ऊना 19 जुलाई. उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि बीत क्षेत्र में सन 1949 में स्थापित ऐतिहासिक ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ टाहलीवाल जलापूर्ति योजना को ‘वाटर सप्लाई हेरिटेज म्यूजियम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। योजना के ऐतिहासिक पंप हाउस, उसमें स्थापित विंटेज पम्पिंग मशीनरी, तकनीकी अभिलेखों तथा जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी धरोहर का पुनर्संरक्षण कर संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने शनिवार को योजना का निरीक्षण करने के उपरांत जल शक्ति विभाग को आवश्यक निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पंप हाउस में आज भी उस समय की विशाल विंटेज पम्पिंग मशीनें, फ्लाई-व्हील संचालित उपकरण तथा मूल संरचना सुरक्षित है, जो तत्कालीन अभियंत्रिकी कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है। इन सभी ऐतिहासिक धरोहरों को यथावत संरक्षित किया जाएगा। साथ ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध पुरानी एवं ऐतिहासिक जलापूर्ति मशीनरी को भी यहां लाकर प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि प्रदेश में पेयजल व्यवस्था के विकास की ऐतिहासिक यात्रा को एक स्थान पर संजोया जा सके।
1949 में हुआ था योजना का उद्घाटन
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक योजना का उद्घाटन 6 दिसंबर 1949 को तत्कालीन पूर्वी पंजाब के राज्यपाल सर चंदूलाल एम. त्रिवेदी ने किया था। उस समय योजना का नाम ‘लाजपत राय वाटर वर्क्स’ रखा गया था। इसका निर्माण तत्कालीन लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा कराया गया था तथा इसमें स्थापित मशीनरी विशेष रूप से इंग्लैंड से मंगवाई गई थी।
31 गांवों की 20 हजार आबादी के लिए बनाई गई थी योजना
उन्होंने बताया कि यह योजना उस समय बीत क्षेत्र के 31 गांवों की लगभग 20 हजार आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई थी। इसमें 156 हॉर्स पावर के दो रसटन डीजल इंजन स्थापित किए गए थे, जिनके माध्यम से वर्ष 1974 तक पेयजल की आपूर्ति होती रही। बाद में बिजली से संचालित आधुनिक पम्पिंग व्यवस्था शुरू हुई, जबकि ऐतिहासिक पंप हाउस और उस समय की मशीनरी आज भी सुरक्षित है।
आजादी के बाद की तकनीकी विरासत का जीवंत उदाहरण
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आजादी के समय की परिस्थितियों का अंदाजा इस योजना से लगाया जा सकता है। सीमित संसाधनों में तैयार की गई यह परियोजना उस दौर की तकनीकी दक्षता और दूरदर्शिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में आधुनिक पेयजल योजनाएं कार्य कर रही हैं, लेकिन यह ऐतिहासिक योजना दशकों तक बीत क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा बनी रही और प्रदेश में जलापूर्ति व्यवस्था की मजबूत नींव रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
नई पीढ़ी को मिलेगा इतिहास से जुड़ने का अवसर
मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हेरिटेज म्यूजियम के रूप में विकसित होने के बाद यह परिसर विद्यार्थियों, अभियंताओं, शोधकर्ताओं और आम लोगों के लिए ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां ऐतिहासिक पंप हाउस, विंटेज मशीनरी, तकनीकी अभिलेखों तथा प्रदेश में जलापूर्ति व्यवस्था के विकास से जुड़े दस्तावेजों को संरक्षित कर प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियां प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियंत्रिकी के इतिहास और उस दौर के अभियंताओं एवं अधिकारियों के योगदान को निकट से जान सकेंगी।