ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा में डीसी सख्त, समयबद्ध लक्ष्य पूरे करने के निर्देश
ऊना में 13,456 बीपीएल परिवार चिह्नित, मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना में 11,491 परिवारों की सीडिंग
ऊना, 14 अक्तूबर. ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली, समय की पाबंदी और प्रस्तुतिकरण की गुणवत्ता पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने योजनाओं की प्रगति से जुड़े आंकड़ों में स्पष्टता और समीक्षा बैठकों के लिए पूरी तैयारी के साथ आने के कड़े निर्देश दिए। निर्धारित समय में बैठक आयोजित करने और तथ्यों के आधार पर योजनाओं की प्रगति का आकलन करने को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
उपायुक्त ने खंड विकास अधिकारियों को ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति से संबंधित अद्यतन आंकड़ों और स्पष्ट विश्लेषण के साथ अगली समीक्षा बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं की समीक्षा के लिए जल्द ही दोबारा बैठक आयोजित की जाएगी।
*13,456 बीपीएल परिवार चिह्नित
ऊना जिले में बीपीएल परिवारों की पहचान के लिए निर्धारित 14,767 के लक्ष्य के मुकाबले नौ चरणों में अब तक 13,456 परिवार चिह्नित किए जा चुके हैं। उपायुक्त ने शेष लक्ष्य को समयबद्ध पूरा करने के निर्देश दिए। बीपीएल सर्वे का नौवां चरण पूरा हो चुका है और जिले के पांचों विकास खंडों में बीपीएल परिवारों के साथ संवाद की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
*मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार में 11,491 परिवारों की सीडिंग
मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत 11,531 के लक्ष्य के मुकाबले 11,491 परिवारों की सीडिंग की जा चुकी है। वहीं, बैंक खाता सीडिंग के लिए निर्धारित 11,916 के लक्ष्य के मुकाबले 11,531 परिवारों की सीडिंग पूरी की गई है।
*मांग के अनुरूप उपलब्ध करवाएं रोजगार के कार्य
वीबी-जी राम जी परियोजना के तहत रोजगार के कार्यों को जरूरत के अनुरूप उपलब्ध करवाने पर जोर दिया गया। उपायुक्त ने अतिरिक्त उपायुक्त को विभिन्न क्षेत्रों में काम की मांग और वास्तविक जरूरत का आकलन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां अधिक आवश्यकता है, वहां उसी के अनुरूप कार्य उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए मांग के स्वरूप और उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर विस्तृत आकलन प्रस्तुत करने को कहा।
*कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी पर जोर
बैठक में बताया गया कि श्रमिकों की ई-केवाईसी 96.66 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, जबकि कुशल और अर्द्धकुशल श्रमिकों की ई-केवाईसी की प्रक्रिया जारी है। उपायुक्त ने बीडीओ को ग्राम रोजगार सेवकों के माध्यम से इस कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो श्रमिक स्वयं ई-केवाईसी करवाने नहीं पहुंच रहे हैं, ऐसे सक्रिय श्रमिकों की पहचान कर उनकी ई-केवाईसी करवाने के प्रयास किए जाएं।
*स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश
स्वच्छ भारत मिशन के तहत चल रहे कार्यों के साथ कम्युनिटी मैनेज्ड सैनिटरी कॉम्प्लेक्स के निर्माण, सुधार और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने इन कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त इशांत जसवाल, परियोजना अधिकारी रमनवीर चौहान, जिला पंचायत अधिकारी श्रवण कुमार, सभी विकास खंडों के खंड विकास अधिकारी और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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ऊना में गांधी शिल्प बाजार सजा, देशभर के कारीगरों के हस्तनिर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र
पुराने बस अड्डा परिसर में 18 अक्तूबर तक चलेगा बाजार, उपायुक्त जतिन लाल ने किया शुभारंभ
ऊना, 14 अक्तूबर. देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक हस्तशिल्प कला और हस्तनिर्मित उत्पादों की झलक अब ऊना में देखने को मिल रही है। शहर के पुराने बस अड्डा परिसर में गांधी शिल्प बाजार सज गया है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कारीगर अपनी पारंपरिक कलाओं और हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ पहुंचे हैं। उपायुक्त जतिन लाल ने मंगलवार शाम बाजार का शुभारंभ किया। यह बाजार 18 अक्तूबर तक चलेगा।
शुभारंभ के बाद उपायुक्त ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और कारीगरों से संवाद कर उनके उत्पादों तथा उन्हें तैयार करने की पारंपरिक विधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कारीगरों की कला और हुनर की सराहना करते हुए हस्तशिल्प की कुछ वस्तुओं की खरीदारी भी की।
*देश के विभिन्न राज्यों की कला एक ही मंच पर
गांधी शिल्प बाजार में बनारस, जम्मू-कश्मीर के उधमपुर व बसोहली, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, झारखंड और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के कारीगर अपने उत्पाद लेकर पहुंचे हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, शिमला, चंबा, मंडी, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, ऊना, बंगाणा और गगरेट सहित अन्य क्षेत्रों की पारंपरिक हस्तशिल्प कला भी यहां देखने को मिल रही है। विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट कारीगरी और हस्तनिर्मित वस्तुएं बाजार को विविधता प्रदान कर रही हैं।
*कारीगरों को बिक्री का अवसर, लोगों को पारंपरिक कला से जुड़ने का मंच
गांधी शिल्प बाजार कारीगरों को अपने हस्तनिर्मित उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए मंच उपलब्ध करवाता है। इसके माध्यम से उन्हें अपनी कला को अधिक लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। वहीं, स्थानीय लोग देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक कलाओं और हस्तनिर्मित वस्तुओं को करीब से देखने और खरीदने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। बाजार का उद्देश्य हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना भी है।