धर्मशाला: 01.07.25-हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा आयोजित दो दिवसीय संसदीय संघ भारत क्षेत्र -॥ का वार्षिक सम्मेलन आज उद्देश्यपूर्ण तथा सार्थक चर्चा के साथ सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन का कुल आठ राज्यों की विधान सभाओं तथा तेलंगाना विधान परिषद के चेयरमैन समेत कुल 38 प्रतिनिधियों ने सम्बोधित किया तथा सार्थक चर्चा के माध्यम से भविष्य की उम्मीदों तथा परिकल्पनाओं को जागृत करने का प्रयास किया।
आज पूर्वाह्न 11:00 बजे आरम्भ हुए सत्र में आज के लिए प्रस्तावित दो महत्वपूर्ण विषयों क्रमश: “अनुच्छेद 102 (2) और 101 (2) की 10वीं अनुसूची के तहत दलबदल के आधार पर अयोग्यता का प्रावधान” तथा “विधान सभाओं मे ए0 आई0 (कृत्रिम बुद्विमता) का उपयोग” पर गहरा मंथन किया गया जिस पर सभी प्रतिनिधियों ने अपने सम्बोधनों द्वारा महत्वपूर्ण सुझाव दिए तथा दोनों विषयों पर स्वतन्त्र भाव के साथ स्वतन्त्र विचारों की अभिव्यक्ति की ।
इस अवसर पर सत्र को सम्बोधित करते हुए विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने कहा कि मैं आप सभी का आभारी हूँ जिन्होने खराब मौसम के बावजूद भी इस सम्मेलन के महत्व को समझते हुए इसमे भाग लिया और अपने प्रखर तथा स्वतन्त्र विचारों से हम सभी को अवगत करवाया। इस अवसर पर अपना सम्बोधन देते हुए पठानियां ने कहा कि वह ए0 आई0 (कृत्रिम बुद्विमता) पर ज्यादा नहीं बोलना चाहते क्योंकि डिजिटल अभियान में हिमाचल प्रदेश अग्रणी रहा है। देश की सर्वप्रथम ई- विधान प्रणाली का सूत्रधार भी हिमाचल है जिसका शुभारम्भ वर्ष 2014 में हुआ था। इस विषय पर उनके भी वहीं विचार जो आप सभी ने सांझा किए हैं।
पठानियां ने कहा कि दलबदल कानून पर वह बोलना चाहेंगे क्योंकि दलबदल पर उन्हीं के एक फैसले से छ: विधान सभा सदस्यों को अपनी सदस्यता खोनी पड़ी थी जिसको माननीय उच्च न्यायालय ने भी अपनी मान्यता दी थी। पठानियां ने कहा कि दलबदल कानून को और भी मजबूत तथा सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि जनप्रतिनिधि लोगों के विश्वास को बनाए रखते हुए इसकी अवहेलना न कर सकें। यदि दलबदल कानून सख्त होगा तो सरकार भी पूरे आत्म विश्वास के साथ कार्य करेगी तथा अपना निर्धारित कार्यकाल भी पूरा करेगी।
पठानियां नें यह भी कहा कि विधान सभा ने इस कानून को पारित कर दिया है जिसमें प्रावधान किया है कि कोई भी सदस्य अगर दलबदल कानून के तहत अपनी सदस्यता खोता है तो वह विधान सभा से मिलने वाली सभी सुविधाओं व पेंशन से वंचित होगा तथा अगले छ: वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य घोषित होगा। सम्मेलन के दौरान उन्होने जिक्र किया कि हमारे पास संसाधन तो हैं लेकिन उस पर हमारा कानूनी हक व नियंत्रण नहीं है यदि हमारा उस पर नियंत्रण नहीं है तो विकास कैसे सम्भव होगा। उन्होने कहा कि हालांकि कानून बनाने का अधिकार विधान सभा तथा लोक सभा दोनों के पास है लेकिन लोक सभा द्वारा पारित कानून ही सर्वोपरि है।
अपराह्न 3:30 बजे सम्मेलन का समापन समारोह आरम्भ हुआ जिसमें माननीय राज्यपाल हि0प्र0 शिव प्रताप शुक्ल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री हि0प्र0 मुकेश अग्निहोत्री, राज्य सभा के उप-सभापति हरिवंश भी उपस्थित थे।
विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने सदन में मौजूद सभी प्रतिनिधियों का शॉल टोपी पहनाकर स्वागत किया तथा सम्मेलन में भाग लेने पर आभार प्रकट किया तथा उन्होने सदन में मौजूद सभी प्रतिनिधियों का अपने सार्थक तथा बहुमुल्य सुझाव देने के लिए धन्यवाद दिया। समापन समारोह को माननीय राज्यपाल हि0प्र0 शिव प्रताप शुक्ल, माननीय उप-मुख्यमंत्री हि0प्र0 मुकेश अग्निहोत्री, राज्य सभा के उप-सभापति हरिवंश ने भी सम्बोधित किया तथा कार्यक्रम के अन्त में विधान सभा उपाध्यक्ष विनय कुमार ने सभी अतिथियों को सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपने सम्बोधन के माध्यम से धन्यवाद दिया।
(हरदयाल भारद्वाज)
संयुक्त निदेशक एवं मुख्य प्रवक्ता,
हि0 प्र0 विधान सभा।
प्रतिलिपि:
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2 संवादाता आकाशवाणी / दूरदर्शन केन्द्र शिमला ।