सोलन के यश ठाकुर और विकास खाम की पेंटिंग प्रथम
मंडी, 19 फरवरी। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर मेला कमेटी और जिला प्रशासन मंडी द्वारा नगर निगम मंडी के सहयोग से छोटी काशी मंडी में पहली बार आयोजित मंडी आर्ट फेस्टिवल के तहत वॉल पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। दो दिनों तक चली इस प्रतियोगिता में कलाकारों ने इंदिरा मार्केट और उपायुक्त कार्यालय मार्ग के समीप सार्वजनिक दीवारों पर मंडी की संस्कृति, देव परंपरा और इतिहास को दर्शाते आकर्षक भित्ति चित्र तैयार किए।
महोत्सव की तीसरी सांस्कृतिक संध्या के दौरान उपायुक्त अपूर्व देवगन और मेयर नगर निगम वीरेंद्र भट्ट ने विजेता टीमों को नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया। प्रतियोगिता में सोलन के यश ठाकुर और विकास खाम की टीम को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। द्वितीय स्थान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की वृष्टि गिस्ट और अश्वनी राणा की टीम को मिला, जबकि तृतीय स्थान मंडी की रिद्धि सुयाल और गौरव शर्मा की टीम ने हासिल किया। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली अन्य सभी टीमों को सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
निर्णायक मंडल में प्रवीण रावत और राजेश कुमार शामिल थे, जिन्होंने कलात्मक अभिव्यक्ति, विषय प्रस्तुति, रंग संयोजन, रचनात्मकता और स्थानीय सांस्कृतिक तत्वों के प्रभावी प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन किया।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि शिवरात्रि महोत्सव में पहली बार दृश्य कला को शामिल करना एक सराहनीय पहल है, जिससे शहर की सौंदर्य वृद्धि के साथ युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला है।
इस अवसर पर आयुक्त नगर निगम रोहित राठौर, सहायक आयुक्त विजय कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं पार्षद उपस्थित रहे।
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**अंतराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला 2026 में प्राकृतिक खेती स्टाल बना जन जागरूकता का केंद्र **
*रसायनरहित ‘हिमभोग’ आटा बिक्री के लिए उपलब्ध*
मंडी, 19 फ़रवरी 2026-धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक मंडी अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला में इस वर्ष कृषि जागरूकता का विशेष आयाम भी जुड़ गया है। कृषि विभाग की एटीएमए (ATMA) परियोजना की ओर से पड्डल मैदान स्थित प्रदर्शनी पंडाल में प्राकृतिक खेती को समर्पित एक विशेष स्टॉल लगाया गया है, जिसका शुभारंभ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वारा किया गया। यह स्टॉल मेले के दौरान एक सप्ताह तक आमजन के लिए खुला रहेगा।
स्टॉल पर प्राकृतिक खेती की विधि, उसके लाभ और इसे अपनाने की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
कृषि विभाग के अधिकारी एवं विशेषज्ञ आगंतुकों को रसायनमुक्त खेती के महत्व से अवगत करा रहे हैं और उन्हें इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
इस स्टॉल का मुख्य आकर्षण प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की और गेहूं का ‘हिमभोग’ ब्रांड का रसायनरहित, पोषणयुक्त आटा है, जिसे पहली बार मेले में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। मेले में आने वाले श्रद्धालु एवं पर्यटक इसकी जानकारी लेने के साथ-साथ इसे खरीदकर स्वस्थ जीवनशैली की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
स्टॉल पर प्राकृतिक खेती में प्रयोग होने वाले जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत तथा अन्य पारंपरिक घटकों की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत किसानों को मिल रहे लाभों एवं प्रोत्साहनों के बारे में भी विस्तार से बताया जा रहा है।
जिला परियोजना निदेशक, एटीएमए, डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पादों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि समाज में प्राकृतिक खेती के प्रति व्यापक जनजागरूकता उत्पन्न करना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित अन्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मेले में उमड़ रही भारी भीड़ के बीच यह स्टॉल स्वास्थ्य, पर्यावरण और टिकाऊ कृषि का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित कर रहा है। लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई।
आस्था और संस्कृति के इस महापर्व के साथ प्राकृतिक खेती का यह संदेश कृषि नवाचार और जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूक समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।==================
आज वाद्ययंत्र व देवलु नाटी प्रतियोगिता का प्रथम चरण सम्पन्न
16 वाद्ययंत्र एवं 5 देवलु नाटी दल दूसरे दौर के लिए चयनित, कल होगा फाइनल मुकाबला
मंडी, 19 फरवरी-मंडी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत देवधुन/वाद्ययंत्र एवं देवलु नाटी प्रतियोगिताओं का प्रथम चरण आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। छोटी काशी के नाम से विख्यात मंडी में आयोजित इन प्रतियोगिताओं में देव समाज और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आस्था का वातावरण देखने को मिला।
प्रतियोगिता के लिए बीते दिवस से लेकर आज तक कुल 108 देवताओं के बजंत्रियों ने वाद्ययंत्र प्रतियोगिता हेतु पंजीकरण करवाया, जबकि देवलु नाटी प्रतियोगिता के लिए 18 देवताओं के देवलु दलों ने अपना नाम दर्ज कराया। प्रथम चरण में 83 दलों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से अपनी कला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिनमें से 16 वाद्ययंत्र दल दूसरे दौर के लिए चयनित हुए। वहीं देवलु नाटी प्रतियोगिता में 7 देवताओं के देवलु दलों ने भाग लेकर पारंपरिक नाटी की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें से 5 दलों को अगले चरण के लिए चुना गया।
पारंपरिक नगाड़ों, करनाल, रणसिंघा एवं अन्य वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बन गया। देवधुन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
प्रतियोगिता के लिए गठित निर्णायक मंडल में मुरारी शर्मा, कृष्णा देवी और उमेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर सर्व देवता समिति के महासचिव दिनेश शर्मा सहित देव समाज से जुड़े गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
महोत्सव के अंतर्गत कल 16 वाद्ययंत्र एवं 5 देवलु नाटी दलों के बीच दूसरे दौर का फाइनल मुकाबला आयोजित होगा। फाइनल विजेताओं को प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही छोटी काशी की समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा।