ऐतिहासिक अग्रोहा टीलें की वैज्ञानिक तरीके से खुदाई होने पर प्राचीन एवं महत्वपूर्ण पुरातात्विक सामग्री मिलने की पूरी संभावना है- बजरंग गर्ग
सरकार द्वारा अग्रोहा टीलें की खुदाई का काम बंद किए जाने से वैश्य समाज में भारी नाराजगी है- बजरंग गर्ग
सरकार को बंद पड़ी खुदाई का काम तुरंत प्रभाव से शुरू करवाकर इसमें तेजी लानी चाहिए- बजरंग गर्ग
महाराजा अग्रसेन जी की नगरी एक समृद्ध और खुशहाल नगरी थी, जहां धन और अन्न के भंडार भरे रहते थे - बजरंग गर्ग
हिसार, 08.09.26- - वैश्य समाज के प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक अग्रोहा धाम वैश्य समाज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग गर्ग की अध्यक्षता में हुई। बैठक में अग्रोहा टीलें की खुदाई का काम बंद होने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वैश्य समाज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा अग्रोहा टीलें की खुदाई का काम बंद किए जाने से वैश्य समाज में भारी नाराजगी है। सरकार को बंद पड़ी खुदाई का काम तुरंत प्रभाव से शुरू करवाकर इसमें तेजी लानी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीलें की खुदाई पहले भी बेहद धीमी गति से चल रही थी। खुदाई करने के बजाय कई बार टीलें की झाड़ियों की कटाई पर ही अधिक ध्यान दिया जाता है। कई महीनों तक खुदाई बंद रहने से दोबारा झाड़ियां उग आती हैं और खुदाई का काम प्रभावित होता है। बजरंग गर्ग ने कहा कि अग्रोहा टीला जो 125 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है उसकी मान्यता है कि यहां महाराजा अग्रसेन जी का भव्य महल और अग्रोहा नगरी हुआ करती थी। इस ऐतिहासिक टीलें की वैज्ञानिक तरीके से खुदाई होने पर प्राचीन एवं महत्वपूर्ण पुरातात्विक सामग्री मिलने की पूरी संभावना है। टीलें के नीचे प्राचीन संरचनाओं और भवनों के अवशेष होने की भी संभावना जताई जाती रही है। उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी की नगरी एक समृद्ध और खुशहाल नगरी थी, जहां धन और अन्न के भंडार भरे रहते थे तथा प्रत्येक व्यक्ति के पास रोजगार और जीवन-यापन के पर्याप्त साधन थे। अग्रोहा का इतिहास वैश्य समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ा हुआ है। बजरंग गर्ग ने कहा कि जिस धीमी गति से अग्रोहा टीलें की खुदाई का काम चल रहा है, उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि खुदाई पूरी होने में कई दशक लग जाएंगे। जबकि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु एवं पर्यटक अग्रोहा धाम और ऐतिहासिक टीलें के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि टीलें की खुदाई के लिए पर्याप्त बजट, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ पुरातत्वविदों की टीम उपलब्ध करवाकर काम को युद्ध स्तर पर पूरा करवाया जाए। उन्होंने कहा कि खुदाई के कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। जो भी सरकारी अधिकारी या संबंधित एजेंसी खुदाई के कार्य में जानबूझकर देरी या लापरवाही बरते, सरकार को उसके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इस अवसर पर बजरंग गर्ग ने आए हुए अतिथियों एवं प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर दीपक गुप्ता पानीपत, नरेंद्र गुप्ता पिलखुआ, अमित गर्ग गंगानगर, महेंद्र टाटीय भटिंडा, संजय मित्तल गुड़गांव, सोनल अग्रवाल दिल्ली, नितिन बंसल सहारनपुर, अरुण अग्रवाल उड़ीसा, रतन अग्रवाल रायगढ़, विनोद गोयल रसोल, सिद्धार्थ गोयल बैंगलोर, रामकुमार अग्रवाल मथुरा, रुद्राक्ष जिंदल जयपुर, सुभाष गोयल वाराणसी, ऋषि राज गर्ग, पवन गर्ग, आनंद गोयल व राजेंद्र बंसल हिसार, महेन्द्र गोयल भूना ब्रह्मानंद गोयल भट्टू, अनिल सर्राफ सिरसा आदि प्रतिनिधि मौजूद थे।