सफलता की कहानी-प्राकृतिक खेती से समृद्ध हो रहे बिलासपुर के किसान, एमएसपी निर्धारण से फसलों को मिल रहे हैं बेहतर दाम
बिलासपुर के करोट निवासी किसान प्रेम ठाकुर और उनके भाई प्राकृतिक खेती से मजबूत कर रहे आर्थिकी

प्राकृतिक फसलों का एमएसपी निर्धारित करने के लिए किसानों ने प्रदेश सरकार का जताया आभार
बिलासपुर, 13 सितंबर: जिला बिलासपुर के करोट गांव निवासी प्रेम ठाकुर और उनके अन्य तीन भाई श्याम लाल ठाकुर, मस्तराम ठाकुर तथा छोटा राम प्राकृतिक खेती के माध्यम से विभिन्न फसलों का उत्पादन कर, आर्थिकी को सुदृढ़ कर रहे हैं। यह परिवार न केवल पारंपरिक फसलों गेहूं, मक्की और धान का उत्पादन प्राकृतिक खेती के माध्यम से कर रहा है, बल्कि हल्दी, जिमीकंद जैसी नकदी फसलों का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहे हैं। इस परिवार द्वारा तैयार प्राकृतिक फसलों की चमक केवल प्रदेश तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक अलग पहचान स्थापित की है।
इसी परिवार के श्याम लाल ठाकुर को जहां प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर द्वारा वर्ष 2003 में कृषि दूत सम्मान से पुरस्कृत किया जा चुका है, तो वहीं वर्ष 2009 में जिमीकंद की खेती के लिए राष्ट्रीय अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है। यह परिवार वर्ष 1998 से जिमीकंद की खेती कर रहा है तथा प्रतिवर्ष लाखों रुपये का जिमीकंद प्रदेश तथा प्रदेश के बाहर भेजते हैं। यही नहीं, जिला बिलासपुर के प्रसिद्ध नलवाड़ी मेला में इस परिवार की बैलों की जोड़ी को कई वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाता रहा है।
जब 65 वर्षीय किसान प्रेम ठाकुर से बातचीत की तो उनका कहना है कि पिछले लगभग तीन-चार वर्षों से वह प्राकृतिक तौर पर हल्दी की खेती पर फोकस कर रहे हैं। इस वर्ष लगभग 20 क्विंटल प्राकृतिक हल्दी तैयार की है, जिनमें से 6 क्विंटल हल्दी जिला आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से 90 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा है। शेष हल्दी भी आसपास के लोगों द्वारा इसी दाम पर खरीदी है तथा हल्दी से ही लगभग 2 लाख रुपये तक का कारोबार किया है। वह प्रतिवर्ष औसतन 20 से 25 क्विंटल हल्दी की पैदावार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वह काली हल्दी का भी उत्पादन कर रहे हैं तथा इस वर्ष लगभग डेढ़ क्विंटल काली हल्दी तैयार की है, जिसका उन्हें प्रति किलोग्राम 300 रुपये तक का दाम मिला है। उनका कहना है कि औषधीय गुणों के कारण काली हल्दी की अच्छी मांग है। वह अब मेघालय की प्रसिद्ध लकाडोंग हल्दी की ओर भी बढ़ रहें, जिसमें अन्य हल्दी के मुकाबले करक्यूमिन की मात्रा काफी अधिक है।
प्रेम ठाकुर कहते हैं कि उनका परिवार 3 बीघा भूमि में जिमीकंद की खेती भी कर रहा है। प्रतिवर्ष औसतन 50-60 क्विंटल जिमीकंद उत्पादित कर रहे हैं तथा प्रदेश के बाहर 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अच्छे दाम प्राप्त हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त धान, मक्की, सोयाबीन, दालें इत्यादि भी प्राकृतिक तौर पर उत्पादित कर रहे हैं तथा विभिन्न फसलों का बीज भी तैयार करते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती पर आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रशिक्षण भी प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त उन्हें महाराष्ट्र में सात दिवसीय एक्सपोजर विजिट का भी अवसर मिला है।
उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने से न केवल हल्दी के अच्छे दाम प्राप्त हो रहे हैं, बल्कि आर्थिकी को भी बल मिला है। हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रति किलोग्राम 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये करने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का भी आभार व्यक्त करते हैं। कहते हैं कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने किसानों के हित में कदम उठाते हुए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित किया है, जिससे प्रदेश के हजारों किसान परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सर्वांगीण विकास और कृषकों के आर्थिक स्वावलंबन को दिशा देते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्राकृतिक तौर पर उत्पादित गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को 60 रूपये से बढ़ाकर 80 रूपये, मक्का के एमएसपी को 40 रूपये से बढ़ाकर 50 रूपये तथा कच्ची हल्दी के मूल्य को 90 रूपये से बढ़ाकर 150 रूपये प्रति किलोग्राम किया है। इसकेे अतिरिक्त प्रदेश में पहली बार अदरक के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य 30 रूपये प्रति किलोग्राम तय किया है।
प्रदेश सरकार के इस दूरदर्शी निर्णय से न केवल प्रदेश के हजारों अन्नदाताओं को आजीविका सुरक्षा और लाभकारी मूल्य मिल रहा है, बल्कि आम जनमानस के लिए रसायन रहित, गुणवत्तापूर्ण एवं पोषण युक्त खाद्यान्न की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी:

उपनिदेशक कृषि कुलभूषण धीमान का कहना है कि जिला में आत्मा परियोजना के माध्यम से इस वर्ष प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों से 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 136 किसानों से लगभग 183 क्विंटल गेहूं की खरीद की है। इसी प्रकार मक्की की खरीद 60 रुपये तथा हल्दी की खरीद 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जाएगी।

उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि प्राकृतिक तौर पर उत्पादित फसलों का दाम सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर्गत किसानों को प्राप्त हो। जिससे न केवल किसानों को फसलों का उचित मूल्य प्राप्त होगा, बल्कि आर्थिकी को भी सुदृढ़ किया जा सके और लोगों को रसायनरहित व पोषणयुक्त खाद्यान्न उपलब्ध हो।