धर्मशाला, 16 जनवरी : हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने आज कांगड़ा जिला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अनुसूचित जाति से सम्बन्धित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित बस्तियों की आधारभूत समस्याओं, विशेषकर सड़क कनेक्टिविटी, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करना रहा।
अध्यक्ष कुलदीप धीमान ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जिले में ऐसी सभी अनुसूचित जाति बस्तियों की विस्तृत सूची तैयार की जाए, जहां अभी तक सड़क संपर्क उपलब्ध नहीं है, और उसे शीघ्र आयोग को भेजा जाए, ताकि संबंधित योजनाओं के माध्यम से 100 प्रतिशत कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों की दृष्टि से बड़ा जिला है, इसलिए योजनाओं के क्रियान्वयन में विशेष सतर्कता और जिम्मेदारी की आवश्यकता है। सरकार की मंशा है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होता है, जब गरीब, दलित और पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार समय पर मिले।
बैठक में विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों को सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे सैकड़ों विद्यार्थियों को लाभ मिला है। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत अंतर्जातीय विवाह सहायता राशि को 50 हजार से बढ़ाकर दो लाख रुपये किया गया है। वहीं महर्षि वाल्मीकि आवास योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को आवास निर्माण हेतु 3 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट किया कि कई पात्र परिवारों के पास भूमि उनके नाम न होने के कारण वे आवास योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे मामलों में विभागों को समन्वय बनाकर व्यावहारिक समाधान निकालने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, छात्रवृत्ति, लैपटॉप सहायता, उच्च शिक्षा प्रोत्साहन योजनाओं तथा दिव्यांग बच्चों को मिलने वाले लाभों की भी समीक्षा की गई।
अध्यक्ष कुलदीप धीमान ने अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई मामलों में पीड़ितों पर समझौते का दबाव डाला जाता है, जो अत्यंत िंनंदनीय है। उन्होंने पुलिस एवं प्रशासन को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए तथा पीड़ितों को समय पर राहत राशि और न्याय उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि योजनाओं की जानकारी के अभाव में कई गरीब और वंचित लोग लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसके लिए जिला स्तर पर अधिक से अधिक जागरूकता शिविर, कैंप और बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि योजनाओं की जानकारी सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।
बैठक में अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य एडवोकेट विजय डोगरा ने कहा कि सभी सम्बन्धित अधिकारी आयोग की बैठकों में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें और आयोग द्वारा अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की सूची उपलब्ध करवाना भी सुनिश्चित करें ताकि आयोग अनुसूचित जाति को योजनाओं के लाभ मिलने की समीक्षा कर सके। इस अवसर पर आयोग के सदस्य एडवोकेट दिग्विजय मल्होत्रा ने भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन बारे सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये और अधिकारियों का से आह्वान किया कि वे सरकार की योजनाओं को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू करें, ताकि अनुसूचित जाति वर्ग के गरीब और वंचित लोगों को उनका वास्तविक लाभ मिल सके।
इस अवसर पर आयोग के सदस्य सचिव विनय मोदी, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक देहरा मयंक चौधरी, एडीसी विनय कुमार सहित विभिन्न उपमंडलों के एसडीएम, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।