सुजानपुर 31 अगस्त। बेटियां जीवन की निरंतरता और मानव सभ्यता की संवाहक हैं। वे मानवीय मूल्यों और संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। उनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अतः बेटियों को सुरक्षित जीवन और समुचित अवसर प्रदान करना न केवल समाज का नैतिक कर्तव्य है अपितु मानवीय सभ्यता की निरंतरता की आवश्यक शर्त भी है। सोमवार को ग्राम पंचायत सपाहल में जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय हमीरपुर, जिला बाल संरक्षण इकाई हमीरपुर एवं सीडीपीओ सुजानपुर के संयुक्त तत्वाधान में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत महिला एवं बाल अधिकारों पर आयोजित कार्यशाला में लोगों को संबोधित करते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं सीडीपीओ सुजानपुर कुलदीप सिंह चौहान ने कहा कि समान अवसर, समुचित पोषण और सार्थक शिक्षा सुलभ होने की स्थिति में बेटियां किसी भी चुनौती का सामना करने में बेटों से कम नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, रक्षा और उद्यमशीलता जैसे हर क्षेत्र में योगदान देकर देश और समाज की आर्थिक प्रगति में बराबर की भागीदारी निभा रही हैं। हालांकि, दुखद पहलू यह है कि अभी भी कई बार हम बेटियों को समुचित न्याय नहीं दे पाते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जिला में लगभग 110 बच्चों को पारिवारिक पहचान में गोद लिया गया। इनमें से अधिकतर बेटियां थीं जो संभवतः बेटों की चाहत में पैदा हुई थीं और बेटा न होने के चलते उन्हें उन परिवारों ने गोद ले लिया जहां या तो बेटियों की चाहत थी या फिर उनकी कोई संतान नहीं थी। गोद लेने की यह प्रक्रिया अधिकतर हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट के अंतर्गत हुई जो विधि सम्मत है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया में भागीदार रहता है परंतु विभाग गोद लेने की प्रक्रिया को इस कार्य हेतु गठित विशेष केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से संपन्न करने का पक्षधर है ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित और स्वर्णिम बन सके। उन्होंने उपस्थित लोगों से देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से गोद लेने की अपील की। इसके अतिरिक्त उन्होंने स्थानीय समुदाय से बाल विवाह एवं बाल मजदूरी जैसे विषयों पर शून्य सहनशीलता दिखाने की अपील की। उन्होंने लोगों से बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का हिस्सा बनने की अपील भी की। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वीरेंद्र ने महिला एवं बाल अधिकारों पर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जा रही सेवाओं बारे जानकारी दी। मिशन वात्सल्य की ओर से गैर संस्थागत संरक्षण अधिकारी उर्मिला, संस्थागत संरक्षण अधिकारी शशि पाल, मिशन शक्ति से वंदना और ग्राम पंचायत सपाहल की प्रधान सुनीता ने भी अपने विचार रखे।