चंडीगढ़ | 19 अप्रैल, 2026-भारतीय जनता पार्टी, चंडीगढ़ प्रदेश कार्यालय सेक्टर-33 कमलम में आज ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ एवं भारतीय जनता पार्टी हरियाणा की वरिष्ठ नेत्री किरण चौधरी ने संबोधित किया।
इस अवसर पर मंच पर प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा, महिला मोर्चा अध्यक्ष हीरा नेगी, प्रदेश उपाध्यक्ष इंदिरा सिंह, प्रदेश सचिव मीनाक्षी ठाकुर, सोनिया दुग्गल, डिप्टी मेयर सुमन शर्मा एवं जिला अध्यक्ष रेखा सूद प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “लोकतंत्र में जिम्मेदार व्यवहार अपेक्षित होता है, लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे ऐतिहासिक विधेयक पर विपक्ष ने गंभीर चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी की।” उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश की महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है, लेकिन कांग्रेस एवं अन्य दलों ने परिवारवाद और राजनीतिक स्वार्थ के कारण इसका विरोध किया।
उन्होंने कहा कि यह एक संवैधानिक संशोधन विधेयक है, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है और जनसंख्या के अनुरूप परिसीमन कर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को और प्रभावी बनाना जरूरी है। संजय सेठ ने कहा कि “आज देश की महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, उज्ज्वला योजना, शौचालय निर्माण जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में ऐतिहासिक परिवर्तन लाया है।”
उन्होंने विपक्ष पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि “कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कर अपने दोहरे चरित्र को पूरी तरह उजागर कर दिया है। एक ओर ये महिलाओँ के सशक्तिकरण की बात करते हैं, जबकि दूसरी ओर जब उन्हें वास्तविक अधिकार देने का अवसर आता है तो ये पीछे हट जाते हैं।”
वहीं, हरियाणा की वरिष्ठ नेत्री किरण चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के संविधान निर्माताओं, विशेष रूप से डॉ. भीमराव अंबेडकर और उनके साथियों की सोच अत्यंत प्रगतिशील थी, जिन्होंने देश को प्रारंभ से ही महिलाओं को समान राजनीतिक अधिकार प्रदान किए। उन्होंने कहा कि “जहां कई विकसित देशों में महिलाओं को मतदान अधिकार के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा, वहीं भारत में शुरुआत से ही समानता का अधिकार दिया गया था।”
किरण चौधरी ने कहा कि दुर्भाग्यवश आजादी के 70 वर्षों बाद भी, विशेषकर कांग्रेस के लंबे शासनकाल में, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को वास्तविक रूप से लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि “महिला आरक्षण विधेयक को कई बार केवल दिखावे के लिए लाया गया, लेकिन वास्तविक इच्छाशक्ति के अभाव में इसे पारित नहीं कराया गया।”
उन्होंने कहा कि “2010 में पूर्ण बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस ने इस विधेयक को लोकसभा में पारित नहीं कराया, जो उनकी नीयत पर सवाल खड़ा करता है। महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया, लेकिन जब अधिकार देने की बात आई तो पीछे हट गए।”
किरण चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि “स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, जनधन खाते, आयुष्मान भारत और अन्य अनेक योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया है। आज गांवों में बेटियां शादी से पहले घर में शौचालय होने की शर्त रखती हैं—यह सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है।”
उन्होंने संसद में हुए घटनाक्रम पर दुख जताते हुए कहा कि “महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जिस प्रकार का व्यवहार विपक्ष ने किया, वह देश के इतिहास में एक काला अध्याय है। महिलाओं के अधिकारों को टालने और बाधित करने का यह प्रयास निंदनीय है।”
उन्होंने कहा कि “आज देश की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और राजनीतिक भागीदारी से उन्हें वंचित रखना अन्याय है। विपक्ष ने जानबूझकर परिसीमन और अन्य तकनीकी मुद्दों को बहाना बनाकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोका।”
प्रेस वार्ता के अंत में भाजपा नेताओं ने विश्वास जताया कि देश की नारी शक्ति इस मुद्दे को भलीभांति समझती है और भविष्य में इसका लोकतांत्रिक जवाब अवश्य देगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने का संकल्प हर हाल में पूरा किया जाएगा और देश की बेटियों को उनका अधिकार अवश्य मिलेगा।