राज्यसभा चुनाव में एक्सपोज हुए दो विफल मैनेजर - दुष्यंत चौटाला
March 17, 2026 06:19 PM
चंडीगढ़, 17 मार्च। सोमवार को हुए हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के चुनाव में चली खींचतान को पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में विधायकों की क्रॉसवोटिंग और वोट रद्द होने से भाजपा तथा कांग्रेस दोनों दलों की साजिश बेनक़ाब होकर आम लोगों के सामने आ गई हैं। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि हैरानी जताते हुए कहा कि दो बार मुख्यमंत्री रहे और चौथी बार नेता प्रतिपक्ष बने भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने 37 विधायकों को एकजुट नहीं रख पाए। इससे उनके इरादे साफ जाहिर हो रहे हैँ। दूसरी और निर्दलीय उम्मीदवार को जीतवाने के लिए भाजपा और नायब सरकार जिस तरह क्रॉसवोटिंग और वोट रद्द करवाने के षड़यंत्र में शामिल दिखी है, उससे भाजपा भी बेनक़ाब हो गई है और ये बात भी अब स्पष्ट हो गई है कि भाजपा का लोकतंत्र में कतई विश्वास नहीं है।
पूर्व डिप्टी सीएम ने भाजपा और कांग्रेस पर व्यंग्य कस्ते हुए कहा कि इस चुनाव में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री नायब सिंह और कांग्रेस की तरफ से नेता विपक्ष भूपेन्द्र सिंह हुड्डा दोनों ही अपने टारगेट को साधने में नाकाम रहे हैँ । सीएम नायब सिंह ने जहाँ विफल प्रयास से अपनी पार्टी की फ़ज़ीहत करवाई, वहीं कांग्रेसी विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने भूपेन्द्र हुड्डा को ‘विफल नेता विपक्ष’ साबित कर दिया है।
जेजेपी वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दुष्यंत चौटाला ने आशंका जाहिर की कि कांग्रेस के पांच विधायकों की क्रॉसवोटिंग भाजपा और हरियाणा सरकार की तरफ से भारी प्रलोभन दिए बगैर संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक निंदा का विषय है और क्रॉसवोटिंग करने वाले कांग्रेसी विधायकों को सामने लाकर उनसे इसकी वजह पूछी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में वोट चोरी की बातें लगातार कही जाती है लेकिन सोमवार रात इसे हरियाणा विधानसभा में प्रत्यक्ष रूप से देखा गया। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व ने लोकतंत्र और राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया को दूषित किया है और यह बहुत चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री को सरकारी तंत्र का इस तरह दुरुपयोग करने की बजाय स्वस्थ व्यवस्था बनाने और विकास कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने इस चुनाव में सामने आए कांग्रेस पार्टी के खोखलेपन पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ 37 विधायकों को सही ट्रेनिंग देने और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा बनाए रखने में कांग्रेस की विफलता असल में नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की नाकामी है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि या तो भूपेंद्र हुड्डा जेल जाने के डर से जानबूझकर भाजपा के आगे नतमस्तक हैं, या फिर उनका अपने विधायकों पर कोई नियंत्रण नहीं है। नेता विपक्ष एक संवैधानिक पद है और इस पद पर होते हुए उन्हें अपने विधायकों की क्रॉसवोटिंग और वोट रद्द करवाने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि अगर हुड्डा को यह लगता है कि भाजपा या सरकारी अधिकारियों ने कोई गड़बड़ की है तो उन्हें इसके खिलाफ अदालत में जाना चाहिए।
दुष्यंत चौटाला ने इस चुनाव में वोट ना डालने वाले दो विधायकों को भी गैरजिम्मदेार बताया और कहा कि लाखों मतदाता किसी विधायक को चुनकर विधानसभा भेजते हैं और वहां राज्यसभा चुनाव में गैरहाजिर रहकर इन विधायकों ने अपने हलके के मतदाताओं की आवाज को चुप करवा दिया है। उन्होंने कहा कि ये दो विधायक अगर सही भूमिका निभाते तो वोटों के खरीद-फरोख्त करने वालों पर रोक लग सकती थी। उन्होंने कहा कि राजनीति में तटस्थ रहना भी एक अपराध है और यह दोहरे चरित्र को दर्शाता है।
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