सरकार द्वारा धान व बाजरे की सरकारी खरीद ना करने से आढ़ती व किसानों में बड़ा भारी रोष है- बजरंग गर्ग

सरकार द्वारा धान व बाजरे की खरीद ना करने से धान 561 रुपए व बाजरा 1000 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी से कम भाव में बिक रही है- बजरंग गर्ग

सरकार की गलत नीतियों से देश व प्रदेश का किसान व आढ़ती बर्बाद हो रहा है- बजरंग गर्ग

सरकार को अपने वायदे के अनुसार धान व बाजरे की सरकारी खरीद तुरंत प्रभाव से करनी चाहिए- बजरंग गर्ग

सरकार किसानों की फसल की खरीद करने की बजाय किसानों से पोर्टल-पोर्टल खेल रही है- बजरंग गर्ग

हिसार, 21.09.26- - हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष व हरियाणा कान्फैड के पूर्व चेयरमैन बजरंग गर्ग ने अपने अनाज मंडी के दौरे के दौरान धान खरीद का जायजा लेने के उपरांत कहा कि सरकार द्वारा धान व बाजरे की सरकारी खरीद ना करने से आढ़ती व किसानों में बड़ा भारी रोष है जबकि धान का एमएसपी 2561 रुपए प्रति क्विंटल है और धान खुले बाजार में 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। इसी प्रकार बाजरा का एमएसपी 2975 रुपए प्रति क्विंटल है मगर बाजार खुले बाजार में 1800 से लेकर 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। सरकार द्वारा धान व बाजरे की खरीद ना करने से धान 561 रुपए व बाजरा 1000 रुपए प्रति क्विंटल एमएसपी से कम भाव में बिक रहा है। सरकार की गलत नीतियों से देश व प्रदेश का किसान व आढ़ती बर्बाद हो रहा है जबकि किसान देश का अन्न दाता है और आढ़ती देश की रीड की हड्डी है। बजरंग गर्ग ने कहा की सरकार को अपने वायदे के अनुसार धान व बाजरा की सरकारी खरीद तुरंत प्रभाव से करनी चाहिए। मुख्यमंत्री हरियाणा में 24 फैसले एमएसपी पर खरीदने की झूठी घोषणा बार-बार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री जी को पता होना चाहिए कि हरियाणा में 24 फसलों की पैदावार तक नहीं होती है। हरियाणा में जो भी फसल की पैदावार हो उसकी सरकारी खरीद एमएसपी पर सरकार को करनी चाहिए। बजरंग गर्ग ने कहा कि सरकार किसानों की फसल की खरीद करने की बजाय पोर्टल-पोर्टल खेल रही है जबकि सरकार का पोर्टल काम करता तक नहीं है। पहले किसान अपनी फसल मंडियों में ऑफलाइन खुले बाजार में बेचता था जिससे किसानों को अच्छे भाव मिलते थे और किसान को अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों में इंतजार नहीं करना पड़ता था। जब से सरकार ने फसल ऑनलाइन खरीद करने का नियम बनाया है तब से किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए कई-कई दिनों तक मंडियों में धक्के खाने पड़ते हैं। जिससे किसान व आढ़तियों को बड़ी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जो उचित नहीं है।

इस अवसर पर पवन गर्ग, सुरेंद्र मित्तल, जगदीश गोदारा, संजय नागपाल, श्याम सुंदर बंसल, निरंजन गर्ग आदि प्रतिनिधि ने अपने विचार रखें।