BILASPUR,14.01.22-उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए सस्ता व एक समान न्याय उपलब्ध है जिसका लोगों को लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गरीब, असहाय, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोग, पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग तथा ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपए से कम हो ऐसे सभी लोगो को विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंनेे कहा कि कोई भी व्यक्ति कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण न्याय से वंचित ना रहे इस लिए प्राधिकरण द्वारा निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करता हैं। उन्होंने बताया कि निशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति उपमंडल न्यायालय या जिला न्यायालय स्तर पर प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि निःशुल्क कानूनी सहायता में सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध करवाना, पात्र व्यक्ति को वकीलों के पैनल में से वकील चुनने की सुविधा देना, न्याय शुल्क सहित टाईपिंग और याचिकाओं तथा दस्तावेजों को तैयार करने में होने वाल खर्च उठाना जैसी सुविधाएं निशुल्क शामिल हैं।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस तरह के विधिक शिविरों का उद्देश्य आम जनता को प्रचलित कानूनों की जानकारी प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जब भी हम सभी कोई अपराध या गुनाह करते हैं तो हम यह नहीं कह सकते कि हमें कानून की जानकारी नहीं थी और हमें माफ कर दिया जाए, अज्ञानतावश किये गए अपराध की सजा भी भुगतनी पड़ती है,इसलिए हमें हर प्रकार के कानून की जानकारी होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से कानूनी सलाह, परामर्श, सहायता लेने हेतु पत्र, फैक्स, ई-मेल के माध्यम से भी संपर्क कर सकते हैं इसके अतिरिक्त किसी भी कार्य दिवस के दौरान सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक फोन नंबर 01978-221452 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि हमें अधिकारों के साथ साथ अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए, आज देश स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत बड़ी चुनौती कोविड़-19 महामारी से जूझ रहा है हमें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए देश समाज व परिवार की सुरक्षा को देखते हुए कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए हमेशा मास्क लगाएं, साबुन से हाथ धोने व समाजिक दूरी के नियम की अनुपालना करें।
इस अवसर पर अधिवक्ता अनिल शर्मा ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन के दुर्घटना होने के पश्चात मुआवजा प्राप्त करने हेतु पात्रता, प्रक्रिया, समय-सीमा के अतिरिक्त नशा निवारण तथा अधिवक्ता स्वतंत्र कुमार ने घरेलू हिंसा अधिनियम 2002 तथा वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण अधिकार 2007 के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर स्थानीय पंचायत प्रधान रेणु कुमारी ने मुख्यातिथि का स्वागत किया।