(फीचर)मछुआरा सम्मान निधि योजना, ऑफ सीजन में भी अब नहीं सताएगी रोज़ी-रोटी की चिंता
प्रदेश सरकार की पहल से राज्य के हजारों मछुआरा परिवारों को मिला आर्थिक संबल
बिलासपुर जिला के 1,500 मछुआरा परिवारों को मिली लगभग 53 लाख की आर्थिक मदद
प्रदेश में पहली बार यह योजना लागू करने पर लाभार्थी मछुआरों ने जताया सीएम का आभार
बिलासपुर 28 अगस्त: हिमाचल प्रदेश में जलाशयों पर आश्रित हजारों मछुआरा परिवारों के लिए प्रतिवर्ष 15 जून से 15 अगस्त तक मत्स्य आखेट प्रतिबंधित (ऑफ सीजन) समय लंबे समय से आर्थिक संकट का दौर माना जाता रहा है। इस अवधि में मछलियों के संरक्षण और प्रजनन को ध्यान में रखते हुए मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। ऐसे में जिन परिवारों की आजीविका पूरी तरह मत्स्य पालन पर निर्भर होती है, उनके सामने दो माह तक आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं बचता है। प्रदेश के हजारों मछुआरा परिवारों की इसी पीड़ा को समझते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मछुआरा सम्मान निधि योजना की शुरुआत कर आर्थिक सहारा प्रदान किया है।
इस योजना के अंतर्गत ऑफ सीजन के दौरान प्रत्येक पात्र मछुआरा परिवार को 3,500 रुपये की सम्मान राहत राशि प्रदान की जा रही है। यह सहायता राशि ऐसे समय में परिवारों की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक बन रही है, जब मछली पकड़ने पर प्रतिबंध होने के कारण उनकी आय पूरी तरह प्रभावित रहती है।
प्रदेश सरकार की इस पहल का लाभ पूरे हिमाचल प्रदेश में हजारों मछुआरा परिवारों को मिला है। अकेले जिला बिलासपुर के 1,500 मछुआरा परिवारों को योजना के तहत 52 लाख रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध करवाई गई है। जिला में गोविंद सागर झील सहित अन्य जलाशयों पर निर्भर मछुआरा समुदाय के लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है।
मछुआरा सम्मान निधि योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मछुआरों के श्रम और योगदान के सम्मान का भी प्रतीक बन रही है। पहली बार ऑफ सीजन के दौरान प्रदेश सरकार से सीधे आर्थिक सहायता मिलने से मछुआरा समुदाय स्वयं को सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर पा रहा है।
झंडूता विकास खंड के दाड़ी-भाड़ी मत्स्य सोसायटी के विक्रेता गुरदास का कहना है कि वह पिछले 40 से 45 वर्षों से मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मछुआरों के हित में पहली बार एक ऐसी योजना लागू की है, जिसने ऑफ सीजन के दौरान परिवार की रोजी रोटी की चिंता काफी हद तक कम कर दी है। साथ ही रॉयल्टी की दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया है। वह मछुआरों के हित में ऐतिहासिक कदम मानते हुए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हैं।
इसी प्रकार स्वारघाट विकास खंड के अंतर्गत ज्योर मत्स्य सोसायटी से जुड़े चेत राम कहते हैं कि वह वर्ष 1978 से गोविंद सागर झील से मछली पकड़ने का कार्य कर रहे हैं तथा इसी से ही उन्होंने परिवार का भरण-पोषण किया है। उन्होंने रॉयल्टी दर को घटाकर एक प्रतिशत करने तथा 35 सौ रूपये की मछुआरा सम्मान निधि प्रदान करने के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि यह मांग पिछले कई वर्षों से लंबित थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे लागू कर मछुआरा परिवारों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
यही नहीं बलघाड़ मछुआरा सोसायटी के सदस्य देश राज तथा बाबू राम राणा का भी कहना है कि यह निर्णय गरीब मछुआरा परिवारों के लिए राहत लेकर आया है। दो माह के प्रतिबंधित सीजन में आय पूरी तरह बंद हो जाती है, ऐसे समय में 3,500 रुपये की सहायता राशि परिवार के भरण-पोषण के लिए महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि यह सहायता केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि कठिन समय में सरकार की संवेदनशील सोच का परिचायक है।
सदर विकास खंड बिलासपुर के गांव क्यारियां निवासी कृष्ण लाल भी इस योजना को हिमाचल प्रदेश के इतिहास में मछुआरों के हित में उठाया गया एक सराहनीय कदम बताते हैं। उनका कहना है कि पहली बार सरकार ने प्रतिबंधित सीजन में मछुआरा परिवारों की आय के नुकसान की भरपाई के लिए सम्मान निधि का प्रावधान किया है, जिससे हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
प्रदेश में मत्स्य पालन केवल रोजगार का माध्यम नहीं है, बल्कि जलाशय क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। ऑफ सीजन में आर्थिक सहायता मिलने से मछुआरे परिवार कर्ज लेने या वैकल्पिक अस्थायी रोजगार की मजबूरी से काफी हद तक बच सकेंगे। इससे उनके जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी।
प्रदेश सरकार लगातार किसानों, बागवानों, पशुपालकों और मछुआरों सहित ग्रामीण समुदायों की आजीविका मजबूत करने की दिशा में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। मछुआरा सम्मान निधि योजना तथा रॉयल्टी दर में भारी कटौती भी इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है।
*क्या कहते हैं मंत्री:
नगर व ग्राम नियोजन, आवास तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी का कहना है कि मछली पकड़ने पर प्रतिबंध पर्यावरण संरक्षण और मत्स्य संसाधनों के संवर्धन के लिए आवश्यक है, लेकिन इस दौरान प्रभावित परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार की मछुआरा सम्मान निधि योजना इसी संतुलन का सफल उदाहरण बनकर सामने आई है। इससे एक ओर मत्स्य संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिला है, तो वहीं दूसरी ओर मछुआरा परिवारों की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है। प्रदेश सरकार की मछुआरा सम्मान निधि योजना तथा रॉयल्टी दर में कटौती प्रदेश के मत्स्य समुदाय के लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ सम्मान और विश्वास की नई पहचान बनी है।