बिलासपुर, 8 जुलाई: नगर एवं ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हड़वाड़ में आयोजित संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वह शिक्षा के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर भी समान रूप से ध्यान दें। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का जिम्मेदार नागरिक, सक्षम नेतृत्वकर्ता और राष्ट्र निर्माता होता है। इसलिए केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं के लिए असीम संभावनाएं उपलब्ध हैं। आवश्यकता केवल सही दिशा में निरंतर प्रयास, स्पष्ट लक्ष्य, सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की है। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल और सोशल मीडिया का रचनात्मक एवं सकारात्मक उपयोग करने की सलाह देते हुए कहा कि यदि इनका सही उद्देश्य के साथ प्रयोग किया जाए तो ये ज्ञान अर्जित करने, नई तकनीकों को सीखने और स्वयं को निरंतर बेहतर बनाने के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
राजेश धर्माणी ने विद्यार्थियों से एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों, विज्ञान प्रदर्शनी, वाद-विवाद, समूह चर्चा तथा अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करती हैं, जो उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता दिलाने में सहायक होती हैं।
उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर मेहनत, अनुशासन, धैर्य, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास ही व्यक्ति को उसके लक्ष्य तक पहुंचाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से असफलताओं से घबराने के बजाय उन्हें सीख के रूप में स्वीकार कर और अधिक दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।
राजेश धर्माणी ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक, तकनीक आधारित और रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए ऐतिहासिक सुधार लागू कर रही है। सरकारी विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा मानकों के अनुरूप एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अपनाते हुए सीबीएसई पैटर्न लागू किया गया है तथा विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा अनिवार्य की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित युवा तैयार करना है जो भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकें।
उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नई राज्य नवाचार नीति को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत लगभग 2 करोड़ रुपए के विशेष फंड का प्रावधान किया गया है, जिससे विद्यार्थियों और युवाओं के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया जा रहा है तथा नवाचार आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा तथा शिक्षा साथी मोबाइल ऐप के माध्यम से विद्यालयों की नियमित डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। वहीं समर्थ योजना के अंतर्गत शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल लर्निंग और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।
राजेश धर्माणी ने कहा कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों का परिणाम है कि हिमाचल प्रदेश का विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों में शामिल है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के माध्यम से युवाओं को आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल प्रदान कर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसरों के लिए तैयार किया जा रहा है।
मंत्री ने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही सफलता का आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित योग, व्यायाम, खेलकूद और संतुलित जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि तनाव से दूर रहकर सकारात्मक ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। जीवन अनमोल है और प्रत्येक कार्य पूरी निष्ठा, ईमानदारी और शत-प्रतिशत समर्पण के साथ किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है।
संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने करियर निर्माण, लक्ष्य निर्धारण, व्यक्तित्व विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, तकनीकी शिक्षा, सफलता के सूत्र तथा स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। राजेश धर्माणी ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का विस्तार पूर्वक समाधान करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन, सकारात्मक सोच, निरंतर सीखने की आदत, आत्मविश्वास तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने की प्रेरणा दी।