चण्डीगढ़08.07.26- : शहर में लोगों को भोजन के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाने के उद्देश्य से सुखना झील पर "मीट योर मीट" नामक जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का आयोजन निम्मी बामनेरिया ने प्रोजेक्ट पोलिनेशन के सहयोग से किया, जिसमें लोगों को मांस के पीछे छिपे एक जीवित प्राणी के जीवन और संवेदनाओं पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया।
अभियान के दौरान "चंपू" नामक एक बचाए गए बकरे को लोगों के बीच लाया गया। उसके साथ लगाए गए जानकारीपूर्ण पोस्टरों के माध्यम से बताया गया कि हर वर्ष लाखों बकरों का मांस के लिए वध किया जाता है। आमजन ने चंपू के साथ समय बिताया और उसके माध्यम से यह समझने का प्रयास किया कि भोजन के रूप में परोसा जाने वाला मटन भी कभी एक जीवित और संवेदनशील प्राणी था।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य किसी के व्यक्तिगत खान-पान या भोजन संबंधी निर्णयों की आलोचना करना नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता, संवेदनशीलता और करुणा का भाव विकसित करना है। उनका कहना था कि अधिकांश लोगों को उन जानवरों से मिलने का अवसर नहीं मिलता, जिनका मांस बाद में भोजन के रूप में उनकी थाली तक पहुंचता है। ऐसे में यह पहल लोगों को उन जानवरों के जीवन को करीब से समझने का अवसर प्रदान करती है।
अभियान की आयोजक निम्मी बामनेरिया ने कहा कि जब लोग चंपू जैसे किसी बकरे के साथ समय बिताते हैं, तो वे उसे केवल एक उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवित और भावनाओं वाले प्राणी के रूप में देखने लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित करना है कि उनकी थाली में परोसा गया मटन भी एक ऐसे जानवर से आता है जो जीना चाहता था। उनका मानना है कि जागरूकता बढ़ने से लोग अपने भोजन संबंधी निर्णय अधिक संवेदनशीलता और समझदारी के साथ ले सकेंगे।
आयोजकों के अनुसार, "मीट योर मीट" अभियान का मुख्य उद्देश्य शांतिपूर्ण जन-संवाद के माध्यम से भोजन, करुणा और फार्म में पाले जाने वाले जानवरों के जीवन को लेकर सार्थक चर्चा शुरू करना तथा समाज में संवेदनशील सोच को बढ़ावा देना है।