फरवरी 23 को सभी पात्र बच्चों को दी जाएगी कृमिनाशक दवा : उपायुक्त मुकेश रेपसवाल
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित
5 वर्ष तक के बच्चों को दी जाएगी विटामिन-ए की खुराक
चम्बा, 19 फरवरी-उपायुक्त मुकेश रेपसवाल की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस एवं विटामिन-ए के संबंध में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर 23 फरवरी को 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से उनके बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार के लिए कृमि नाशक दवा दी जाएगी, जबकि 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को इस अभियान के तहत कवर किया जाए।
उपायुक्त ने बताया कि बच्चों के पेट में कीड़े होने के कई कारण हो सकते हैं जिसमें दूषित जल स्रोतों से पानी पीना, मिट्टी में खेलना और बिना हाथ धोए भोजन करना आदि शामिल है। इस संक्रमण से एनीमिया, कुपोषण तथा बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इसलिए राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. जालम सिंह भारद्वाज ने बताया कि विटामिन-ए की खुराक 5 वर्ष तक के बच्चों को आंखों की बीमारियों से बचाव के लिए दी जाती है, जबकि अल्बेंडाजोल की खुराक 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को दी जाती है। उन्होंने बताया कि जो बच्चे 23 फरवरी को दवा की खुराक नहीं ले पाएंगे, वे माप-अप डे 28 फरवरी को दवा ले सकते हैं।
बैठक में जिला विकास अधिकारी देवेंद्र चिनोरिया, जिला पंचायत अधिकारी तिलक कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य डॉ कर्ण हितैषी, एमऑएच डॉ कविता महाजन व ओएसडी उमाकांत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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जिले में 23 हजार किसान 4812 हेक्टेयर भूमि पर कर रहे हैं प्राकृतिक खेती:- उपायुक्त मुकेश रेपसवाल
किसानों की आय व उत्पाद में वृद्धि हो मुख्य लक्ष्य : उपायुक्त
चम्बा, 19 फरवरी-उपायुक्त मुकेश रेपसवाल कि अध्यक्षता में आज राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष में अतमा परियोजना (एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों और 2026-27 के प्रस्तावित बजट को लेकर समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।
उपायुक्त ने वर्ष 2025-26 के दौरान आतमा परियोजना के तहत जिले में किए गए कार्यों की समीक्षा की तथा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुमानित बजट मांग पर अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष में कुल 1 करोड़ 46 लाख रुपये के आवंटित बजट में से अब तक 1 करोड़ 10 लाख रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 1 करोड़ 80 लाख रुपये की मांग प्रस्तुत की गई है।
उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र समर्थित आतमा (एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी) व राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन तथा राज्य सरकार समर्थित राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत जिला भर में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों एवं बागवानों को जागरूकता शिविरों, कार्यशालाओं द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा है। उपायुक्त ने बताया कि आतमा परियोजना के माध्यम से किसानों को राज्य के भीतर तथा अंतरराज्यीय स्तर पर प्राकृतिक खेती क्षेत्रों के अनुभव आधारित भ्रमण (एक्सपोजर विजिट) भी करवाए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले में लगभग 23 हजार कृषक-बागवान 4812 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने इस दौरान संबंधित विभागीय अधिकारियों को जिले में प्राकृतिक खेती को और अधिक बढ़ावा देने तथा किसानों को इसके प्रति व्यापक रूप से जागरूक करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कृषि, उद्यान, पशुपालन, कृषि विज्ञान केंद्र तथा मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को आतमा परियोजना के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि विभिन्न विभागीय योजनाओं का लाभ एक ही मंच से किसानों तक पहुंचाया जा सके और सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित हों। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पंचायत में 8 से 10 प्रगतिशील किसानों को तैयार करने के लक्ष्य के अनुरूप योजनाबद्ध तरीके से कार्य सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्राकृतिक खेती को जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से बढ़ावा दिया जा सके। उपायुक्त ने कहा कि जिला चम्बा में कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। सही दिशा और मार्गदर्शन प्रदान कर जिले के किसानों एवं बागवानों को खुशहाल और समृद्ध बनाया जा सकता है।
बैठक में उप निदेशक आतमा डॉ. नितिन कुमार, कृषि डॉ. भूपेंद्र सिंह, उद्यान डॉ. प्रमोद शाह, पशुपालन डॉ. राकेश भंगालिया, मत्स्य पालन डॉ. जय सिंह , उप निदेशक आतमा परियोजना डॉ. शिवानी राणा उपस्थित रहे।
उपमंडल सलूणी के गांव डियूर में सेब रोग प्रबंधन पर जागरूकता शिविर आयोजित
चम्बा(सलूणी), 19 फरवरी -कृषि विज्ञान केंद्र चम्बा और उद्यान विभाग के संयुक्त तत्वावधान से उपमंडल सलूणी के गांव डियूर में सेब फसल के रोग प्रबंधन को लेकर जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर का उद्देश्य बागवानों को सेब की फसल में लगने वाले रोगों की पहचान और उनके सही उपचार की जानकारी देना था।
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. जया चौधरी ने बताया कि इस अभियान के तहत बागवानों को सेब की फसल के उचित प्रबंधन के बारे में जागरूक किया जा रहा है। शिविर में अल्टरनेरिया और मार्सोनिना लीफ ब्लॉच जैसे रोगों की रोकथाम की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर सही दवाइयों का उपयोग और निर्धारित स्प्रे शेड्यूल का पालन करने से फसल को रोगों से बचाया जा सकता है और उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। बागवानों को दवाइयों के संतुलित प्रयोग, छिड़काव की सही विधि और समय के बारे में भी जानकारी दी गई।
शिविर में विशेषज्ञों के द्वारा मृदा स्वास्थ्य के महत्व पर भी जोर दिया गया और मिट्टी परीक्षण व संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित स्प्रे शेड्यूल अपनाने को कहा।
शिविर में बागवानी विकास अधिकारी डॉ. मंथन जरयाल और उद्यान प्रसार अधिकारी जोगिंदर भी उपस्थित रहे।