ऊना जिला में मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना से तीन वर्षों में 85,826 किसान लाभान्वित
ऊना, 20 जनवरी। हिमाचल प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना किसानों के लिए एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना किसानों को उन्नत, टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज, पौध संरक्षण सामग्री एवं खाद उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभा रही है।
उप निदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन के अनुरूप ऊना जिला में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत विभाग द्वारा निर्धारित दरों पर बीज एवं खाद पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही पेखुबेला स्थित सरकारी फार्म एवं मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशाला के लिए भी नियमित बजट का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि बीते तीन वर्षों में 8.78 करोड़ रुपये व्यय कर 85,826 किसानों को योजना से लाभान्वित किया गया है। इनमें वर्ष 2023-24 में 3.19 करोड़ रुपये खर्च कर 15,377, वर्ष 2024-25 में 3.16 करोड़ रुपये खर्च कर 48,646 तथा वर्ष 2025-26 में 2.43 करोड़ रुपये व्यय कर 21,803 किसानों को लाभ पहुंचाया गया है।
मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के मुख्य घटक
मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के अंतर्गत समूह आधारित सब्जी उत्पादन योजना, आदान आधारित उपदान योजना (बीज, पौध संरक्षण सामग्री एवं खाद), बीज गुणन श्रृंखला की सुदृढ़ता और प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण जैसे घटक शामिल हैं।
समूह आधारित सब्जी उत्पादन योजना
प्रदेश में सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए कृषि विभाग द्वारा समूह पद्धति के माध्यम से सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल से न केवल सब्जी फसलों के उत्पादन में वृद्धि हो रही है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही युवा एवं महिला किसानों को कृषि व्यवसाय और लघु उद्योगों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
आदान आधारित उपदान योजना
बीज को कृषि का सबसे महत्वपूर्ण आदान मानते हुए सरकार द्वारा किसानों को अनाज, दाल, तिलहन एवं चारा फसलों के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान, जबकि आलू, अदरक और हल्दी के बीजों पर 25 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मिश्रित खादों पर भी उपदान दिया जा रहा है।
राज्य सरकार ने फसलों के संरक्षण के लिए गैर-रसायनिक उपायों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत कीट ट्रैप, ल्योर, जैव नियंत्रक, जैविक कीटनाशक एवं वानस्पतिक नियंत्रकों पर सभी वर्गों के किसानों को 50 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। बीज गुणन गतिविधियों से प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण
कृषि विभाग द्वारा प्रदेश में 11 मृदा परीक्षण, 3 उर्वरक परीक्षण, 3 बीज परीक्षण, 2 जैव नियंत्रण, 1 राज्य कीटनाशक परीक्षण तथा 1 जैव उर्वरक उत्पादन एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला संचालित की जा रही हैं। किसानों को मृदा स्वास्थ्य आकलन के लिए निःशुल्क मृदा जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
गैर-रसायनिक कीट नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए कांगड़ा और मंडी जिलों में जैव नियंत्रण प्रयोगशालाएं किसानों के खेतों में जैव एजेंट, जैव कीटनाशक, ट्रैप और ल्योर आदि का निःशुल्क प्रदर्शन भी कर रही हैं।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि किसानों की समृद्धि में ही जिले और प्रदेश की समृद्धि निहित है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार ऊना जिला में कृषि विभाग किसानों को सरकारी सब्सिडी पर उन्नत किस्म के बीज, खाद और कृषि उपकरण उपलब्ध करवा रहा है। जिला प्रशासन किसानों की सेवा और सुविधा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
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ऊना जिला में मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना से तीन वर्षों में 85,826 किसान लाभान्वित
ऊना, 20 जनवरी। हिमाचल प्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना किसानों के लिए एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना किसानों को उन्नत, टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज, पौध संरक्षण सामग्री एवं खाद उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभा रही है।
उप निदेशक कृषि कुलभूषण धीमान ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन के अनुरूप ऊना जिला में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत विभाग द्वारा निर्धारित दरों पर बीज एवं खाद पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही पेखुबेला स्थित सरकारी फार्म एवं मृदा प्रशिक्षण प्रयोगशाला के लिए भी नियमित बजट का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि बीते तीन वर्षों में 8.78 करोड़ रुपये व्यय कर 85,826 किसानों को योजना से लाभान्वित किया गया है। इनमें वर्ष 2023-24 में 3.19 करोड़ रुपये खर्च कर 15,377, वर्ष 2024-25 में 3.16 करोड़ रुपये खर्च कर 48,646 तथा वर्ष 2025-26 में 2.43 करोड़ रुपये व्यय कर 21,803 किसानों को लाभ पहुंचाया गया है।
मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के मुख्य घटक
मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के अंतर्गत समूह आधारित सब्जी उत्पादन योजना, आदान आधारित उपदान योजना (बीज, पौध संरक्षण सामग्री एवं खाद), बीज गुणन श्रृंखला की सुदृढ़ता और प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण जैसे घटक शामिल हैं।
समूह आधारित सब्जी उत्पादन योजना
प्रदेश में सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए कृषि विभाग द्वारा समूह पद्धति के माध्यम से सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल से न केवल सब्जी फसलों के उत्पादन में वृद्धि हो रही है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही युवा एवं महिला किसानों को कृषि व्यवसाय और लघु उद्योगों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
आदान आधारित उपदान योजना
बीज को कृषि का सबसे महत्वपूर्ण आदान मानते हुए सरकार द्वारा किसानों को अनाज, दाल, तिलहन एवं चारा फसलों के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान, जबकि आलू, अदरक और हल्दी के बीजों पर 25 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मिश्रित खादों पर भी उपदान दिया जा रहा है।
राज्य सरकार ने फसलों के संरक्षण के लिए गैर-रसायनिक उपायों को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत कीट ट्रैप, ल्योर, जैव नियंत्रक, जैविक कीटनाशक एवं वानस्पतिक नियंत्रकों पर सभी वर्गों के किसानों को 50 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। बीज गुणन गतिविधियों से प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रयोगशालाओं का सशक्तिकरण
कृषि विभाग द्वारा प्रदेश में 11 मृदा परीक्षण, 3 उर्वरक परीक्षण, 3 बीज परीक्षण, 2 जैव नियंत्रण, 1 राज्य कीटनाशक परीक्षण तथा 1 जैव उर्वरक उत्पादन एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला संचालित की जा रही हैं। किसानों को मृदा स्वास्थ्य आकलन के लिए निःशुल्क मृदा जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
गैर-रसायनिक कीट नियंत्रण को बढ़ावा देने के लिए कांगड़ा और मंडी जिलों में जैव नियंत्रण प्रयोगशालाएं किसानों के खेतों में जैव एजेंट, जैव कीटनाशक, ट्रैप और ल्योर आदि का निःशुल्क प्रदर्शन भी कर रही हैं।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि किसानों की समृद्धि में ही जिले और प्रदेश की समृद्धि निहित है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार ऊना जिला में कृषि विभाग किसानों को सरकारी सब्सिडी पर उन्नत किस्म के बीज, खाद और कृषि उपकरण उपलब्ध करवा रहा है। जिला प्रशासन किसानों की सेवा और सुविधा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
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जिला में पटवारियों के 20 पद सेवानिवृत्त अधिकारियों से भरे जाएंगे, 27 जनवरी तक कर सकते हैं आवेदनऊना, 20 जनवरी। उपायुक्त कार्यालय ऊना में राजस्व विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारियों से 20 पद पटवारियों के पारिश्रमिक आधार पर भरे जाएंगे। इस संबंध में जानकारी देते हुए उपायुक्त जतिन लाल ने बताया कि सेवानिवृत अधिकारी अपना आवेदन पात्र सभी अनिवार्य प्रमाण-पत्रों के साथ उपायुक्त कार्यालय के कमरा नं. 313 में 27 जनवरी सायं 3 बजे से पहले जमा करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि निर्धारित समयावधि के भीतर आवेदन न पहुंचने की स्थिति में आवेदन अस्वीकार कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इच्छुक आवेदकर्त्ता पदों से संबंधित नियम एवं शर्तें और आवेदन फॉर्म http://hpuna.nic.in डाउनलोड कर सकते हैं।उपायुक्त ने बताया कि आवेदक द्वारा सेवानिवृत्ति से पहले हिमाचल प्रदेश के राजस्व विभाग के किसी भी विंग में न्यूनतम 5 वर्ष की सेवाएं प्रदान की हो तथा उनके खिलाफ कोई विभागीय/अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नही होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि आवेदक की आयु 65 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा पटवारी पद के लिए 40 हज़ार रूपये वेतन देय होगा। इच्छुक आवेदक इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए उपायुक्त कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस पर सम्पर्क कर सकते हैं।
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ऊना जिला के निजी स्कूलों की मान्यता व नवीनीकरण हेतु 15 मार्च तक करें ऑनलाइन आवेदन - सोमलाल धीमान
