बिलासपुर, 09 सितंबर: हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जापान के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ सहयोग की नई संभावनाएं तलाश रहा है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक एवं तकनीकी अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें वैश्विक ज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार से जोड़ना है। हिमाचल प्रदेश सरकार की पहल पर राज्य के इंजीनियरिंग काॅलेजों के 44 मेधावी विद्यार्थी 6 से 12 सितंबर तक जापान के अंतरराष्टीय शैक्षणिक भ्रमण पर हैं।

इसी बीच तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी का दौरा किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के साथ शैक्षणिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान तथा विद्यार्थियों के लिए एक्सपोजर कार्यक्रमों की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल में विधायक सतपाल सिंह सत्ती, राकेश जम्वाल तथा सुदर्शन सिंह बबलू, प्रधान सचिव (तकनीकी शिक्षा) अभिषेक जैन, बीओजी सदस्य रामानंद शर्मा सहित तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल रहे।
दौरे का एक महत्वपूर्ण पक्ष हिमाचल प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों की टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक सहभागिता रहा। विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में भाग लिया और जापान की उन्नत शिक्षा व्यवस्था, अनुसंधान, नवाचार तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के संबंध में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की। इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव से विद्यार्थियों को वैश्विक शैक्षणिक एवं तकनीकी वातावरण को समझने तथा अपने ज्ञान और कौशल का विस्तार करने में सहायता मिलेगी।
*मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा......अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से सहयोग युवाओं के लिए खोलेगा नए अवसर
इस मौके पर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ संपर्क हिमाचल प्रदेश के युवाओं को तेजी से बदलते वैश्विक तकनीकी परिदृश्य के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सार्थक सहयोग के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं व्यावसायिक विकास के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध करवाए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच उन्नत प्रौद्योगिकी, सतत कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, उन्नत सामग्री, अनुसंधान एवं कौशल विकास सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट भौगोलिक एवं पारिस्थितिक परिस्थितियों को देखते हुए सतत प्रौद्योगिकी और नवाचार का विशेष महत्व है।

राजेश धर्माणी ने कहा कि प्रदेश की हिमालयी पारिस्थितिकी, कृषि एवं बागवानी, वन संपदा तथा जल संसाधनों को ध्यान में रखते हुए ऐसी तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है, जो विकास की गति को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि भारत की युवा एवं प्रतिभाशाली मानव शक्ति तथा जापान की तकनीकी विशेषज्ञता एवं अनुसंधान क्षमता का समन्वय भविष्य में व्यापक अवसर पैदा कर सकता है। इसके लिए विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, उद्योगों, विद्यार्थियों तथा दोनों देशों की सरकारों के बीच मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करना आवश्यक है।

*भारत-जापान साझेदारी तकनीक और सतत विकास के नए युग की आधारशिला बनेगी: राजेश धर्माणी
प्रतिनिधि मंडल ने होक्काइडो यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लिया भाग


इस बीच प्रतिनिधिमंडल ने साप्पोरो स्थित होक्काइडो यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांस टेक्नॉलॉजी फाॅर सस्टेनेबल फूड, हेल्थ एंड मैटेरियल्स (आईसीएटीएस एंड एफएचएम-2026) में भी भाग लिया। सम्मेलन में विभिन्न देशों से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच उन्नत प्रौद्योगिकी, सतत कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, उन्नत सामग्री, अनुसंधान तथा कौशल विकास के क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक एवं पारिस्थितिक विशिष्टताओं के कारण सतत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार प्रदेश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कृषि एवं बागवानी, जल संसाधन, वन संपदा तथा हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़े क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक एवं अनुसंधान का उपयोग कर टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं तकनीकी संपर्कों से हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा, आधुनिक तकनीकों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। साथ ही, इससे प्रदेश में तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ करने तथा विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास के नए अवसर सृजित करने में भी मदद मिलेगी।

राजेश धर्माणी ने हिमाचल प्रदेश और होक्काइडो के बीच समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों क्षेत्र पर्वतीय भूगोल, ठंडी जलवायु, प्राकृतिक सुंदरता, कृषि और प्रकृति के साथ गहरे संबंध के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह समानता दोनों क्षेत्रों के बीच अनुभवों और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान के नए अवसर प्रदान कर सकती है।
उन्होंने युवा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भारत-जापान सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, फैकल्टी सहयोग तथा विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री धर्माणी ने होक्काइडो विश्वविद्यालय के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार की दीर्घकालीन शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि (आईसीएटीएस एंड एफएचएम-2026) सम्मेलन भारत और जापान के बीच नई साझेदारियों, संयुक्त शोध परियोजनाओं और दीर्घकालीन सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-जापान सहयोग को और मजबूत करने से तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास को नई गति मिलेगी तथा इसका लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा।