृष्टि के तहत किए जा रहे सर्वेक्षण में प्रत्येक बच्चे की जांच का डेटा तैयार किया जा रहा है, ताकि दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान के साथ-साथ उपचार और फॉलोअप की प्रभावी निगरानी की जा सके। दृष्टि संबंधी दोष पाए जाने वाले बच्चों के अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि वे टीम द्वारा दी गई सलाह के अनुसार 15 दिनों के भीतर नजदीकी अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र में जाकर नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें और आवश्यक सुधारात्मक उपाय करवाएं।
राहुल कुमार ने कहा कि अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों तक नियमित स्वास्थ्य एवं नेत्र जांच की सुविधा पहुंचाना है। छोटे बच्चों में आंखों की समस्या होने पर न केवल देखने में परेशानी रहती है बल्कि सिरदर्द रहता है तथा किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। इसके परिणामस्वरूप बच्चे की पढ़ाई, एकाग्रता और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की समय रहते पहचान कर चश्मे अथवा अन्य आवश्यक सुधारात्मक उपाय उपलब्ध करवाने से बच्चों की शिक्षा और दैनिक गतिविधियों में सुधार लाया जा सकता है।
उपायुक्त ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमों को आवश्यक उपकरणों से भी सुसज्जित किया जा रहा है। सीएसआर और डीएमएफटी के सहयोग से टीमों को ऑटो-रिफ्रैक्टोमीटर सहित आवश्यक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं, जिससे बच्चों की प्रारंभिक स्तर पर अधिक प्रभावी जांच की जा सके। उन्होंने कहा कि जिला में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें सभी चार ब्लॉकों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। स्वास्थ्य संबंधी दोषों की पहचान कर आवश्यक फॉलोअप भी सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अभियान को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में अधिक से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग, दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके बाद अभियान के दूसरे चरण को भी जल्द शुरू किया जाएगा, ताकि बच्चों की आंखों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और आवश्यक फॉलोअप की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
‘मिशन दृष्टि’ का उद्देश्य केवल बच्चों में दृष्टि दोष की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर उपचार, नियमित फॉलोअप और सुधारात्मक उपायों के माध्यम से बच्चों की दृष्टि, पढ़ाई और समग्र विकास को बेहतर बनाना है। अभियान के माध्यम से विशेष रूप से सरकारी स्कूलों तथा ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के बच्चों तक नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी स्कूलों में भी मिशन दृष्टि के तहत बच्चों की आंखों की जांच की जाएगी।
बैठक में सीएमओ बिलासपुर शशि दत्त, डीपीओ आईसीडीएस नरेंद्र कुमार, उप निदेशक प्रारंभिक स्कूल शिक्षा अरुण गौतम, नोडल अधिकारी उच्च शिक्षा स्कूल अनिल कुमार, सचिव जिला रेडक्रॉस अमित कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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युवाओं को मानवतावादी सेवा एवं सामुदायिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर
जिला स्तरीय जूनियर रेडक्राॅस एवं यूथ रेडकाॅस समिति की बैठक आयोजित
बिलासपुर, 11 सितंबर: इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी, जिला शाखा बिलासपुर द्वारा जिला स्तरीय जूनियर रेड क्रॉस एवं यूथ रेड क्रॉस समिति की बैठक बचत भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त एवं उपाध्यक्ष इंडियन रेडक्राॅस सोसायटी शाखा बिलासपुर रूपिंदर कौर ने की। बैठक में विभिन्न विभागों, स्कूलों, महाविद्यालयों, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों, रेड क्रॉस के सदस्यों एवं स्वयंसेवकों, जूनियर रेड क्रॉस एवं यूथ रेड क्रॉस समन्वयकों तथा शिक्षक परामर्शदाताओं सहित लगभग 35 सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में नेपाल में हाल ही में आई बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि जूनियर रेड क्रॉस एवं यूथ रेड क्रॉस केवल सदस्यता तक सीमित गतिविधि न रहे, बल्कि युवाओं को सामुदायिक सेवा, मानवीय कार्यों और नेतृत्व के अवसरों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यालय, महाविद्यालय एवं अन्य शैक्षणिक संस्थान में जूनियर रेड क्रॉस एवं यूथ रेड क्रॉस इकाइयों को सक्रिय और व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाए तथा उनके लिए नियमित गतिविधियों की वार्षिक कार्य योजना तैयार की जाए। उन्होंने समिति के सदस्यों से अपने-अपने क्षेत्र में संस्थानों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा अधिक से अधिक युवाओं को रेड क्रॉस की गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि रेडक्रॉस के सदस्य, स्वयंसेवक, सेवानिवृत्त अधिकारी एवं अनुभवी व्यक्ति जूनियर रेड क्रॉस एवं यूथ रेड क्रॉस इकाइयों को अपनाकर उनका मार्गदर्शन करें। उन्होने कहा कि युवाओं को केवल सदस्य बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें सदस्यता से सार्थक सहभागिता की दिशा में आगे बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होने कहा कि आपदा अथवा किसी आपात स्थिति के समय प्रशिक्षित युवा रेड क्रॉस स्वयंसेवक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर से ही युवाओं में मानवीय मूल्यों, अनुशासन, सेवा भावना और आपदा के समय सहायता करने की क्षमता विकसित करना आवश्यक है।
बैठक में युवाओं को केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत प्राथमिक उपचार, आपदा प्रबंधन, रक्तदान, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, पौधरोपण, सामुदायिक सेवा, साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति तथा जरूरतमंद और कमजोर वर्गों की सहायता जैसी गतिविधियों को जूनियर रेड क्रॉस एवं यूथ रेड क्रॉस के नियमित कार्यक्रमों में शामिल करने पर चर्चा हुई।