ऊना, 19 सितंबर. हरोली उपमंडल के अमराली में सड़क किनारे खड़ा यह विशाल जल टैंक दूर से ही नजर आ जाता है। लंबे पिलरों पर टिका इसका कंटेनर जमीन से 111 फीट 6 इंच ऊपर है। इसकी असामान्य ऊंचाई ने स्थानीय लोगों को इसे एक नाम देने का मौका दिया-‘बीत का बुर्ज खलीफा’।
ग्राम पंचायत छेत्रां के पूर्व प्रधान विकास राणा टावर की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ' उपमुख्यमंत्री मुकेश जी ने पाणी दी कोई कमी नी छड्डी। हुण इस टावर नू ही देख लो... असां तां इन्हूं अपना ‘बुर्ज खलीफा’ केंदे आं।'
नाम इसकी ऊंचाई से जुड़ा है, लेकिन इस ढांचे की असली कहानी इसके भीतर समाने वाले 25 लाख लीटर पानी की है। करीब 12.59 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह जल भंडारण टैंक बीत क्षेत्र के 11 गांवों की करीब 27,215 आबादी की जलापूर्ति व्यवस्था को सहारा देगा।
*111 फीट 6 इंच की ऊंचाई
अमराली के इस टावर की कुल ऊंचाई करीब 34 मीटर यानी 111 फीट 6 इंच है। इसमें करीब 25 मीटर यानी 82 फीट की स्टेजिंग और करीब 9 मीटर यानी 29 फीट 6 इंच ऊंचा कंटेनर शामिल है।
टैंक को इतनी ऊंचाई इसलिए दी गई है, ताकि पानी को ऊंचाई पर संग्रहित कर जरूरत के अनुसार नीचे के गांवों तक पहुंचाया जा सके। ट्यूबवेल स्रोतों से मिलने वाला पानी इसमें संग्रहित किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में आपूर्ति की जाएगी।
एक साथ 25 लाख लीटर पानी के भंडारण की क्षमता होने से जरूरत के समय जलापूर्ति व्यवस्था को अतिरिक्त सहारा मिलेगा। हरोली क्षेत्र में यह अकेला बड़ा जल भंडारण ढांचा नहीं है। पोलियां में 50 लाख लीटर और दुलैहड़ में 25 लाख लीटर क्षमता के टैंक भी बनाए गए हैं। इसके अलावा क्षेत्र में अलग-अलग क्षमता के करीब 75 टैंक बनाए जा चुके हैं।
*पानी का स्रोत हो तो भंडारण भी जरूरी
गांवों में पानी की जरूरत हर समय एक जैसी नहीं रहती। आबादी बढ़ती है, घर बढ़ते हैं और गर्मियों में मांग भी बढ़ जाती है। ऐसे में स्रोतों के साथ पर्याप्त भंडारण क्षमता होना भी जरूरी है।
अमराली का यह टैंक इसी जरूरत को पूरा करेगा। ट्यूबवेल से मिलने वाले पानी को एक जगह बड़े भंडार के रूप में रखा जा सकेगा और आवश्यकता के अनुसार आगे आपूर्ति की जा सकेगी। यानी पानी उपलब्ध होने के साथ उसे जरूरत के समय इस्तेमाल करने के लिए संभालकर रखने की क्षमता भी बढ़ेगी।
जल शक्ति विभाग हरोली के अधिशासी अभियंता पुनीत शर्मा के अनुसार, परियोजना से बीत क्षेत्र के 11 गांवों की करीब 27,215 आबादी लाभान्वित होगी। ट्यूबवेल स्रोतों से पानी लेकर उसे टैंक में संग्रहित किया जाएगा और जरूरत के अनुसार आपूर्ति की जाएगी।
*पानी घरों के लिए भी, खेतों के लिए भी
हरोली का बीत क्षेत्र लंबे समय तक पानी की चुनौती से जूझता रहा है। घरों के लिए पेयजल और खेतों के लिए सिंचाई, दोनों जरूरतें यहां की ग्रामीण जिंदगी से सीधे जुड़ी रही हैं। लेकिन अब क्षेत्र में तस्वीर बदल चुकी है।
हरोली के विधायक एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के प्रयासों से क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर योजनाबद्ध तरीके से काम हुआ है और इसके प्रभाव भी जमीन पर दिखाई दे रहे हैं। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ बीत क्षेत्र नकदी फसलों की खेती के एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरा है। वहीं, गांवों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के लिए भी योजनाओं का विस्तार हुआ है।
अमराली का यह टैंक इसी बदलती तस्वीर का दिखाई देने वाला हिस्सा है। सड़क से गुजरते हर व्यक्ति को इसकी ऊंचाई नजर आती है, लेकिन इसका वास्तविक महत्व उन गांवों में महसूस होगा, जहां इसकी जल भंडारण क्षमता जलापूर्ति व्यवस्था को सहारा देगी।
ऊपर 25 लाख लीटर पानी और नीचे 11 गांव। इन दोनों के बीच खड़ा यह टावर बीत की बदलती तस्वीर का एक दिखाई देने वाला प्रतीक है। अमराली के लोगों ने इसे ‘बुर्ज खलीफा’ कहा है। आने वाले समय में इसकी पहचान भौतिक ऊंचाई के साथ साथ बीत के भरोसे की ऊंचाई से भी होगी, जब जल जरूरतों को यह टैंक मजबूत आधार देगा।