चण्डीगढ़, 25.03.26- : श्री राम की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। वे हर वर्ग के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। ये कहना है कथा वाचक आचार्य श्री शिवदत्त बहुगुणा का, जो श्री राम मंदिर-47 में नवरात्रों व श्री राम नवमी के अवसर पर श्री रामचरित मानस कथा का वाचन कर रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि भगवान् राम के जीवन का मूल सिद्धांत ‘धर्म’ है, जो उनके हर कर्म का मार्गदर्शन करता था। हमारे शास्त्रों और संतों के अनुसार, धर्म का अर्थ है अपने भीतर स्थित दिव्यता की खोज करना। एक सच्चे आध्यात्मिक गुरु के मार्गदर्शन में व्यक्ति इस आत्मबोध की यात्रा पर अग्रसर हो सकता है। ‘ब्रह्म ज्ञान’ अर्थात दिव्य ज्ञान का विज्ञान इस मार्ग में एक परिवर्तनकारी साधन है। ब्रह्म ज्ञान पर आधारित ध्यान मन को शांत करता है, विचारों को स्पष्ट करता है, क्रोध को कम करता है और जीवन में संतुलन लाता है—जो सांसारिक सफलता और आध्यात्मिक उन्नति दोनों के लिए आवश्यक हैं।
मंदिर कमेटी के पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष आरके सूद, महासचिव आरडी नारंग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष केके छाबड़ा व अन्य पदाधिकारी अशोक शर्मा, वीके ठाकुर, वीके गुप्ता, प्रदीप शर्मा, आरपी शर्मा, सुरेश कुमार व हुकुम सिंह आदि भी मौजूद रहे।