*पारिश्रमिक आधार पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार व पटवारी के रिक्त पदों के लिए पुनः आवेदन मांगे*
*मंडी, 17 मार्च।* मंडी जिला में उपायुक्त कार्यालय के तहत पारिश्रमिक आधार पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी के खाली पदों पर फिर से भर्ती के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह आवेदन सभी आवश्यक दस्तावेजों एवं प्रमाण पत्रों के साथ 28 मार्च, 2026 को सायं 05:00 बजे तक उपायुक्त, मंडी के कार्यालय में पहुंच जाने चाहिए। अंतिम तिथि के बाद मिले या अधूरे पाए गए आवेदन बिना कोई और जानकारी दिए अस्वीकृत कर दिए जाएंगे।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि पारिश्रमिक (री-एंगेजमेंट) आधार पर जिला में तहसीलदार का एक पद, नायब तहसीलदार के 6 पद तथा पटवारी के 117 पद भरे जाने हैं। इसके लिए आवश्यक योग्यता निर्धारित की गई है, जिसके तहत सेवानिवृत्त होने से पहले आवेदक द्वारा हिमाचल प्रदेश के राजस्व विभाग के किसी भी विंग में कम से कम पांच साल की सेवाएं दी हों और उनके खिलाफ कोई विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित न हो। इस बारे में संबंधित सेवानिवृत्त व्यक्ति को अपने विभाग से एक प्रमाण पत्र लेना होगा और आवेदन के साथ जमा करना होगा। साथ ही आवेदक को राजकीय अस्पताल से चिकित्सा प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा। आवेदन के लिए आयु सीमा विज्ञापन तिथि (01-01-2026) को 65 साल से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। आवेदन के साथ दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा।
उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त तहसीलदारों के लिए 70 हजार रुपए प्रति माह, सेवानिवृत्त नायब तहसीलदारों के लिए 60 हजार रुपए प्रतिमाह और सेवानिवृत्त पटवारियों के लिए 40 हजार रुपए प्रतिमाह पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है। मंडी जिले में किसी भी खाली पद पर इन्हें तैनात किया जा सकता है। हालांकि किसी भी तहसीलदार/नायब तहसीलदार को उनके गृह उपमंडल में और पटवारियों को गृह/आस-पास के पटवार वृत्त में तैनात नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि री-एंगेजमेंट के लिए आवेदन पत्र मंडी जिले की आधिकारिक वेबसाइट http://hpmandi.nic.in से डाउनलोड किया जा सकता है। सेवानिवृत्त अधिकारियों को पहली बार में तीन महीने के लिए री-एंगेज किया जाएगा। सेवाओं में प्रदर्शन और ज़रूरत के हिसाब से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। री-एंगेजमेंट की अवधि उनके रिटायरमेंट से पहले दी गई सर्विस में किसी भी बेनिफिट के लिए नहीं गिनी जाएगी।
ऐसे सेवानिवृत्त लोगों की सेवाएं पूरी तरह से अस्थायी होंगी और री-एंगेजमेंट अवधि के दौरान कभी भी खत्म की जा सकती हैं। इन्हें एक महीने की सेवाएं पूरी करने के बाद एक दिन का आकस्मिक अवकाश देय होगा तथा किसी भी तरह का अन्य अवकाश देय नहीं होगा। नियंत्रण अधिकारी की मंज़ूरी के बिना ड्यूटी से बिना इजाज़त गैरहाज़िर रहने पर, बिना कोई नोटिस दिए, वह एंगेजमेंट अपने आप खत्म हो जाएगा। ड्यूटी से गैरहाज़िर रहने के समय के लिए उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिलेगा।
उन्होंने बताया कि आवश्यकतानुसार अपनी अधिकारिक सेवा के सिलसिले में यात्रा पर जाने के लिए इन्हें टीए-डीए मिलेगा, जो समकक्ष नियमित अधिकारियों को मिनिमम पे स्केल पर लागू रेट पर मिलेगा। महीने का मेहनताना परफॉर्मेंस/वर्क कंडक्ट सर्टिफिकेट के आधार पर दिया जाएगा, जिसमें उसके द्वारा निपटाए गए केस की डिटेल्स भी शामिल होंगी। यह सर्टिफिकेट संबंधित नियंत्रण प्राधिकारी द्वारा महीने के आखिर में जारी किया जाएगा। राजस्व केस के लंबित मामलों के निपटान के बाद, इनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।
उन्होंने बताया कि री-एंगेजमेंट के कारण मौजूदा पटवारियों/कानूनगो की पदोन्नति पर कोई असर नहीं पड़ेगा और उनके द्वारा भरे गए पद पदोन्नति के लिए खाली माने जाएंगे। नियमित अधिकारियों के मिलने पर री-एंगेजमेंट खत्म किया जा सकता है।
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*उपायुक्त ने की वन संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रस्तावों की समीक्षा*
*• एफसीए मामलों के शीघ्र निष्पादन पर दिया बल*
*• अभी तक 30 प्रस्तावों को मिल चुकी है अंतिम स्वीकृति – अपूर्व देवगन*
*मंडी, 17 मार्च।* वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के अंतर्गत लंबित प्रस्तावों की समीक्षा के लिए उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में आज यहां एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले की विभिन्न विकास परियोजनाओं से संबंधित एफसीए मामलों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई तथा उनके शीघ्र निष्पादन के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी से बचने के लिए एफसीए प्रस्तावों का समयबद्ध निपटारा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 17 मार्च, 2023 से अब तक जिले के विभिन्न विभागों के कुल 30 प्रस्तावों को अंतिम स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें से एक प्रस्ताव को फरवरी माह में तथा दो प्रस्तावों को मार्च माह में स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिनमें सलापड़-तत्तापानी सड़क, प्रस्तावित करसोग न्यायालय परिसर तथा पधर न्यायालय परिसर शामिल हैं।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रत्येक लंबित प्रस्ताव के लिए स्पष्ट टाइमलाइन निर्धारित की जाए और निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी बल देते हुए कहा कि वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित सभी औपचारिकताएं प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण की जाएं।
बैठक के दौरान कुल 131 एफसीए प्रस्तावों पर बिंदुवार चर्चा की गई। इनमें न्यायपालिका से संबंधित 8 मामले, परिवेश 1.0 पोर्टल के 38 प्रस्ताव तथा परिवेश 2.0 पोर्टल के 68 प्रस्ताव शामिल हैं। ये सभी प्रस्ताव न्यायिक परिसरों, सड़कों, भवनों एवं जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित हैं।
इसके अतिरिक्त, 25 ऐसे प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई, जिन्हें विगत पांच से दस वर्षों के दौरान स्टेज-1 के तहत सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, किंतु वे अभी तक स्टेज-2 (अंतिम) स्वीकृति के लिए लंबित हैं।
बैठक में जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव विवेक कायस्थ, डीएफओ (मुख्यालय) बसु डोगरा, डीएफओ जोगिंद्रनगर अश्वनी कुमार सहित लोक निर्माण, जल शक्ति तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा डीएफओ सुकेत राकेश कटोच, डीएफओ करसोग के.बी. नेगी, डीएफओ एस.एस. कश्यप वर्चुअल माध्यम से जुड़े।