नीलोखेड़ी, 22.05.26- : वी बी जीरामजी के अंतर्गत श्रमिकों को उनकी क्षमता एवं कार्यकुशलता के अनुरूप कार्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़े और योजनाओं का प्रभाव भी अधिक दिखाई दे। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे आज एक माह से संचालित सामाजिक अंकेक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जनसुनवाई कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण के दौरान पांच गांवों का अध्ययन किया गया है, जो व्यापक स्तर पर योजना के क्रियान्वयन का एक प्रतिनिधि नमूना है। अध्ययन के दौरान प्राप्त निष्कर्षों से सीख लेते हुए जिन कार्यों या गतिविधियों को पूर्व में मनरेगा के अंतर्गत पूर्ण रूप से नहीं किया जा सका, उन्हें अब वीबी जीरामजी के नए स्वरूप में और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण तथा परिणामोन्मुख तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए निरंतर निगरानी, जनभागीदारी और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिल सके।उन्होंने कहा कि जनसुनवाई लोगों को अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करती है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार और सुशासन को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग ग्रामीण विकास एवं समाजहित के कार्यों में करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान से सहायक आचार्य एवं कोर्स कॉर्डिनेटर वजीर सिंह, संस्थान के सहायक आचार्य सुशील मेहता एवं कमलदीप सांगवान, बीडीपीओ शाहाबाद कृष्ण कुमार, ग्राम पंचायत गुढ़ा के सरपंच सुरजीत सिंह, रामनिवास, जेई मनरेगा कुरुक्षेत्र, ग्राम सचिव खेड़ी शिशग्रान रिया, एबीपीओ लाडवा संजय, कनिष्ठ अभियंता नरेंद्र कुमार, पीओ मनरेगा मनोज कुमार, पंचायत समिति सदस्य सुमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।