मनीमाजरा. 19.04.26- : मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने कल लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (संविधान 131वां संशोधन विधेयक, 2026) के माध्यम से सत्ताधारी पार्टी द्वारा खेले गए 'राजनैतिक खेल' की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा केवल एक चुनावी जुमला बनकर रह गया है।
भारतीय ने कहा कि जब साल 2023 में महिला आरक्षण बिल पहले ही पास हो चुका था, तो सरकार ने इसे वर्तमान 543 सीटों पर तुरंत लागू क्यों नहीं किया?
कल सदन में सरकार ने जानबूझकर आरक्षण को परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने की जटिल प्रक्रिया से जोड़ दिया, ताकि इसे अनिश्चितकाल के लिए टाला जा सके। यह स्पष्ट है कि सरकार हिंदी भाषी क्षेत्रों में सीटें बढ़ाकर राजनैतिक लाभ लेना चाहती है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
सरकार के कार्यकाल में महिलाओं की असुरक्षा पर उठाए सवाल
राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार के महिला हितैषी होने के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस शासनकाल में महिलाओं के साथ हुए जघन्य कांड सरकार की मंशा को उजागर करते हैं। उन्होंने मणिपुर हिंसा, कठुआ, उन्नाव, कांडों, महिला पहलवानों के शोषण व हाथरस कांड की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार को घेरा व कहा कि
महिलाओं को सरेआम निर्वस्त्र कर घुमाया गया और सरकार महीनों तक खामोश रही।
देश का नाम रोशन करने वाली पहलवान बेटियां दिल्ली की सड़कों पर न्याय के लिए गिड़गिड़ाती रहीं, लेकिन आरोपी सत्ता के संरक्षण में सुरक्षित रहे।
न्याय देने के बजाय रात के अंधेरे में पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अपराधियों को बचाने के लिए सत्ता से जुड़े भाजपा के लोगों ने ने रैलियां तक निकालीं।
भारतीय ने कहा कि विपक्षी पार्टियों और देश के बुद्धिजीवियों ने सरकार की इस 'बांटो और राज करो' वाली नीति को समय रहते समझ लिया, जिसके कारण यह जनविरोधी प्रस्ताव गिर गया। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वाकई गंभीर है, तो बिना किसी परिसीमन या जनगणना का बहाना बनाए, वर्तमान सीटों पर ही तत्काल प्रभाव से महिला आरक्षण लागू करे।