CHANDIGARH,09.01.21-प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित तीसरी वैबबैठक में भाई भगता सिंह द्वारा गुरमत संगीत का शब्द गायन किया गया । इन्होंने गुरमत संगीत की पुरातन मर्यादा अनुसार मधुर शब्द गायन से संगत को निहाल कर दिया । इस कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों जैसे सरदार हरजीत सिंह,प्रेसीडेंट सरब अकाल म्यूज़िक सोसायटी,कैलगरी,केनैडा,सरदार चरणजीत सिंह वालिया चैरयमैन,नवाब जस्सा सिंह आहलूवालिया चैरीटेबल ट्स्ट ने शिरकत की । कार्यक्रम का संचालन प्राचीन कला केन्द्र के गुरमत संगीत विभाग के प्रमुख श्री मलकीत सिंह जडियाला जी ने किया । इस अवसर पर केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर भी उपस्थित थे । कार्यक्रम का आयोजन प्राचीन कला केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में किया गया तथा इस कार्यक्रम के दौरान मास्क और सैनेटाईजेशन जैसे नियमों का पालन भी किया गया ।

आज के कलाकार भाई भगता सिंह एक युवा एवं प्रतिभाशाली कलाकार हैं । जिन्होंने बचपन से ही संगीत सीखना शुरू किया तथा आज अपनी मधुर गायकी से संगीत में अपनी जगह बनाई तथा अपनी बखूबी प्रस्तुतियों से दर्शकों को निहाल कर रहे हैं । देश ही नहीं विदेशों में भी गुरमत संगीत का उत्कृष्ट प्रदर्शन करके भाई भगता सिंह युवा कीर्तनकार की श्रेणी में आ चुके हैं। आज के कार्यक्रम में सबसे पहले इन्होंने राग कान्हड़ा में निबद्ध एक शब्द ‘‘कीरत प्रभ की गाओ मेरी रसना’’ पेश किया । इसके उपरांत राग देस में निर्धारित शब्द ‘‘आवो सजना हओ देखां दरसन तेरा राम’’ प्रस्तुत किया ।

कार्यक्रम के अंत में इन्होंने शब्द ‘‘श्री हरिकृष्ण ध्याइए जिस डिठेे सब दुखः जाए ’’ से किया । जिसका दर्शकों ने खूब आनंद लिया । इनके साथ संगत कलाकारों में भाई सुखमन सिंह,भाई गुरअमृत सिंह तथा भाई आंेकार सिंह ने बखूबी संगत की ।

कार्यक्रम में केन्द्र की रजिस्ट्ार डाॅ.शोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर भी उपस्थित थे । कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को पुष्प देकर सम्मानित किया गया ।