ऊना, 20 जनवरी। उप निदेशक स्कूल शिक्षा (प्रारम्भिक) ऊना द्वारा जिला ऊना के सभी निजी विद्यालयों के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की मान्यता एवं नवीनीकरण प्रक्रिया से संबंधित शेड्यूल जारी कर दिया गया है।उप निदेशक, ऊना सोमलाल धीमान ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 2(एन) उपखंड (दो) व (चार) के तहत सभी निजी विद्यालयों के प्रबंधकों को प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के आरंभ से कम से कम 15 दिन पूर्व निर्धारित प्रपत्र पर अपना स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से 15 मार्च 2026 तक वेबसाइटhttps://emerginghimachal.hp.gov.in/ पर किए जा सकते हैं।उन्होंने बताया कि जिन निजी शिक्षण संस्थानों की मान्यता अवधि पाँच वर्ष पूर्ण हो चुकी है, उन्हें नई मान्यता के लिए आवेदन करना होगा तथा आवश्यक दस्तावेजों सहित फाइल संबंधित कार्यालय में भी जमा करवानी होगी। निरीक्षण एवं मान्यता प्रदान करने कक्षा 1 से 8 तक 10 हज़ार रूपये, कक्षा 6 से 8 तक तक 5 हज़ार रूपये तथा वार्षिक नवीनीकरण शुल्क 500 रूपये ऑनलाइन माध्यम से सरकारी कोष में जमा करवाना होगा।श्री धीमान ने बताया कि यदि कोई निजी विद्यालय बिना मान्यता प्राप्त किए अथवा मान्यता अस्वीकृत होने के बावजूद संचालित पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 18(5) के अंतर्गत जुर्माने सहित कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।इसके अलावा उन्होंने सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि धारा 12(1)(सी) के अंतर्गत गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रवेश स्तर पर कुल संख्या के 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग एवं वंचित समूह के बच्चों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित रखा जाए। इसके लिए उचित व्यवस्था करना एवं व्यापक प्रचार-प्रसार करना विद्यालय प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। साथ ही विद्यालयों में योग्य अध्यापकों का चयन धारा 23(1) के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार करने, विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित भवन, अग्निशमन सुविधा, स्वच्छता तथा पर्याप्त संख्या में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।उप निदेशक ने सभी निजी विद्यालय प्रबंधनों से अपील की है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का समयबद्ध पालन कर गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में सहयोग करें।
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एसडीआरएफ के तहत जल शक्ति मंडल हरोली में चल रहे 25.59 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा कार्यों का निरीक्षण
उपायुक्त जतिन लाल की अध्यक्षता में संयुक्त निगरानी समिति ने लिया जायजा, 85 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण
ऊना, 20 जनवरी. राज्य आपदा शमन कोष (एसडीआरएफ) के तहत जल शक्ति मंडल हरोली के अंतर्गत चल रहे बाढ़ संरक्षण कार्यों का उपायुक्त ऊना जतिन लाल की अध्यक्षता में गठित संयुक्त निगरानी समिति ने मंगलवार को निरीक्षण किया। इस संयुक्त निगरानी समिति में अधीक्षण अभियंता जल शक्ति विभाग ऊना, अधीक्षण अभियंता स्वां नदी बाढ़ प्रबंधन परियोजना सर्किल ऊना और अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग ऊना सदस्य के रूप में शामिल हैं, जबकि जिला राजस्व अधिकारी ऊना सदस्य सचिव हैं।
निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता जल शक्ति विभाग नरेश धीमान सहित समिति के अन्य सदस्य और जल शक्ति मंडल हरोली तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
संयुक्त निगरानी समिति ने इस अवसर पर कुल 9 बाढ़ संरक्षण कार्यों का निरीक्षण किया, जिनकी कुल स्वीकृत अनुमानित लागत 25.59 करोड़ रुपये है। इन कार्यों में मोहल्ला टालियां, अठवाई खड्ड (पंडोगा), हरिजन बस्ती (खड्ड), सीर नाला, घालूवाल, हरोली खड्ड, भदसाली खड्ड (मोहल्ला थोलियां), बाथड़ी खड्ड तथा पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।
समिति ने निरीक्षण के दौरान इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सभी कार्य एसडीआरएफ के मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं तथा भौतिक रूप से लगभग 85 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुके हैं। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष बचे कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि आगामी बरसात के दौरान संभावित नुकसान से क्षेत्र को सुरक्षित रखा जा सके।
उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि बाढ़ संरक्षण कार्यों को तय मानकों के अनुसार गुणवत्ता के साथ समयबद्ध पूरा करना प्राथमिकता है, ताकि आगामी बरसात में जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के लिए शेष धनराशि भी शीघ्र उपलब्ध करवाई जाएगी, ताकि कार्य समय रहते पूरे हों और बरसात में किसी प्रकार की क्षति न हो।
इस दौरान जल शक्ति मंडल हरोली के अधिशासी अभियंता पुनीत शर्मा ने अवगत करवाया कि इन परियोजनाओं के लिए अब तक 13.42 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है, जिसका पूर्ण रूप से व्यय किया जा चुका है, जबकि लगभग 12.17 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होना शेष है। उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि शेष धनराशि शीघ्र उपलब्ध करवाने के लिए मामला उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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