घुमारवीं (बिलासपुर), 03 जुलाई : नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने आज घुमारवीं में तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभागीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेष रूप से राज्य में स्थापित किए जा रहे कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) सेंटर, स्किल अकादमी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा विभाग की भावी कार्ययोजना की विस्तार से समीक्षा की गई। मंत्री ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य हिमाचल के युवाओं को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में घुमारवीं में स्किल अकादमी स्थापित करने तथा मल्टी स्किल एवं डिजिटल यूनिवर्सिटी विकसित करने की घोषणा की है, जिससे प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक, नवाचार, उद्यमिता, व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में मंत्री राजेश धर्माणी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घुमारवीं में निर्माणाधीन स्किल डेवलपमेंट सेंटर का कार्य हर हाल में 30 जुलाई तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि लगभग 4.50 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा यह अत्याधुनिक केंद्र प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने तथा उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि स्किल डेवलपमेंट सेंटर में भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल मीडिया, भाषा कौशल तथा उद्योगों एवं रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप विभिन्न आधुनिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी तथा उन्हें स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तकनीकी शिक्षा को समय की मांग के अनुरूप आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसे कौशल से सशक्त बनाना है, जिनकी आवश्यकता वर्तमान और भविष्य के उद्योगों में होगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए अधिक उपयोगी, व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख बनाया जाए।
बैठक में विभागीय योजनाओं एवं परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करे।
इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक रोहित राठौर, डिप्टी डायरेक्टर संजीव सहोत्रा, ललित शर्मा, रविंदर बनियाल, ज्वाइंट कंट्रोलर (फाइनेंस) नाग सिंह यादव, ज्वाइंट डायरेक्टर दिनेश शर्मा, हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के जनरल मैनेजर अमित काल्थिक, घुमारवीं आईटीआई के प्रिंसिपल जनक सिंह, अनुदेशक कमल देव, करण सिंह ढटवालिया सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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