DHARAMSHALA,17.03.26-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केन्द्र मोहली, धर्मशाला में 'आपदा प्रबंधन में समसामयिक मुद्दे तथा चुनौतियाँ’ विषय पर दो दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन दिनांक 17 मार्च 2026 को विदाई कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष ज्योति प्रज्ज्वलन के साथ किया गयाI संगोष्ठी कक्ष में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय कुलगीत का श्रवण कियाI विदाई कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो. बाल कृष्ण शिवराम, अधिष्ठाता अध्ययन, हि. प्र. विश्वविद्यालय शिमला मुख्यातिथि तथा मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. नैनजीत सिंह नेगी, निदेशक, ‘आपदा प्रबंधन तथा जोखिम न्यूनीकरण हिमालयी शोधकेंद्र’ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथि के रूप में तिब्बत समाज से डॉ. लोबसंग येंग्सो, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने उपस्थिति दर्ज की। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक प्रो. कुलदीप अत्री ने मुख्यातिथि महोदय, मुख्य वक्ता, सभी वरिष्ठ विद्वतजनों, अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों का स्वागत कियाI निदेशक महोदय ने विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया I संगोष्ठी के सह-संयोजक डॉ. राजकुमार ने आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत कीI
मुख्य वक्ता प्रो. नैनजीत सिंह नेगी ने पिछले वर्षों में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई प्राकृतिक आपदा से सम्बंधित महत्वपूर्ण बिंदु सांझा किएI निदेशक महोदय ने विश्वविद्यालय में स्थापित शोध केंद्र के माध्यम से प्रस्तावित शोध योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए इससे निपटने हेतु सामाजिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बतायाI
कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि डॉ. लोबसंग येंग्सो ने विशेष रूप से तिब्बत में घट रही आपदा सम्बन्धी घटनाओं के विभिन्न कारणों को डिजिटल प्रस्तुतिकरण के माध्यम से चित्रित कियाI तिब्बती समाज द्वारा इस क्षेत्र में किए जा रहे विशेष कार्यों की जानकारी सांझा करते हुए उनकी प्रशंसा भी कीI
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यातिथि प्रो. बाल कृष्ण शिवराम, अधिष्ठाता अध्ययन ने क्षेत्रीय केंद्र द्वारा सफलतापूर्वक आयोजित इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए निदेशक तथा व्यवस्था में लगी सारी टीम को बधाई देते हुए मुख्य विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किएI महोदय ने कहा कि आपदा नई समस्या नहीं बल्कि यह सम्पूर्ण हिमालय क्षेत्र की एक अत्यधिक गंभीर समस्या हैI हम विकासशील देश में रहते हैं और अगर आपदा से सम्बंधित विकसित देशों के साथ तुलना करें तो वह उचित नहीं, क्योंकि उन देशों में इस विषय पर पर्याप्त शोधकार्य किए जा चुके हैंI उन्होंने विशेष जोर देकर कहा कि इलाज से परहेज अच्छा होता हैI वर्तमान समय में विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में विकास पर ध्यान दिया जा रहा है लेकिन इसके लिए पहाड़ों में सड़क निर्माण, सुरंग निर्माण तथा विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण कार्य जोरों पर है, जिसके लिए पहाड़ों का अत्यधिक कटान भी आपदा का प्रमुख कारण हैI उन्होंने इस क्षेत्र में स्थापित विभिन्न सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थाओं के आपसी तालमेल की कमी को भी मुख्य समस्या मानाI उन्होंने कहा कि हिमाचल एक पहाड़ी तथा ग्रामीण क्षेत्र है, जहाँ पर अभी भी सड़कों की कमी हैI उन्होंने इस केंद्र में अगले सत्रों ने नए पाठ्यक्रम शुरू करने की बात करते हुए अपनी वाणी को विराम दियाI मुख्यातिथि महोदय ने सभी प्रतिभागियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों को सहभागिता के प्रमाणपत्र भेंट इस सम्मानित भी किया
उन्होंने हि. प्र. विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र में सभी विभागों तथा परिसर का दौरा करते हुए विकास की दृष्टि से विभिन्न संभावनाओं की चर्चा भी कीI
इससे पूर्व संगोष्ठी के पहले दिन उद्घाटन के दौरान मुख्यातिथि प्रो. महावीर सिंह, कुलपति, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने क्षेत्रीय केंद्र को विकसित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराईI विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र धर्मशाला में उनका यह तीसरा दौरा थाI महोदय ने कहा कि क्षेत्रीय केंद्र का अपना बड़ा परिसर है जिसमें विकास की अत्यधिक संभावनाएं हैंI उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इस क्षेत्र में शोधपरक कार्यों के विकास हेतु इसे अंतिम रूप दिया जाएगा तथा केंद्र के विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया जाएगाI उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय केंद्र केवल विश्वविद्यालय का एकमात्र अंग नहीं है बल्कि अपने आप में एक विश्वविद्यालय है, इसके विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं आएगीI
धन्यवाद प्रस्ताव डॉ. राजकुमार कुमार ने प्रस्तुत कियाI उन्होंने मुख्यातिथि महोदय तथा मुख्या वक्ता द्वारा प्रभावशाली तथा प्रेरणादायक उद्बोधन के लिए धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त कियाI इसी के साथ-साथ सभागार में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों के लिए भी धन्यवाद ज्ञापित कियाI उन्होंने कड़ी मेहनत तथा लगन से कार्यकर इस संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए सभी समितियों का भी आभार व्यक्त करते हुए अपनी बात समाप्त की|
इस अवसर पर अतिथियों, प्रतिभागियों, शोधार्थियों के अतिरिक्त लगभग 160 विद्यार्थियों ने भाग लिया I